पेपर लीक पर मोदी को तोड़नी पड़ी चुप्पी, अब देंगे इस्तीफा

पेपर लीक का मामला इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर से युवाओं ने मानों वर्षों से सोइ हुई सरकार को जगा दिया हो।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पेपर लीक का मामला इन दिनों चर्चा में बना हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर से युवाओं ने मानों वर्षों से सोइ हुई सरकार को जगा दिया हो।

तभी तो जो सरकार कायदे से युवाओं के मुद्दों पर बात भी नहीं करना पंसद नहीं करती थी आज उसे भी कहीं न कहीं सफाई पेश करनी पड़ रही है। जी हाँ दोस्तों सही सुना आपने दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी ने आज ऐलान किया कि पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनाए जाएंगे। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

पीएम का यह ऐलान कॉकरोच जनता पार्टी और विपक्ष के प्रदर्शन के बीच आया है। सीजेपी पिछले 34 दिन से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वहीं, एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक 26 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। वे गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं। वहीं उनका इलाज चल रहा है। पीएम मोदी ने X पर पोस्ट कर कहा, देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। लेकिन दोस्तों ये सब सिर्फ कहने की बातें हैं। एक तरफ पीएम मोदी ऐसे ऐलान करते हैं तो वहीं दूसरी तरफ पुलिस से बच्चों को पिटवाया जाता है।

खैर मोदी भले ही फि रसे इस मामले को लेकर सफाइयां पेश कर रहे हों लेकिन विपक्ष इस मामले को लेकर आगबबूला नजर आ रहा है। वहीं पीएम मोदी के इस ऐलान को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पेपर लीक के मूल कारणों पर सवाल उठाए।

आशुतोष रांका ने कहा कि पेपर लीक इसलिए हो रहे हैं क्योंकि व्यवस्था में नाकाबिल लोग बैठे हैं। उन्होंने जिम्मेदारी तय करने और दोषियों के मन में डर पैदा करने की बात कही। रांका ने व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया ताकि पेपर लीक की गुंजिश न रहे।

उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक एक संगठित गिरोह के जरिये होता है। इसमें नीचे से लेकर ऊपर तक कई लोग शामिल होते हैं और आर्थिक लाभ उठाते हैं। रांका ने कहा कि केवल कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस व्यवस्था को बदलना जरूरी है। उन्होंने पीएम के एक्स पोस्ट पर टिप्पणी की कि यह चोट लगने के बाद मरहम लगाने जैसा है। उनकी लड़ाई चोट लगने के कारणों को लेकर है।

वहीं इसे लेकर जयराम रमेश ने कहा, ‘संसदीय कार्य मंत्री हमेशा की तरह दुष्प्रचार फैला रहे हैं. आज सुबह राज्यसभा के सभापति द्वारा अनुमति दिए जाने के बावजूद भाजपा सांसदों ने राज्यसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया. मंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग देशव्यापी मांग बन चुकी है और इसकी गूंज संसद में भी सुनाई दे रही है.

यह बेहद शर्मनाक है कि प्रधानमंत्री अब भी इस मांग को नजरअंदाज कर रहे हैं, जबकि यह जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए हर भारतीय की अपील है.’इसके साथ ही सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने कहा कि एक शिक्षक के तौर पर, मीडिया में अपने छात्रों की छवि खराब होते देखना मेरे लिए बहुत दुखद है.

छात्र जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं. अगर दिल्ली में कहीं और हिंसा की खबरें आती हैं, तो कृपया बिना सबूत के उन्हें इस आंदोलन से न जोड़ें. जो लोग इन युवाओं को सच में जानते हैं, उन्होंने इनका असाधारण धैर्य, अनुशासन और संयम देखा है. मैं अकसर सोचती हूं कि यह कैसा सिस्टम है जो इतनी जल्दी अपने ही छात्रों पर शक करने लगता है?

उनकी चिंताओं को सुनने के बजाय उनके इरादों पर सवाल उठाना ज़्यादा आसान क्यों लगता है? हमारे बच्चे सुरक्षा के हकदार हैं, न कि उन्हें विलेन के तौर पर दिखाए जाने के. उनकी आवाज़ सुनी जानी चाहिए, न कि ऐसे नैरेटिव से दबा दी जानी चाहिए जो कुछ खास लोगों के स्वार्थ को पूरा करते हों.

इतना ही नहीं कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पीएम मोदी पर बड़ा हमला बोला है। कुछ देर पहले पीएम मोदी ने पेपर लीक मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का आदेश दिया है। पीएम मोदी ने ये जानकारी एक्स पर साझा की, जिस पर रिपोस्ट करते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लिखा -आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।

आपने न सिर्फ हमारी शिक्षा प्रणाली पर पूरा कब्जा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया – और इसके जिम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया। छात्रों की मांगें साफ हैं: पहला धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं। दूसरा छात्रों से माफी मांगे। और छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करें।

वहीं जिस फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट की बात पीएम मोदी कर रहे हैं उसकी बात की जाये तो आपको बता दें कि देश में अब तक पेपर लीक मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती थी, इसलिए फैसला आने में कई साल लग जाते थे।

अब प्रधानमंत्री ने इसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है, ताकि फैसला तेजी से हो सके।भारत में फास्ट ट्रैक कोर्ट की शुरुआत साल 2000 में हुई थी। इनका गठन 11वें वित्त आयोग की सिफारिश पर किया गया था। आयोग ने देशभर में 1734 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने के लिए स्पेशल फंड की अनुशंसा की थी।

फास्ट ट्रैक कोर्ट का रिकॉर्ड भी बेहतर रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार, रेप और POCSO मामलों के लिए बनी फास्ट ट्रैक कोर्ट ने 2019 से 2025 तक 3.06 लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया है। इन अदालतों में मामलों के निपटारे का रेट 96.28% है, यानी जितने नए मामले आए, लगभग उतने ही मामलों का निपटारा भी हुआ। हालांकि, नए मामले लगातार दर्ज होने के कारण 2025 के अंत तक 2.45 लाख से ज्यादा मामले पेंडिंग थे, जबकि 2024 के अंत में यह संख्या 2.04 लाख थी।

प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस पूरे मामले का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। उन्होंने केवल मुद्दे को दबाने की कोशिश न करने की बात कही।प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने को कहा।

उन्होंने प्रधानमंत्री से जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया, न कि केवल सामाजिक मंच पर बयान देने पर। उनका कहना है कि केवल एक्स पोस्ट करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने जमीन पर कार्रवाई की आवश्यकता बताई। उन्होंने ठोस कार्रवाई देखने की इच्छा व्यक्त की।

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