सहारनपुर देहात में इंडिया गठबंधन की लहर
भाजपा के खिलाफ भरा है जनाक्रोश

जंतर-मंतर लाठीचार्ज से लेकर टूटी सडक़ों पर बोले लोग
हठधर्मी सरकार हटनी चाहिए, सत्ता परिवर्तन तय
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
सहारनपुर देहात। सहारनपुर देहात विधानसभा में इस बार माहौल बदला-बदला नजर आ रहा है। जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज से लेकर गांव की टूटी सडक़ें और ठप कारोबार तक, हर मुद्दे पर जनता भाजपा सरकार के खिलाफ मुखर हो रही है। लोगों का कहना है – इस बार सत्ता परिवर्तन तय है।
युवाओं में उबाल- राहुल का संघर्ष पसंद आ रहा है
स्थानीय युवक सोनू ने कहा,जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर भाजपा के खिलाफ जनता में जबरदस्त आक्रोश है। यह आक्रोश सहारनपुर देहात में जबरदस्त तरीके से फैल चुका है। जनता अब राहुल गांधी को पसंद कर रही है, राहुल गांधी का संघर्ष लोगों को काफी पसंद आ रहा है। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए लोकेंद्र कुमार ने कहा, जो लोग राहुल गांधी को पप्पू कहते थे, वह अब राहुल गांधी की ताकत को समझ गए हैं। हठधर्मी की सरकार हटनी चाहिए भैया। यहां इंडिया गठबंधन जीत दर्ज करेगा।

कारोबार ठप, रोजगार खत्म
कारोबारी इंतजार ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, भाजपा सरकार हमने देख ली, इसमें बहुत परेशानी है। रोजगार खत्म हो गया, सब कुछ इसमें ठप हो गया है। हमारा कारोबार भी एकदम ठप हो गया है। अगर इंडिया गठबंधन हो गया तो हमारा वोट इंडिया गठबंधन को जाएगा। नौशाद ने भी यही बात दोहराई, इंडिया गठबंधन ने बहुत काम किया है, कांग्रेस की जब सरकार थी तो हमें लाभ मिला है। इस बार पब्लिक सत्ता परिवर्तन चाहती है।
मोहद्दीपुर में विकास गायब-घुटनों तक पानी
वहीं मोहद्दीपुर गांव में विकास की पोल खुलती दिखी। ग्रामीण शाहिद ने कहा, हमारे गांव मोहद्दीपुर की सडक़ एकदम टूटी हुई है। बारिश होती है तो घुटनों तक पानी भर जाता है। हमारा परमानेंट रास्ता खराब हो गया है, गांव से बाहर निकलना मुश्किल है। प्रशासन केवल टाल-मटोल करता है, कोई काम नहीं करता। शाहिद ने कहा, चाहे बीजेपी रहे, चाहे सपा रहे, चाहे बीएसपी रहे, हमें सिर्फ विकास चाहिए। व्यापार की वजह से रोज दूर से होकर आना पड़ता है, हमारा मुख्य मुद्दा सडक़ है।
सहारनपुर देहात विस एक नजर
सहारनपुर देहात (सहारनपुर ग्रामीण) उत्तर प्रदेश की विधानसभा संख्या 4 का एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है, जहाँ वर्तमान विधायक समाजवादी पार्टी के आशु मलिक हैं। यह सहारनपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में आता है। इस सीट का अधिकांश हिस्सा ग्रामीण है। (पिछले विजेता) 2०22-आशु मलिक (समाजवादी पार्टी) 2०17-मंसूर अख्तर (कांग्रेस) 2०12-जगपाल सिंह (बहुजन समाज पार्टी)
विस गठन
यह निर्वाचन क्षेत्र पहली बार 1955 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आया था। वर्ष 2००8 के परिसीमन आदेश के बाद इसकी वर्तमान स्थिति और स्वरूप तय किया गया। यह उत्तर प्रदेश की विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में प्रमुख स्थान रखती है।
प्राचीन और पौराणिक काल
यह क्षेत्र बुद्ध के समय महाकौशल के राजा प्रसेनजित् के अधीन था। बाद में यह कुरु संघराज्य के अंतर्गत यौधेय, उशीनर और स्रुघ्न जनपदों में बंटा हुआ था। स्रुघ्न जनपद पूर्व में गंगा नदी और उत्तर में पहाडिय़ों तक फैला था, जिसके मध्य यमुना नदी बहती थी। सहारनपुर शहर की स्थापना लगभग 134० ईस्वी में हुई थी। इसका नाम सूफी संत शाह हरन चिश्ती के नाम पर रखा गया।
रोहिल्ला और मुगल काल
मुगलों और बाद में रोहिल्ला सरदारों का इस क्षेत्र के ग्रामीण और शहरी हिस्सों पर प्रभाव रहा। यहाँ के कई पुराने किले और इमारतें (जैसे रोहिल्ला राजाओं से जुड़े स्थल) इस काल की गवाही देते हैं।
ब्रिटिश काल और 1857 की क्रांति
वर्ष 18०3 में एंग्लो-मराठा युद्ध के बाद यह क्षेत्र ब्रिटिश शासन के अधीन आ गया। 18०4 तक अंग्रेजों ने मराठा और सिख प्रतिरोध को समाप्त कर पूरा नियंत्रण ले लिया। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में सहारनपुर के स्थानीय नेताओं, सैनिकों और आम लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया था।
भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान
सहारनपुर देहात और जिला मुख्य रूप से अपनी उपजाऊ भूमि, कृषि और लकड़ी की नक्काशी के कुटीर उद्योग के लिए विश्व प्रसिद्ध है। ऐतिहासिक माँ शाकुम्भरी देवी शक्तिपीठ भी इसी जनपद के जसमोर क्षेत्र के पास स्थित है।
आंध्र प्रदेश में बस की टक्कर से सात की मौत, आठ घायल
ऑटो-रिक्शा से बर्थडे पार्टी से लौट रहे थे
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
अमरावती। आंध्र प्रदेश के पलनाडू जिले में गुरुवार तडक़े एक प्राइवेट बस और ऑटो-रिक्शा की टक्कर हुई। इसमें कम से कम सात लोगों की मौत हो गई। वहीं, आठ अन्य घायल हो गए। मरने वालों में छह महिलाएं शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि यह हादसा पलनाडू जिले के चिलकालूरिपेट में अड्डा रोड के पास हुआ।
विजयवाड़ा से तिरुपति जा रही प्राइवेट बस ने ऑटो-रिक्शा को टक्कर मार दी। ऑटो-रिक्शा में तकरीबन 15 लोग सवार थे। उनमें से सात लोगों की मौत हो गई। चार बच्चों समेत आठ अन्य लोग घायल हो गए। घायलों को गुंटूर के सरकारी जनरल अस्पताल और चिलकलुरिपेट सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया। मृतकों की पहचान बोंटू बाबू (62), बोंटू मानेम्मा (55), संपूर्णम्मा (7०), गंगम्मा (5०), लक्ष्मम्मा (75), चौतुपल्ली स्वार्थम्मा (45) और मारियम्मा (45) के रूप में की गई है। पुलिस के अनुसार, पीडि़त चिलकलुरिपेट मंडल के वेलुरु गांव के रहने वाले थे। वे प्रकाशम जिले के कोंडामांजुलुर में एक जन्मदिन की पार्टी से लौट रहे थे। चार लोगों की मौत मौके पर ही हो गई। वहीं, दो लोगों की मौत गुंटूर के सरकारी जनरल अस्पताल में और एक की मौत चिलकलुरिपेट सरकारी अस्पताल में हुई।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने इस भयानक सडक़ हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को हर संभव बेहतर इलाज मिले और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखी जाए। उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी सडक़ हादसे पर दुख जताया। उन्होंने जिला अधिकारियों से बात की और उन्हें घायलों के लिए बेहतर इलाज सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
ग्लेशियर का टुकड़ा गिरने से मची नेपाल में तबाही
अब तक अचानक बाढ़ से 165 लोगों की मौत हो चुकी है, बचाव और राहत कार्य जारी है
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। नेपाल में आई अचानक भीषण बाढ़ से तबाही मची हुई है। इस जल प्रलय की वजह से इमारतें, गांव के गांव, सडक़े, पुल सभी बह गए हैं. इस बाढ़ से 165 लोगों की मौत हो चुकी है और हजार से ज्यादा लोग लापता हैं। राहत-बचाव कार्य जारी है। एक्सपट्र्स के मुताबिक नेपाल में आई बाढ़ की वजह भूकंप नहीं बल्कि ग्लेशियर का ऊंचाई से गिरना है।
हालांकि चीन ने ग्लेशियर के टूटने के लिए नेपाल की तरफ भूकंप को जिम्मेदार ठहराया है.। नेपाल में चीन के राजदूत झांग माओमिंग ने रसुवा में आई भीषण बाढ़ पर नेपाल के चैनल से बात की। उन्होंने कहा कि कठिन समय में हम नेपाल के साथ मजबूती से खड़े हैं। वर्तमान में उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी है कि नेपाली पक्ष में एक भूकंप आया, जिससे बर्फ का हिमस्खलन हुआ और उसके बाद भूस्खलन हुआ, जिससे ग्यिरोंग-रसुवागढ़ी सीमा क्षेत्र के नेपाली और चीनी दोनों पक्षों में महत्वपूर्ण हताहत हुए और लोग लापता हो गए। लैंगटांग लिरुंग पर्वत के उत्तर मुख पर लगभग 52०० मीटर ऊंचाई पर ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटकर लगभग 1200 मीटर नीचे घाटी में गिरा. ये मलबा लेंडे खोला नदी को अवरुद्ध कर गया, जिससे अस्थायी बांध बना। बांध टूटने से पानी, कीचड़, चट्टानों और मलबे की विशाल लहर नीचे की ओर दौड़ पड़ी। लेन्दे खोला तिब्बत से निकलने वाली एक सहायक नदी है, जो नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी और तिमुरे के आसपास भोटेकोशी नदी में मिलती है। ग्लेशियर के ढहने या आइस-रॉक एवलांच से बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा इसी लेन्दे खोला में गिरा. इससे नदी में अचानक तेज बहाव पैदा हुआ।
मजाक और हंसी का पात्र बनती जा रही है संसद : चिदंबरम
कांग्रेस नेता ने उचित चर्चा के 12 बिल पास किए जाने की आलोचना की
