24 घंटे में हिल गयी घूसखोर अधिकारी की कुर्सी

- 4PM के स्टिंग आपरेशन के बाद गाजियाबाद के घूसखोर सतीश कुमार पर हुई कार्रवाई
- यूपी सरकार ने किया सस्पेंड
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। कल सवाल उठा था। आज सरकार ने जवाब दिया है। कल कैमरे ने कहानी दिखाई थी। आज फाइलों ने करवट ली और गाजियाबाद के उस घूसखोर अधिकारी सतीश कुमार को सस्पेंड कर दिया गया। आदेश जारी हो चुके हैं और कलतक खुद को सहकारिता का शहंशाह समझने वाला सतीश कुमार आज सड़क पर है। कल तक जो व्यक्ति बिना पैसे लिए बात नहीं करता था और जो पैसे न दे उसे पेरशान करता था आज खुद परेशान है। और यह संभव हुआ है 4PM की बेबाक पत्रकारिता और पाठकों के रिस्पोंस के चलते। 4PM चैनल ने एक स्टिंग में दिखाया कि किस तरह से गाजियाबाद की वेब सिटी में संचार नस्ट नाम की सोसाइटी को सतीश कुमार ने गैरकानूनी तरीके से फर्जी शिकायत कराके सील कर दिया था। हालांकि अंदर खाने ये भी चर्चा हो रही है इतने गंभीर मामले में सस्पेंड किया गया गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया।
4PM ने घूसखोरी पर उठाए थे सवाल
कल हमने उन आरोपों उन दावों और उन बातचीतों को सामने रखा था जिन्होंने व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े किए थे। सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं था। सवाल था उस व्यवस्था का जिसके भरोसे लाखों लोग अपने अधिकारों अपनी संपत्तियों और अपने भविष्य की सुरक्षा की उम्मीद करते हैं। सवाल था कि क्या शिकायतों और जांचों का इस्तेमाल निष्पक्ष न्याय के लिए हो रहा है या फिर कहीं कुछ लोग उसे अपने प्रभाव का औजार बना चुके हैं। आज ठीक चौबीस घंटे बाद शासन ने आदेश जारी कर संबंधित अधिकारी को उसके पद से हटा दिया है। यह कार्रवाई खुद में बताने के लिए काफी है कि 4PM के स्टिंग आपरेशन को लाखों लोगों ने देखा और उसका दबाव शासन पर बना और उसे अनदेखा करना संभव नहीं हुआ। कार्रवाई बताती है कि लोकतंत्र में कैमरे की आंख कलम की ताकत और जनता के सवाल अभी भी जिंदा हैं।
जंगल में आग की तरह फैल गयी खबर
उत्तर प्रदेश में आवास विकास सहकारिता विभाग में भ्रष्ट अधिकारी सतीश कुमार ने गाजियाबाद की वेब सिटी में संचार नस्ट नाम की सोसाइटी के लोगों से 50 लाख रूपये और दो लाख रूपये प्रतिमाह की दर से घूस की डिमांड की। घूस न मिलने पर एक फर्जी शिकायत करा के घूसखोर अधिकारी सतीश कुमार ने कार्रवाई कर दी। यह खबर जब 4PM को मिली तो एक स्टिंग आपरेशन करके सतीश कुमार की कारतूतों को सामने लाया गया। हालांकि यह काम इतना आसान नहीं था। रिस्क था, क्योंकि सतीश कुमार कोई मामूली अधिकारी नहीं हैं। शासन प्रशासन में अपनी उंची पहुंच का हवाला और पूर्व में तामाम आरापों के बाद भी वह व्यक्ति अपनी सीट पर बना हुआ था। बाहरहाल पत्रकारिता धर्म को निभाते हुए हम सच को सामने लाये बेधड़क और दर्शकों ने उसमें भरपूर सहयोग किया। खबर जंगल में आग की तरह फैली और सरकार को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा।
यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत
यही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। सत्ता कितनी भी बड़ी क्यों न हो कुर्सी कितनी भी मजबूत क्यों न हो दफ्तरों की दीवारें कितनी भी ऊंची क्यों न हों जब सवाल दस्तक देते हैं तो जवाबों को बाहर आना ही पड़ता है। पिछले चौबीस घंटे उत्तर प्रदेश की नौकरशाही और सहकारिता तंत्र के लिए साधारण चौबीस घंटे नहीं थे। यह वह समय था जिसमें एक स्टिंग ऑपरेशन ने बहस को जन्म दिया बहस ने सवाल पैदा किए और सवालों ने शासन के दरवाजे तक पहुंचकर दस्तक दे दी।
यह जीत पाठकों की जीत है
यह जीत उस विचार की है जो कहता है कि सरकारी कुर्सी जनता की सेवा के लिए होती है किसी की निजी जागीर बनने के लिए नहीं। अब सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि एक अधिकारी हटा दिया गया। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कहानी यहीं खत्म हो जाती है? या फिर यह तो सिर्फ शुरुआत है? क्योंकि यदि एक स्टिंग के बाद चौबीस घंटे के भीतर कार्रवाई हो सकती है तो इसका मतलब है कि व्यवस्था के भीतर कहीं न कहीं ऐसे संकेत मौजूद थे जिन्होंने शासन को तत्काल निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। अब निगाहें केवल स्थानांतरण या हटाए जाने पर नहीं टिकेंगी। अब सवाल जवाबदेही का होगा। सवाल जांच का होगा। सवाल यह होगा कि जिन आरोपों ने इतना बड़ा भूचाल पैदा किया उनकी तह तक कौन जाएगा? और कब जाएगा? आज की यह रिपोर्ट उसी कहानी का दूसरा अध्याय है। कल खुलासा था आज असर है कल सवाल था आज कार्रवाई है और अब पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सच की इस लड़ाई का अगला पड़ाव क्या होगा।
भूकंप से डोली वेनेजुएला की धरती, हजारों की मौत
- सैकड़ों लाशे मलबे से निकाली गईं, भारत- अमेरिका भेजेंगे मदद
- रिक्टर पर तीव्रता 7.2 और 7.5 मापी गई
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
वेनेजुएला। वेनेजुएला में दो शक्तिशाली भूकंप आए। इनकी तीव्रता 7.2 और 7.5 मापी गई। इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश में भारी तबाही मचाई है। अब तक कम से कम सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। करीब हजारों लोग घायल हुए हैं। कई इलाकों में इमारतें गिर गई हैं और संचार व्यवस्था ठप हो गई है। कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज ने जानकारी दी कि मृतको की संख्या बढ़ सकती है। बचाव दल अभी भी गिरी हुई इमारतों के मलबे में लोगों को तलाश रहे हैं। राहत टीमें प्रभावित जगहों तक पहुंचने की पूरी कोशिश कर रही हैं। इस संकट की घड़ी में अमेरिका ने मदद का हाथ बढ़ाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने सोशल मीडिया पर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका तुरंत वेनेजुएला में खोज और बचाव दल भेजेगा। इसके साथ ही वहां चिकित्सा संसाधन और मानवीय सहायता भी भेजी जा रही है। अमेरिका की टीमें मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित निकालने में स्थानीय प्रशासन की मदद करेंगी।




