नीलांश के अवैध कब्जे से कराह रही गोमती
दीवार बनाकर मोड़ दी गई जलधारा, बिल्डर्स पर है नदी में अतिक्रमण का आरोप

राष्ट्रपति व पीएम से नदी को बचाने की गुहार
मामला कोर्ट में लंबित लोगों में आक्रोश
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। अभी हाल ही अरावली पर्वत श्रृंखला की अवैध कटान को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र व राज्य सरकारों को फटकार के साथ ही अपने फै सल को भी प्रकृति को बचाने के लिए पलट दिया था। पर यूपी सरकार व यहां केप्रशासन को जैसे प्राकृतिक रचनाओं से कोई लगाव ही नहीं है। ऐसा इसलिये कह रहे हैं कि राज्य की राजधानी लखनऊ की जीवनदायिनी गोमती की धारा को दीवार केसहारे रोककर मोड़ दिया गया है। ये काम किसी सरकारी संस्था ने नहीं प्राईवेट बिल्डर्स ने येशर्मनाक कृत किया है। अब इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है। वहां के लोगों ने इसकी शिकायत देश के राष्ट्रपति,पीएम, मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल, प्रदेश के संबंधित मंत्रियों व प्रमुख सचिवों को भेजी है।
बता दें गोमती नदी व तालाबों की भूमि के बड़े भाग पर नीलांश बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी व उसके मालिकों द्वारा दिवार अवैध कब्जे व किया गया है। यहां पर सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा व अतिक्रमण करके लगभग 10 वर्षों से वाटर पार्क के रूप में व्यावसायिक उपयोग किया जा रही है। इससे अकूत अवैध काली कमाई की जा रही है। प्रार्थी दीपक शुक्ला उर्फतिरंगा महाराज ने इसकी शिकायत की है।
मलिहाबाद व बख्शी का तालाब में है कब्जा
उत्तर प्रदेश राज्य की राजधानी लखनऊ की तहसील- मलिहाबाद के अंतर्गत ग्राम-बदैया की भूमि गाटा सं0- 971 रकबा 0.6450, गाटा सं0- 995 रकबा 0.5820 हेक्टेयर, गाटा संख्या- 996 रकबा 0.0130 हेक्टेयर, गाटा संख्या-1055 रकबा 0.076 हेक्टेयर, गाटा संख्या-1056 रकबा 0.2020 हेक्टेयर, गाटा संख्या 1081 रकबा 1.1630 हेक्टेयर, गाटा संख्या 1022 रकबा 3.705 हेक्टेयर व ग्राम-टिकरीकलां की भूमि गाटा संख्या-186 रकबा 0.2530 हेक्टेयर, गाटा संख्या-193 रकबा 0.152 हेक्टेयर, गाटा संख्या 243 रकबा 0.0630 हेक्टेयर तथा तहसील- बख्शी का तालाब के अन्तर्गत ग्राम-यकडरियाकलां में खाता संख्या-01848 की भूमि राजस्व अभिलेखों मगोमती नदी व तालाब के नाम से दर्ज हैं। गोमती नदी व तालाबों की उपरोक्त सार्वजनिक भूमि से सम्बन्धित खेतौनी की प्रतियां इस प्रार्थना पत्र के साथ संलग्नक संख्या-1 के रूप में संलग्न है।
नीलांश थीम वाटर पार्क विकसित
नीलांश बिल्डर्स प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी, रजि कार्यालय- फ्लैट नंबर-बी, 93एन, ग्राउंड फ्लोर, पिंकी अपार्टमेंट, डालीबाग, लखनऊ व उसके मालिकों संतोष श्रीवास्तव, सतीश श्रीवास्तव, राजेश श्रीवास्तव व मदन लाल द्वारा तहसील-मलिहाबाद के ग्राम बदैया व टिकरीकला तथा तहसील- बख्शी का तालाब के ग्राम-यकडरियाकला में स्थित गोमती नदी के बिल्कुल किनारे पर नीलांश थीम वाटर पार्क विकसित किया गया है तथा गांव बदैया के एक बड़े क्षेत्र में विभिन्न आवासीय योजना चलाकर रो हाउस, विला और आवासीय भूखंड का बड़े पैमाने पर क्रय-विक्रय किया जा रहा है।
कई बार शिकायत की पर नहीं हुई सुनवाई
नीलांश कम्पनी व उसके मालिकों द्वारा गोमती नदी की भूमि और तालाबों पर किये गए अवैध कब्जे व अतिक्रमण के संबंध में प्रार्थी द्वारा सम्बन्धित दोनों तहसीलों के राजस्व अधिकारियों व जिला स्तर पर उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रार्थी द्वारा कई शिकायतें की गई । प्रार्थी के काफी प्रयास के पश्चात उच्चाधिकारियों के निर्देश पर सम्बन्धित तहसील के उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, क्षेत्रीय लेखपाल, राजस्व निरीक्षक आदि राजस्व अधिकारियों द्वारा कई बार मौके पर जांच पड़ताल भी की गई, जिसमे नीलांश कम्पनी व उसके मालिकों द्वारा गोमती नदी व तालाबों की भूमि पर अवैध कब्जा व अतिक्रमण किया जाना पाया गया । गोमती नदी व तालाबों की भूमि पर किये गए अवैध कब्जे/अतिक्रमण के सम्बन्ध में सम्बन्धित तहसील के राजस्व अधिकारियों की जाँच-आख्यायें भी आई।
