संसद में गूंजे 23 लाख सवाल, क्या आपका मुद्दा भी उठा?
संसद में हर दिन सरकार से कई सवाल पूछे जाते हैं. इनमें स्वास्थ्य, रोजगार और गरीबी जैसे मुद्दे शामिल होते हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: संसद में हर दिन सरकार से कई सवाल पूछे जाते हैं. इनमें स्वास्थ्य, रोजगार और गरीबी जैसे मुद्दे शामिल होते हैं.
आंकड़े बताते हैं कि लाखों सवालों के बीच कुछ अहम मुद्दों की हिस्सेदारी काफी कम रही है.
संसद में जब कोई सांसद सवाल पूछता है, तो वह सिर्फ एक सवाल नहीं होता. उसके पीछे किसी इलाके की सड़क, किसान की फसल, मरीज का इलाज, युवा की नौकरी या परिवार की महंगाई जैसी समस्या हो सकती है.
संसद का प्रश्नकाल सरकार से जवाब मांगने का अहम जरिया है. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि लाखों सवालों के बीच आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े मुद्दों को कितनी जगह मिलती है?
अलग-अलग अध्ययनों और संसदीय आंकड़ों को देखें तो तस्वीर काफी दिलचस्प है. 1999 से फरवरी 2023 के बीच लोकसभा में पूछे गए 3,45,566 सवालों के एक अध्ययन में करीब 7,000 सवाल गरीबी से जुड़े मिले.
यानी कुल सवालों में गरीबी से जुड़े सवालों की हिस्सेदारी करीब 2 फीसदी रही. वहीं दिसंबर 2015 से दिसंबर 2025 के बीच संसद में पूछे गए 23 लाख से ज्यादा सवालों में सिर्फ 8,702 सवाल जलवायु से जुड़े थे. यानी जलवायु से जुड़े सवाल भी कुल सवालों का करीब 3 फीसदी रहे.
संसद में आम लोगों के कौन से मुद्दे उठे?
संसद के सवालों में रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े कई मुद्दे शामिल रहे हैं. स्वास्थ्य के सवालों में कैंसर, डेंगू-मलेरिया, AIIMS और ग्रामीण स्वास्थ्य जैसे विषय उठे. शिक्षा में स्कूल और विश्वविद्यालय, रोजगार में प्रोविडेंट फंड और ग्रामीण रोजगार, जबकि कृषि में फसल नुकसान और किसानों से जुड़े सवाल पूछे गए. सड़क, रेलवे, पानी, गंगा, महिला सुरक्षा और बच्चों से जुड़े मुद्दे भी संसद में पहुंचे.
एक सत्र में आए 5,716 सवाल
राज्यसभा के 235वें सत्र, जो 23 अप्रैल से 13 मई 2015 तक चला, में सांसदों की ओर से 5,716 सवालों के नोटिस मिले. इनमें 3,771 तारांकित (मौखिक उत्तर) और 1,945 अतारांकित सवाल(लिखित उत्तर) थे. कुल 2,219 सवाल स्वीकार किए गए.
इनमें गृह मंत्रालय से जुड़े 427, वित्त से 424 और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण से 404 सवालों के नोटिस आए. शिक्षा से जुड़े 249, कृषि से 232, रेलवे से 219 और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से 218 सवाल आए.
गरीबी पर करीब 7 हजार सवाल
1999 से फरवरी 2023 तक के लोकसभा डेटा के अध्ययन में गरीबी से जुड़े करीब 7,000 सवाल मिले. अलग-अलग लोकसभाओं में सवालों की संख्या भी बदली. 2004-09 के दौरान 66,371, 2009-14 में 79,401, 2014-19 में 78,990 और 2019 से फरवरी 2023 तक 47,273 सवाल पूछे गए.
अध्ययन के मुताबिक गरीबी को देखने का नजरिया भी समय के साथ बदला. 2004 से 2014 के बीच इसे आर्थिक विकास और अधिकार आधारित नीतियों से जोड़कर देखा गया, जबकि बाद के दौर में बुनियादी सरकारी सेवाओं पर ज्यादा जोर दिखाई दिया.
जलवायु पर 10 साल में 8,702 सवाल
जलवायु से जुड़े सवालों का आंकड़ा भी अहम है. दिसंबर 2015 से दिसंबर 2025 के बीच 8,702 सवाल जलवायु से जुड़े थे. इनमें 2,938 सवाल, यानी 33.81 फीसदी, क्लीन एनर्जी और कार्बन उत्सर्जन कम करने से संबंधित थे.
इसके मुकाबले क्लाइमेट फाइनेंस पर सिर्फ 0.26 फीसदी और ग्लोबल क्लाइमेट गवर्नेंस पर 1.2 फीसदी सवाल रहे. रिपोर्ट के मुताबिक 2021 की उत्तराखंड ग्लेशियर आपदा और 2022 की रिकॉर्ड गर्मी जैसी बड़ी घटनाओं के बाद संबंधित विषयों पर संसद में सवाल बढ़े.



