फ्रंटलाइन पर ताकत बढ़ाएंगे 83 आकाशतीर कैरियर, टैंक कॉलम अब रहेंगे सुरक्षित

रक्षा मंत्रालय भारतीय सेना के लिए 83 'कैरियर एयर डिफेंस ट्रैक्ड' (CADET) सिस्टम खरीद रहा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: रक्षा मंत्रालय भारतीय सेना के लिए 83 ‘कैरियर एयर डिफेंस ट्रैक्ड’ (CADET) सिस्टम खरीद रहा है.

ये वाहन ‘आकाशतीर’ कमांड सिस्टम लेकर चलेंगे, जिससे टैंक और बख्तरबंद यूनिट्स को ड्रोन एवं हवाई हमलों से सुरक्षा मिलेगी. यह ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देगा और सेना की मोबाइल युद्ध क्षमता को मजबूत करेगा.

भारतीय सेना की मोबाइल युद्ध क्षमता को और मजबूत करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 83 कैरियर एयर डिफेंस ट्रैक्ड (CADET) सिस्टम खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. ये खास ट्रैक्ड वाहन आकाशतीर एयर डिफेंस कमांड सिस्टम को लेकर चलेंगे और टैंक एवं बख्तरबंद यूनिट्स को ड्रोन और हवाई हमलों से बचाने में अहम भूमिका निभाएंगे.

जानकारी के मुताबिक आकाशतीर, डीआरडीओ द्वारा विकसित एक आधुनिक एयर डिफेंस कमांड और कंट्रोल सिस्टम है, जो अलग-अलग रडार, सेंसर और हथियारों को एक नेटवर्क में जोड़कर रियल-टाइम में काम करता है. इससे युद्ध के दौरान तुरंत खतरे की पहचान और जवाब देना आसान हो जाता है.

क्यों जरूरी हैं ट्रैक्ड कैरियर?

सेना के टैंक और आर्मर्ड कॉलम अक्सर दुर्गम इलाकों जैसे रेगिस्तान, पहाड़ और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ऑपरेट करते हैं. ऐसे में पहिएदार (wheeled) वाहन उनकी गति के साथ नहीं चल पाते. ट्रैक्ड CADET वाहन टैंकों के साथ-साथ चल सकेंगे, जिससे फ्रंटलाइन पर भी एयर डिफेंस कमांड सिस्टम सक्रिय रहेगा.

क्या होगा इनका काम?

मोबाइल एयर डिफेंस कमांड पोस्ट के रूप में काम करेंगे

ड्रोन, फाइटर जेट और हेलीकॉप्टर जैसे हवाई खतरों की पहचान

रियल-टाइम में एयर डिफेंस यूनिट्स को निर्देश देना

भविष्य में ड्रोन स्वार्म (झुंड) से निपटने की क्षमता भी जोड़ी जाएगी

तकनीकी खासियतें

-30 से +50 डिग्री तापमान में ऑपरेशन

320 किमी से ज्यादा रेंज

सड़क पर 45 किमी/घंटा और कठिन इलाकों में 15 किमी/घंटा रफ्तार

4 सैनिकों के लिए सुरक्षित, क्लाइमेट कंट्रोल केबिन

बैलिस्टिक सुरक्षा (फ्रंट में ज्यादा मजबूत)

30 किलोवाट पावर यूनिट, जो 6 घंटे तक सिस्टम चलाए रखे

GPS, GLONASS और NavIC आधारित नेविगेशन

मेक इन इंडिया को बढ़ावा

यह खरीद Buy (Indian-IDDM) कैटेगरी के तहत होगी, जिसमें कम से कम 65% स्वदेशी सामग्री अनिवार्य है. इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और आयात पर निर्भरता घटेगी.

डिलीवरी और रणनीतिक महत्व

सभी 83 सिस्टम 36 महीनों में सेना को मिलेंगे

20 साल की सर्विस लाइफ

C-17 विमान से तेजी से कहीं भी तैनाती संभव

यह प्रोजेक्ट खासतौर पर 2020 के लद्दाख गतिरोध के बाद सामने आई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इससे सेना की फ्रंटलाइन फॉर्मेशन को आधुनिक हवाई सुरक्षा कवच मिलेगा, खासकर ड्रोन और नई पीढ़ी के हवाई खतरों के खिलाफ।

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