एक के बाद एक 8 छात्रों की मौत, फिर भी नहीं बदला सिस्टम, सवालों के घेरे में SRMS मेडिकल कॉलेज

बरेली में  राम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की दहलीज़ पर खामोश हुई 8 चीखे, 16 साल मे 8 मौते, सिस्टम कब जागेगा ?

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बरेली में  राम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की दहलीज़ पर खामोश हुई 8 चीखे, 16 साल मे 8 मौते, सिस्टम कब जागेगा ?

श्री राम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल एक बार फिर रैगिंग को लेकर सुर्खियों में है। 2 मई को कॉलेज में एमडी मेडिसिन प्रथम वर्ष के एक छात्र ने रैगिंग व कॉलेज प्रशासन की घोर लापरवाही से परेशान होकर कॉलेज की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया।

छात्र को गंभीर हालत में कॉलेज के ही ICU में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बनी हुई है।घायल छात्र के पिता की तहरीर पर थाना भोजपुरा मे कालेज प्रशासन सहित 4 डॉक्टरों पर मुक़दमा दर्ज किया गया है.

गौरतलब है कि श्री राममूर्ति मेडिकल कॉलेज मे ये कोई नया मामला नहीं है इससे पहले भी 8 छात्रों की मौत हो चुकी है और शासन प्रशासन की जाच मे लीपा पोती कर हर मामला आत्महत्या का बता कर फाइल बंद कर दी. किसी ने भी ये जानने की कोशिश नहीं की आखिर कार क्या बजय रही कि छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे है.
अनन्या दीक्षित के पिता अनादि दीक्षित ने अपनी बेटी के हादसे के बाद कहा  था कि आज मेरी बेटी गई, कल किसी और की जाएगी। NHRC, DGP, सबको लिखा। पर SRMS में कुछ नहीं बदला। आज एक और मां का बच्चा ICU में है। पता नहीं कब जागेगा सिस्टम?”

सवाल सिर्फ कॉलेज से नहीं है। सवाल बरेली पुलिस से है जिसने 8 केसों में रैगिंग की धारा नहीं लगाई। सवाल NMC से है जो हर साल निरीक्षण कर ‘ऑल ओके’ की रिपोर्ट देता है। सवाल हमसे है – क्या हम अगले किसी छात्र’ के हादसे का इंतजार कर रहे हैं?
मृतक अनन्या के पिता अनादि दीक्षित ने कॉलेज पर रैगिंग और प्रताड़ना का आरोप लगाया था। NHRC के नोटिस के 7 साल बाद भी कॉलेज में रैगिंग नहीं रुकी। 2 मई की घटना 9वां मामला है। इससे साफ है कि कॉलेज का ‘जीरो टॉलरेंस टू रैगिंग’ का दावा सिर्फ कागजों तक सीमित है।

राम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल मे हादसों पर एक नज़र:- 1-18-9-2002 को एसआरएमएस कॉलेज में योगेश मिश्रा
नाम के द्वितीय वर्ष के छात्र की कथित रूप से जहर खाने से मौत हो गई।

2-1-7-2011 को एमबीबीएस अंतिम वर्ष की गाजियाबाद की छात्रा अनिका सिंघल फंदे से लटकती पाई गई। 3-27-12-2013 को दीपक त्रिपाठी नाम के छात्र ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली।

4-10-1-2013 एसआरएम के द्वितीय वर्ष का छात्र सय्यद हसन मेंहदी संदिग्ध हालात में मृत पाया गया। 5-28-5-2015 को तृतीय वर्ष की छात्रा प्रियंका सिंह गर्ल्स हॉस्टल में फंदे से लटकती पाई गई।

6-12-7-2016 को प्रथम वर्ष के छात्र यश कुमार अपने हॉस्टल रूम में फंदे से लटकता पाया गया। विसरा रिपोर्ट में जहर खाने की बात सामने आई। 7-6-9-2017 को अनन्या दीक्षित अपने हॉस्टल रूम में फंदे से झूलती पाई गई। यह वाकया उसके कॉलजे में एडमिशन लेने के 12 दिन बाद ही हुआ।

8-18-1-2018 को हर्षित नाम का छात्र संदिग्ध अवस्था में मृत पाया गया।  9-2-6-2026 को रैगिंग व कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से परेशान एमडी मेडिसिन के छात्र डॉक्टर आशु ने कॉलेज की तीसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या का प्रयास किया.

मेडिकल छात्रा अनन्या दीक्षित की मौत के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तत्कालीन उत्तर प्रदेश के डीजीपी और बरेली के एसएसपी को तलब किया था । आयोग ने आदेश दिया था कि श्रीराम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज (एसआरएमएस) में अब तक हुईं मेडिकल छात्रों की मौतों की जांच रिपोर्ट भी पेश की जाए।

डीजीपी मुख्यालय को दिए नोटिस में आयोग ने कहा है कि अनन्या की मौत के प्रकरण में तत्कालीन एसएसपी बरेली का जवाब संतुष्ट करने वाला नहीं है। एसआरएमएस में एमबीबीएस प्रथम वर्ष की छात्रा अनन्या का शव छह सितंबर को कॉलेज के हॉस्टल के कमरा नंबर चार में पंखे से लटका मिला था।

पुलिस ने मामला खुदकशी का मानकर पोस्टमॉर्टम कराया था, जबकि अनन्या के पिता नोएडा के सेक्टर 63 निवासी अनादि दीक्षित ने रैगिंग और अनन्या को कॉलेज प्रशासन द्वारा प्रताड़ित करने के आरोप लगाये थे.

अनन्या के पिता अनादि को जब पता चला कि अनन्या से
पुलिस ने मामला खुदकशी का मानकर पोस्टमॉर्टम कराया था, जबकि अनन्या के पिता नोएडा के सेक्टर 63 निवासी अनादि दीक्षित ने रैगिंग और अनन्या को कॉलेज प्रशासन द्वारा प्रताड़ित करने के आरोप में भोजीपुरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अनादि को जब पता चला कि अनन्या से पहले भी मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में आठ छात्रों की मौत हो चुकी है तो उन्होंने उनके अभिभावकों से संपर्क किया।

अनादि पुलिस के निष्पक्ष जांच न करने और कॉलेज प्रशासन का जांच में अपेक्षित सहयोग न मिलने पर मानवाधिकार आयोग, बाल संरक्षण आयोग और मुख्यमंत्री को शिकायत भेजी थी। इस पर मानवाधिकार आयोग ने चार सप्ताह के अंदर सभी केसों से संबंधित जांच रिपोर्ट तलब की। आयोग ने इस मामले में जारी नोटिस में कहा है कि डीजीपी कार्यालय और एसएसपी बरेली से जांच रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध नहीं कराई गई थी ।

आयोग ने यह भी कहा है कि पूरे मामले में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी आयोग के नोटिस का जवाब नहीं दिया था ।  आज एक और मां का बच्चा ICU में है। पता नहीं कब जागेगा सिस्टम?”16 साल, 9 मामले। हर बार ‘डिप्रेशन’ और ‘आत्महत्या’ कहकर फाइल बंद। हर बार ‘जांच कमेटी’ बनाकर लीपापोती। NHRC के आदेश, UGC के नियम, सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन – सब राम मूर्ति स्मारक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के गेट पर दम तोड़ देते हैं.

रिपोर्ट- सुनील सक्सेना,बरेली

Related Articles

Back to top button