गुजरात BJP में घमासान, विधायक का बगावती तेवर, धरने पर बैठीं… इस्तीफे की धमकी
गुजरात बीजेपी में अंदरूनी कलह की खबरों के बीच एक विधायक ने कथित अपमान को लेकर मोर्चा खोल दिया है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है.. आम आदमी पार्टी के फायरब्रांड नेता और विधायक चैतर वसावा के मजबूत होते प्रभाव के कारण नर्मदा जिला.. भाजपा के लिए चुनौती बनता जा रहा है.. अब इस जिले में एक चौंकाने वाली राजनीतिक घटना सामने आई है.. जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन के 12 साल पूरे होने के मौके पर.. राजपीपला के अंबेडकर हॉल में आयोजित ‘प्रबुद्ध नागरिक सम्मान’ कार्यक्रम में भाजपा की अंदरूनी नाराजगी खुलकर सामने आ गई.. स्थानीय महिला विधायक डॉ. दर्शना देशमुख का ठीक से स्वागत नहीं किया गया.. और प्रोटोकॉल का खुला उल्लंघन हुआ.. इससे नाराज होकर विधायक कार्यक्रम बीच में छोड़कर चली गईं.. और वाडिया के गांधी चौक पर धरने पर बैठ गईं.. उनके समर्थन में भरूच के सांसद मनसुख वसावा भी धरने में शामिल हो गए.. वहीं इस घटना ने नर्मदा जिले की राजनीति को पूरी तरह गरमा दिया है..
बता दें कि यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के 12 साल के कार्यकाल को समर्पित था.. जिले के कई गणमान्य व्यक्ति, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद थे.. लेकिन स्थानीय भाजपा महिला विधायक डॉ. दर्शना देशमुख, जो नादोद सीट से 2022 में जीती थीं.. उनका उचित सम्मान नहीं किया गया.. और उन्हें कार्यक्रम में बोलने का मौका भी नहीं दिया गया.. जब विधायक ने इस उपेक्षा पर विरोध जताया तो स्थिति और बिगड़ गई.. डॉ. दर्शना देशमुख ने कार्यक्रम से निकलते समय गुस्से में कहा कि मैं चुनाव जीतकर आई हूं.. पैराग्लाइडिंग करके नहीं आई हूं.. क्या आप मुझे यहां सिर्फ बेइज्जत करने के लिए बुलाते हैं.. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जिला भाजपा अध्यक्ष नील राव पिछले दो साल से उनका लगातार अपमान कर रहे हैं..
डॉ. दर्शना देशमुख भाजपा की एक सक्रिय और लोकप्रिय महिला नेता हैं.. वे पेशे से डॉक्टर हैं और गायनेकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) हैं.. उन्होंने एमडी की डिग्री हासिल की है.. उनकी राजनीतिक विरासत भी मजबूत है.. वे भरूच के पहले भाजपा सांसद चंदूभाई देशमुख की बेटी हैं.. चंदूभाई देशमुख ने कांग्रेस के कद्दावर नेता को हराकर भरूच सीट पर भाजपा की जीत दिलाई थी.. उस समय नरेंद्र मोदी ने इस रणनीति को तैयार किया था.. तब से भरूच सीट कांग्रेस नहीं जीत पाई है.. दर्शना देशमुख ने 2022 के विधानसभा चुनाव में नादोद सीट से जीत हासिल की थी.. वे आदिवासी क्षेत्र की नेता के रूप में जानी जाती हैं.. और स्थानीय मुद्दों पर सक्रिय रहती हैं..
कार्यक्रम के दौरान डॉ. दर्शना देशमुख को न तो स्टेज पर बुलाया गया.. और न ही उनका उचित स्वागत किया गया.. प्रोटोकॉल के अनुसार विधायक को सम्मान मिलना चाहिए था.. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.. इससे नाराज होकर वे कार्यक्रम छोड़कर बाहर चली गईं.. और वाडिया के गांधी चौक पर उन्होंने धरना शुरू कर दिया.. उनके साथ कई स्थानीय कार्यकर्ता भी बैठ गए.. भरूच के सांसद मनसुख वसावा ने भी उनका साथ दिया.. इस घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी..
दर्शना देशमुख ने मीडिया से बात करते हुए जिला भाजपा अध्यक्ष नील राव पर गंभीर आरोप लगाए.. और उन्होंने कहा कि नील राव पिछले दो साल से उनका लगातार अपमान कर रहे हैं.. गांधीनगर के एक बड़े मंत्री का संरक्षण मिलने के कारण नील राव मनमानी कर रहे हैं.. दर्शना ने कहा कि इसी तरह की नीतियों की वजह से भाजपा कई चुनाव हार रही है.. उन्होंने धमकी देते हुए कहा कि अगर पार्टी और संगठन में सुधार नहीं हुआ तो वे भाजपा संगठन और विधायक पद से इस्तीफा दे सकती हैं..
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नर्मदा जिले के भाजपा अध्यक्ष नील राव की नजर नादोद सीट पर है.. वे अपनी पत्नी को इस सीट से टिकट दिलाना चाहते हैं.. इसी वजह से दर्शना देशमुख और नील राव के बीच संबंध खराब चल रहे हैं.. दर्शना देशमुख ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष उन्हें बार-बार उपेक्षित करते हैं.. कार्यक्रम में बोलने का मौका न देना इसी उपेक्षा का हिस्सा था.. और उन्होंने कहा कि मैं चुनाव जीतकर आई हूं, पैराग्लाइडिंग करके नहीं.. इन लोगों को आदिवासी समुदाय की कोई परवाह नहीं है..
भरूच के भाजपा सांसद मनसुख वसावा ने दर्शना देशमुख का समर्थन किया और धरने में शामिल हुए.. इससे भाजपा के अंदरूनी कलह की तस्वीर और साफ हो गई.. वहीं AAP के डेडियापाड़ा से विधायक चैतर वसावा ने भी दर्शना देशमुख का समर्थन किया.. चैतर वसावा ने कहा कि भाजपा में महिलाओं और स्थानीय नेताओं की उपेक्षा हो रही है.. उन्होंने इसे भाजपा की कमजोरी बताया और कहा कि AAP नर्मदा जिले में मजबूत हो रही है..
आपको बता दें कि कार्यक्रम में मौजूद जिले के प्रभारी मंत्री ईश्वर सिंह पटेल और पूर्व मंत्री गणपत सिंह वसावा हालात को संभालने के लिए राजपीपला सर्किट हाउस पहुंचे.. उन्होंने दर्शना देशमुख को बुलाया, लेकिन विधायक ने मिलने से इनकार कर दिया.. उन्होंने कहा कि पहले जिला अध्यक्ष नील राव को कार्रवाई करनी चाहिए.. यह घटना भाजपा के अंदरूनी कलह को उजागर करती है.. नर्मदा जिले में डॉ. दर्शना देशमुख की लोकप्रियता है.. लेकिन जिला अध्यक्ष नील राव के रवैये से कई कार्यकर्ता नाराज हैं..
2022 के चुनाव में दर्शना की जीत के बावजूद उन्हें सम्मान नहीं मिल रहा.. राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि अगर यह कलह नहीं सुलझी तो 2027 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को नुकसान हो सकता है.. चैतर वसावा जैसे AAP नेता इस कलह का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं.. नर्मदा जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है.. यहां आदिवासी समुदाय की बड़ी आबादी है.. डॉ. दर्शना देशमुख आदिवासी मुद्दों पर सक्रिय रही हैं.. यदि वे नाराज रहीं तो भाजपा को आदिवासी वोट बैंक में नुकसान हो सकता है..



