सीएम योगी का ताज, एपको वाले अनिल सिंह के दाग!

  • दागों के दस्तावेज के सहारे अनिल सिंह का हजारों करोड़ का आर्थिक सफर
  • सवाल उठाती सीएम योगी की ताज पैलेस होटल की वायरल तस्वीरें

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। होटल नया है ताज चमक रहा है झूमर जगमगा रहे हैं और तस्वीरों में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुस्कुरा रहे हैं। लेकिन इन चमकती तस्वीरों के पीछे एक ऐसा सवाल खड़ा है जिसे सिर्फ इसलिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि सामने पांच सितारा होटल की चमक है।
इंफ्रास्ट्रक्चर की दुनिया के बड़े कारोबारी यूपी के सबसे अमीर व्यक्ति का तमगा हासिल कर चुके अनिल कुमार सिंह के एक हजार करोड़ रु पये से ज्यादा की लागत से बने भव्य होटल ताज पैलेस का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया और इस मौके पर वह भी मौजूद रहे। वही अनिल कुमार सिंह जो एपको इन्फ्राटेक के संस्थापक और प्रबंध निदेशक हैं और जिनका कारोबारी साम्राज्य सड़क एक्सप्रेसवे और बड़े सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों तक फैला हुआ है।

आयात शुल्क के हेराफेरी केआरोप

अनिल सिंह पर हाट मिक्स प्लांट को विदेश से लाने में आयात शुल्क के हेराफेरी के साथ तमाम बड़े प्रोजेक्ट में गलत तरीकों से काम करने के आरोप लगे हैं। अनिल सिंह और एनएचएआई के बीच भ्रष्टाचार जैसे विवाद आदलती प्रक्रियाओं का हिस्सा है और सुनवाई के इंतजार में लंबित चल रहे। सवाल उठ रहे है कि क्या सीएम योगी आदित्यनाथ को अनिल सिंह के साथ फोटो खिचवानी चाहिए थी। जिस कारोबारी व्यक्ति पर तरह तरह के संगीन आरोप हो उस व्यक्ति के होटल के उद्घाटन में पहुंचना चाहिए था। क्योंकि दागदार व्यक्तियों की छवि से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बचना चाहिए था।

एपको के कारोबारी सम्राज्य से जुड़े सवालों पर सरकार के पास क्या जवाब है?

लखनऊ के भव्य होटल ताज पैलेस की इमारत पर रोशनी बहुत है लेकिन लोकतंत्र में असली रोशनी उन सवालों पर पडऩी चाहिए जो चमकती तस्वीर के पीछे छूट जाते हैं। अनिल सिंह का होटल कितना भव्य है यह देखने के लिए कैमरे काफी हैं। अब सवाल यह है कि एपको के कारोबारी साम्राज्य से जुड़े सवालों पर सरकार के पास क्या जवाब है। क्योंकि मामला सिर्फ एक होटल के उद्घाटन का नहीं है। मामला उस तस्वीर का है जिसमें सत्ता और बड़े कारोबार की नजदीकी साफ दिखाई दे रही है। और जब तस्वीर में मुख्यमंत्री हों तो सवाल भी मुख्यमंत्री से ही पूछे जाएंगे। क्योंकि योगी आदित्यनाथ सिर्फ किसी कारोबारी के मेहमान बनकर वहां नहीं पहुंचे थे। मुख्यमंत्री की तस्वीर जहां जाती है वहां सत्ता का संदेश भी जाता है। ऐसे में ताज पैलेस की चमक से ज्यादा महत्वपूर्ण वह सवाल है जो अब प्रदेश की सियासत में तैर रहे हैं कि क्या मुख्यमंत्री ने सिर्फ होटल देखा या उस कारोबारी की पूरी फाइल भी देखी थी? अगर फाइल देखी थी तो फिर सवालों का जवाब क्या है? और अगर नहीं देखी थी तो फिर इतनी बड़ी राजनीतिक तस्वीर बनने से पहले सरकार ने होमवर्क क्यों नहीं किया क्योकि होटल ताज पैलेस की चमक कुछ घंटों की है लेकिन दस्तावेज सालों तक रहते हैं। और अब सवाल यही है कि उद्घाटन की तस्वीर बड़ी है या एपको की फाइल?

लोकतंत्र मे सवाल पूछने के लिए दोषसिद्धि का इंतजार नहीं किया जाता

यहां आरोपों को फैसला मान लेने की जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए। अदालत में मामला लंबित होना दोष सिद्ध होना नहीं होता और कारोबारी विवाद अपने आप में भ्रष्टाचार का प्रमाण भी नहीं है। लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछने के लिए हमेशा दोषसिद्धि का इंतजार भी नहीं किया जाता। खासकर तब जब एक तरफ योगी सरकार भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करती हो और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री की मौजूदगी वाली तस्वीर ऐसे कारोबारी के प्रतिष्ठान से जुड़ती हो जिसपर अनैतिका के आरापों का अंबार लदा हो। अनिल सिंह के कारोबारी सफर और सरकारी परियोजनाओं को लेकर सवाल सार्वजनिक रिकॉर्ड में मौजूद हैं तो फिर आखिर मुख्यमंत्री की मौजूदगी सिर्फ निवेश को प्रोत्साहन देने की कवायद थी या सरकार की तरफ से कारोबारी प्रतिष्ठा पर सार्वजनिक मुहर भी? क्या मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस कार्यक्रम से पहले संबंधित कारोबारी के विवादों और कानूनी मामलों की पड़ताल की थी? और अगर की थी तो क्या सामने आया? सवाल तब और बड़ा हो जाता है जब उसी कारोबारी के भव्य होटल का उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने हाथों से करते हैं। क्या मुख्यमंत्री कार्यालय को ऐसे पुराने न्यायिक रिकॉर्ड की जानकारी थी? अगर थी तो क्या उसे महज कारोबारी विवाद मानकर नजरअंदाज किया गया? और अगर जानकारी नहीं थी तो फिर सवाल और गंभीर है कि इतने बड़े कारोबारी के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की मौजूदगी से पहले सरकार की जांच पड़ताल का पैमाना आखिर क्या है?

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