बेदखली वाद भी दर्ज
प्रार्थी की शिकायत पर गोमती नदी और तालाबों की भूमि पर अवैध कब्जा व अतिक्रमण के कारण नीलांश कम्पनी व उसके मालिको के विरुद्ध उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता-2006 की धारा 67 के अंतर्गत तहसील- मलिहाबाद व बख्शी का तालाब के राजस्व न्यायालयों में कार्यवाही की गई और तहसील आख्याओं के आधार पर इन लोगों के खिलाफ बेदखली वाद भी दर्ज किया गया है। जो कि कम्प्यूटरीकृत वाद संख्या-201910460103098 (गाँव सभा बनाम नीलांश प्रोपर्टीज द्वारा निदेशक संतोष श्रीवास्तव), 201910460103096 (गाँव सभा बनाम नीलांश प्रोपर्टीज द्वारा निदेशक संतोष श्रीवास्तव), 20201046010037।

दयानिधि मारन केे बयान पर घमासान
डीएमके सांसद ने कहा- उत्तरी राज्यों में लड़कियों से अक्सर घर पर रहकर घरेलू काम ही करवाते हैं
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने मंगलवार को यह दावा करके बहस छेड़ दी कि उत्तरी राज्यों में लड़कियों से अक्सर घर पर रहकर घरेलू काम करने की उम्मीद की जाती है,जबकि तमिलनाडु में लड़कियों को पढ़ाई करने और करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
कायद-ए-मिल्लत सरकारी महिला महाविद्यालय में छात्राओं को संबोधित करते हुए मारन ने तमिलनाडु को भारत का सर्वश्रेष्ठ राज्य बताया और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की प्रशंसा की। मारन ने कहा कि तमिलनाडु भारत का सर्वश्रेष्ठ राज्य है और एमके स्टालिन भारतीय राज्यों में सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री हैं। यह द्रविड़ आदर्श सरकार है और हमारे पेरियार ने ही हमारे राज्य में द्रविड़वाद को प्रज्वलित किया था। उन्होंने लड़कियों की शिक्षा पर जोर दिया था और हमारे मुख्यमंत्री उन्हीं सिद्धांतों पर काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमारी छात्राओं को गर्व होना चाहिए और हमें उन पर गर्व है। इसीलिए हम चाहते हैं कि हमारी बेटियां पढ़ें। उत्तर भारतीय राज्यों में लड़कियों को नौकरी करने से मना किया जाता है, उन्हें घर में रहकर घरेलू काम करने के लिए कहा जाता है, लेकिन हम चाहते हैं कि हमारी बेटियां पढ़ें। राज्य के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने आज उलगम उंगल कैयिल योजना के तहत कायद-ए-मिल्लत सरकारी महिला महाविद्यालय की छात्राओं को लैपटॉप वितरित किए। उन्होंने छात्राओं की सामाजिक जिम्मेदारी की सराहना की और महाविद्यालय के लंबे इतिहास और बालिका शिक्षा में योगदान को रेखांकित किया। छात्राओं को संबोधित करते हुए स्टालिन ने कहा, आज मुझे आप सभी छात्राओं को लैपटॉप वितरित करते हुए प्रसन्नता हो रही है। आप सभी को नव वर्ष और पोंगल की हार्दिक शुभकामनाएं। अक्सर कहा जाता है कि शिक्षा पूरी करने के बाद लड़कियां समाज में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। हमें अपनी सभी छात्राओं पर गर्व है। इस शिक्षण संस्थान का समृद्ध इतिहास है।
राज्यों को सुप्रीम आदेश
कुत्ते के काटने पर मुआवजा देंगी राज्य सरकारें