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सीनियर कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद पी. चिदंबरम ने गुरुवार को मॉनसून सत्र के दौरान संसद के कामकाज की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्र में कोई सार्थक कामकाज नहीं हुआ और केंद्र सरकार ने बिना पर्याप्त चर्चा के ही बिल पास कर दिए। चेन्नई में कांग्रेस की एक बैठक में बोलते हुए, चिदंबरम ने कहा कि संसद की तुलना में राज्य विधानसभाओं में बहस ज़्यादा असरदार होती है।
चिदंबरम ने बिना उचित चर्चा के 12 बिल पास किए जाने की भी आलोचना की और कहा कि दिन-ब-दिन संसद मज़ाक और हंसी का पात्र बनती जा रही है।उन्होंने इसके लिए तमिलनाडु विधानसभा का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही देखने के बाद, कभी-कभी मुझे लगता है कि मुझे सांसद के बजाय विधायक होना चाहिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले 12 सालों में संसद में अहम राष्ट्रीय मुद्दों पर स्थगन प्रस्ताव क्यों नहीं लाए गए, क्या इस दौरान कोई गंभीर मामला नहीं था? मॉनसून सत्र का ज़िक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में छात्रों के विरोध-प्रदर्शन – जिसमें पुलिस की कार्रवाई हुई और एक छात्र की एक आँख की रोशनी चली गई – पर स्थगन प्रस्ताव के ज़रिए चर्चा नहीं की गई। फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट बिल के बारे में उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित संशोधनों से उन संगठनों पर बुरा असर पड़ेगा जो सामाजिक कार्यों के लिए विदेशी चंदा लेते हैं। शिवगंगा के एक कैथोलिक बिशप का उदाहरण देते हुए, जिनका स्नष्टक्र्र रजिस्ट्रेशन तीन साल पहले रद्द कर दिया गया था, चिदंबरम ने कहा कि उन्होंने बिशप को कानूनी रास्ता अपनाने की सलाह दी थी। उन्होंने दावा किया कि इन संशोधनों का मकसद ईसाई और मुस्लिम संगठनों को निशाना बनाना है। उन्होंने कहा कि हजारों ईसाई बिशप, पादरी और अन्य लोगों ने भारतीय समाज के लिए काम किया है और बहुत बड़ी सेवा की है।
यह कानून ऐसे संगठनों को खत्म करने के लिए लाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस बिल का मकसद इन संगठनों के फंड और संपत्ति को ज़ब्त करना है और इसे सबसे बुरे कानूनों में से एक बताया। परिसीमन के मुद्दे पर चिदंबरम ने कहा कि यह देश के सामने मौजूद सबसे अहम मुद्दों में से एक है। उन्होंने चेतावनी दी कि जनसंख्या के आंकड़ों पर आधारित किसी भी प्रक्रिया से लोकसभा में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। उन्होंने दक्षिणी राज्यों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश और बिहार की राजनीतिक पार्टियों से इस प्रस्ताव का विरोध करने के लिए एकजुट होने की अपील की।
कानपुर में ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट क्रैश, दोनों पायलट की मौत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
कानपुर। ग्वालटोली थाना क्षेत्र के नत्था पुरवा में गुरुवार सुबह ट्रेनिंग के दौरान चार सीटर विमान दुर्घटनाग्रस्त होकर जमीन पर गिर गया। हादसे में विमान सवार दोनों पायलटों की मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों में हडक़ंप मच गया। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक विमान ने सुबह करीब 11.2० बजे कानपुर कैंट क्षेत्र से उड़ान भरी थी। बताया जा रहा है कि विमान चार सीटर था और ट्रेनिंग उड़ान पर था। उड़ान भरने के कुछ देर बाद ही विमान नत्था पुरवा क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान के जमीन पर गिरते ही तेज आवाज हुई और आसपास के लोगों की भीड़ मौके पर जुट गई। हादसे में जान गंवाने वाले पायलटों की पहचान अभिषेक पुजारी निवासी कर्नाटक और सुमित भाटिया निवासी गुजरात के रूप में हुई है। दोनों की मौके पर ही मौत होने की सूचना है। पुलिस ने घटनास्थल को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। विमान टेकनम कंपनी का बताया जा रहा है। दुर्घटना के कारणों का अभी स्पष्ट पता नहीं चल सका है। तकनीकी खराबी, मौसम अथवा अन्य कारणों की जांच की जा रही है। हादसे की सूचना संबंधित विमानन अधिकारियों को भी दी गई है। दुर्घटना के बाद मौके पर पुलिस, प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।



