भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए: इनेलो
मंत्री अनिल विज को गंभीरता से लें : आदित्य देवीलाल

- मुख्यमंत्री ने दिए आदेश, शेष नौ जिलों में भी होगी जांच
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चंडीगढ़। इनेलो विधायक आदित्य देवीलाल और अर्जुन चौटाला ने कहा, मंत्री अनिल विज कोई मुद्दा उठाते हैं तो उसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वर्क स्लिप घोटाले की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। ऐसे घोटाले दूसरे विभागों में भी हो सकते हैं। चंडीगढ़ में भाजपा विधायक राम कुमार गौतम के जाटों पर दिए बयान पर अर्जुन चौटाला ने कहा, उन्हें ऐसे बयान नहीं देने चाहिए। मैंने खुद उन्हें कई बार कहा है कि ऐसी ओछी बात नहीं करनी चाहिए। हालांकि श्रम विभाग में वर्कस्लिप घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शेष 9 जिलों में जांच के आदेश दिए हैं। इसकी जानकारी बुधवार को ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने दी।
उन्होंने घोटाले के मामले में कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला द्वारा सरकार पर घोटाले के आरोप लगाने पर पलटवार करते हुए कहा कि सुरजेवाला हम आप लोगों की तरह घोटालों को छिपाते नहीं है, घोटाला हुआ है, उजागर हुआ है और उसकी उच्चस्तरीय जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री को लिखा है। मुख्यमंत्री ने आदेश भी दे दिए कि शेष नौ जिलों में भी तुरंत जांच पूरी की जाए ताकि इस मामले में कोई फैसला लिया जा सके। विज ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान सुरजेवाला पर तंज कसते हुए कहा कि इस मामले में सुरजेवाला बीच में कहां से आ गए। हो सकता है कि यह मामला इनके (कांग्रेस) के समय का हो, यह गड़बड़ी कब से हुई है, यह अभी पता नहीं लगा और किसके समय का है, यह भी पता नहीं लगा है। वहीं वर्ष 2026 को लेकर अपने विभागों में नए रोडमैप के प्रश्न पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि यहां हर दिन नया होता है, हर दिन कुछ न कुछ नया सरकार में किया जाता है और यही कारण है कि तीसरी बार हरियाणा की जागरूक जनता ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाई, ऐसा पहली बार हुआ है क्योंकि ये सरकार काम करने वाली सरकार है।
हुड्डा बेबुनियाद बातें कर रहे: विज
अरावली के मुद्दे पर सांसद दीपेंद्र हुड्डा के आरोप कि यह सारा खेल साढ़े 10 हजार करो? चंदे के लिए हो रहा है जिस पर पलटवार करते हुए ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा कि दीपेंद्र हुड्डा बेबुनियाद बातें कर रहे हैं। अरावली में जो हुआ वह सुप्रीम कोर्ट ने किया और अपने फैसले पर रोक भी सुप्रीम कोर्ट ने लगाई है। इसका मतलब यह है कि ये सुप्रीम कोर्ट पर आरोप लगा रहे हैं। अगर यह कह रहे हैं कि यह फैसला इतने पैसे के लिए हुआ है तो ये क्या सुप्रीम कोर्ट पर आरोप लगा रहे हैं।



