सत्य निकेतन हादसे के बीच पुरानी आग का मुद्दा, 23 मौतों के जिम्मेदारों पर अब तक क्या कार्रवाई?
दिल्ली में हाल की घटनाओं ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सत्य निकेतन में इमारत गिरने से 6 और मालवीय नगर होटल आग में 23 लोगों की जान गई.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: दिल्ली में हाल की घटनाओं ने सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सत्य निकेतन में इमारत गिरने से 6 और मालवीय नगर होटल आग में 23 लोगों की जान गई.
दिल्ली में कभी बिल्डिंग धड़ाम हो रही, तो कभी होटल में आग लग जा रही…ये दोनों ही घटनाएं महज 4 महीने के भीतर की हैं. सत्य निकेतन में रविवार दोपहर पांच मंजिला पीजी इमारत गिर गई, जिसमें 6 लोगों की मौत हो गई. वहीं 3 जून को मालवीय नगर के होटल में आग लगने से 23 लोगों की मौत हो गई थी.
घटना कोई भी हो, जान निर्दोष लोगों की जा रही है. जब सवाल जिम्मेदारी का उठता है… तो मानो तस्वीर हर बार की तरह कुछ धुंधली सी नजर आती है, क्योंकि घटना के घटित होने के पहले तक सारे नियमों को तोड़ने वालों की जिम्मेदारी और जवाबदेही की जांच और निगरानी तो महज राम भरोसे है.
मालवीय नगर हादसे में आरोपियों पर अब तक क्या एक्शन?
बात करें मालवीय नगर हादसे की तो इस मामले में पुलिस की तरफ से चार्जशीट दाखिल की गई है. फिलहाल, इस मामले में कोर्ट ने चार्जशीट पर संज्ञान लिया है. 3 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने कहा, “ये चार्जशीट तीन आरोपियों के खिलाफ दाखिल की गई है. चार्जशीट देखने से साफ पता चलता है कि आरोपियों पर लगाए गए आरोप और रिकॉर्ड में मौजूद सबूत, मामले को आगे बढ़ाने के लिए शुरुआती तौर पर काफी हैं. इसलिए, ये कोर्ट चार्जशीट में बताए गए अपराधों का संज्ञान लेती है.”
इस मामले में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट भानु प्रताप होटल के मालिक लवकेश बजाज और दो अन्य लोगों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर सुनवाई की गई. इन पर आरोप है कि होटल का लाइसेंस न मिलने के बावजूद, इन्होंने ‘बेड-एंड-ब्रेकफास्ट’ (B&B) नियमों को तोड़ते हुए 26 कमरों वाला होटल चलाया गया.
कब होगी अगली सुनवाई?
दिल्ली पुलिस ने होटल में लगी आग के मामले में 1 सितंबर को बजाज, मैनेजर जय मिश्रा और रसोइया केशव नेगी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी. उनपर आरोप है कि होटल B&B नियमों को तोड़कर चलाया जा रहा था. उन्हें इन नियमों के मुताबिक, सिर्फ 6 कमरे रखने की अनुमति थी.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साफ कहा कि तीनों आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार हैं. इस मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी. इसी तारीख पर आरोप तय करने के लिए सुनवाई होगी.
पुलिस की तरफ से कोर्ट में लगभग 1,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की गई. इनमें कानूनी और मेडिकल डॉक्यूमेंट्स और दूसरे कागजात शामिल थे. पुलिस ने बताया कि जांच के दौरान 130 से ज्यादा गवाहों के बयान दर्ज किए गए.
स्थानीय लोगों ने क्या लगाए आरोप?
सत्य निकेतन के पीजी हादसे में भी स्थानीय लोगों ने सुरक्षा खामियों को उजागर किया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, 55 वर्ग गज में फैली इस बिल्डिंग को 1990 के दशक के आखिर में बनाया गया था. आस-पास दिल्ली विश्वविद्यालय के कई कॉलेज होने की वजह से छात्रों के बीच वहां रहने की डिमांड बढ़ गई.
स्थानीय लोगों का कहना है कि इसी वजह से करीब दो साल पहले इस बिल्डिंग में दो और मंजिलें जोड़ी गई थीं. फिलहाल, इस हादसे की असली वजह क्या है पुलिस इसकी जांच कर रही है. लेकिन सवाल अभी भी वही है, हादसे के पहले जिम्मेदारी और जवाबदेही की निगरानी किसके जिम्मे?