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर समेत देश के कई शहरों में कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। आज (13 जनवरी 2026) सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर इस मामले पर सुनवाई के दौरान बड़ा फैसला लिया है। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कुत्ते के काटने पर मुआवजा देने का आदेश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई बच्चा या बुजुर्ग कुत्ते के काटने से जख्मी हो जाता है या उसकी मौत हो जाती है, तो राज्य सरकारें उसे मुआवजा देगी।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ ने मामले पर पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कुत्तों को खाना खिलाने वाले लोग इस घटना के जिम्मेदार होंगे। जस्टिस विक्रम ने कहा, एक काम करो, कुत्तों को अपने घर लेकर जाओ। उन्हें इधर-उधर भटकने के लिए क्यों छोड़ा जाए? जिससे कुत्ते लोगों को डराते और काटते हैं। सर्वोच्च न्यायालय की ये टिप्पणी वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी की दलीलों के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि आवारा कुत्तों का मामला एक भावुक मुद्दा है। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा,ये भावुकता सिर्फ कुत्तों के लिए ही दिखाई पड़ती है। इसके जवाब में मेनका ने कहा, ये बात नहीं है, हमें लोगों की भी उतनी ही चिंता है। बता दें कि कुत्ते के काटने के बढ़ते मामलों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को सभी शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था। वहीं, कोर्ट ने सरकारी और सार्वजनिक स्थानों में कुत्तों को प्रवेश न देने के लिए कहा था। सर्वोच्च न्यायालय के इस आदेश का कई लोगों ने विरोध किया था।
राज्य सरकारों की अर्थव्यवस्था एक नाजुक दौर में: जयराम रमेश
केंद्रीय बजट को लेकर कांग्रेस ने व्यक्त की चिंता
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने आगामी केंद्रीय बजट को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि संसद के अगले सत्र की तैयारियों के बीच राज्य सरकारें और व्यापक अर्थव्यवस्था एक नाजुक दौर में प्रवेश कर रही हैं। संसदीय कार्यक्रम की घोषणा के बाद एक्स पर एक पोस्ट में रमेश ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट लगभग 20 दिनों में पेश किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि बजट में अनिवार्य रूप से 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें शामिल होंगी, जिसने 17 नवंबर, 2025 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रमेश ने कहा कि ये सिफारिशें 2026-27 से 2031-32 तक की अवधि को कवर करती हैं और केंद्र और राज्यों के बीच कर राजस्व के बंटवारे के साथ-साथ राज्यों के बीच इस राजस्व के वितरण से संबंधित हैं। राज्य सरकारों में बढ़ती बेचैनी को उजागर करते हुए, कांग्रेस नेता ने वीबी-जी आरएएम जी अधिनियम, 2025 में नए लागत-साझाकरण फार्मूले की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारें नए कानून में लागू 60:40 के लागत-साझाकरण फार्मूले से पहले से ही बहुत चिंतित हैं, जो एमजीएनआरईजीए को खत्म कर देगा। उन्होंने आगे कहा कि बजट नजदीक आने के साथ ही वे और भी ज्यादा आशंकाओं के साथ चिंतित होंगी। रमेश ने भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद तीन प्रमुख चुनौतियों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, कर कटौती और मजबूत लाभ मार्जिन के बावजूद निजी कंपनियों का निवेश सुस्त बना हुआ है; घरेलू बचत दरें तेजी से गिरी हैं, जिससे निवेश क्षमता सीमित हो गई है; और धन, आय और उपभोग में असमानताएं लगातार बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है, और कहा कि ये मुद्दे विकास और रोजगार सृजन की स्थिरता के लिए खतरा हैं।
केंद्र सरकार के दृष्टिकोण पर सवाल
सरकार के दृष्टिकोण पर सवाल उठाते हुए रमेश ने कहा कि यह देखना बाकी है कि आगामी बजट सांख्यिकीय भ्रमों के आरामदायक दायरे से बाहर निकलकर आर्थिक वास्तविकताओं को स्वीकार करता है और सार्थक सुधारात्मक कदम उठाता है या नहीं। उन्होंने चेतावनी दी कि उच्च जीडीपी वृद्धि दर, जो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण है, तब तक कायम नहीं रह सकती जब तक आगामी बजट में इन संरचनात्मक चुनौतियों का तत्काल समाधान नहीं किया जाता।



