गुजरात में बदल रहा सियासी समीकरण, BJP की सभाएं सूनी! AAP की नुक्कड़ सभाएं रैलियों में बदलीं

गुजरात की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं... जहां BJP की सभाओं में लोगों की मौजूदगी कम होती दिख रही है...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का गढ़ रहा है.. इन दिनों एक नई राजनीतिक हलचल का गवाह बन रहा है.. यहां कुछ बड़ा होने की संभावना जताई जा रही है.. जहां आम आदमी पार्टी तेजी से लोगों की उम्मीद.. और भरोसे का केंद्र बनती जा रही है.. अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में AAP की छोटी-छोटी नुक्कड़ सभाएं अब बड़ी रैलियों में बदल रही हैं.. जबकि कांग्रेस कहीं नजर नहीं आ रही.. और BJP की सभाओं में भीड़ कम होने की खबरें आ रही हैं.. यह स्थिति 2027 के विधानसभा चुनावों की दिशा तय कर सकती है..

गुजरात की राजनीति में BJP का वर्चस्व 1995 से चला आ रहा है.. जब पार्टी ने पहली बार सरकार बनाई थी.. नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह राज्य BJP का मजबूत किला बन गया.. जहां 2022 के चुनावों में पार्टी ने 156 सीटें जीतीं.. लेकिन हाल के वर्षों में स्थिति बदल रही है.. 2024 के लोकसभा चुनावों में BJP को गुजरात में सभी 26 सीटें मिलीं.. लेकिन विपक्षी दलों.. खासकर AAP की सक्रियता बढ़ी है.. AAP ने 2022 में गुजरात विधानसभा चुनावों में 27 फीसदी वोट शेयर के साथ 5 सीटें जीतीं.. और कांग्रेस को सिर्फ 17 सीटें मिलीं..

2025 में AAP ने गुजरात के बाय-इलेक्शन में जीत हासिल की.. जो पार्टी की बढ़ती ताकत का संकेत है.. एक रिपोर्ट के अनुसार AAP ने पंजाब और गुजरात के बाय-इलेक्शन में मजबूत प्रदर्शन किया.. जिससे केजरीवाल ने 2027 में गुजरात में सरकार बनाने का दावा किया.. यह जीत AAP के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई.. क्योंकि इससे पार्टी को राज्य में आधार मजबूत करने का मौका मिला.. गुजरात के लोग अब AAP को खासकर किसानों और युवाओं के मुद्दों पर.. वैकल्पिक विकल्प के रूप में देख रहे हैं..

जानकारी के मुताबिक केजरीवाल ने गुजरात को अपना फोकस क्षेत्र बनाया है.. और उन्होंने घोषणा की कि AAP गुजरात में घर-घर जाकर कैंपेन करेगी.. और हर घर को कम से कम 5 बार विजिट करेगी.. यह रणनीति दिल्ली और पंजाब मॉडल पर आधारित है.. जहां AAP ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसे मुद्दों पर फोकस कर जीत हासिल की.. गुजरात में AAP किसानों की समस्याओं.. कपास आयात पर ड्यूटी हटाने से होने वाले नुकसान, पर जोर दे रही है..

AAP की गुजरात में बढ़ती लोकप्रियता का सबसे बड़ा प्रमाण सोशल मीडिया.. और ग्राउंड रिपोर्ट्स से मिलता है.. हाल ही में मोरबी में AAP की एक छोटी जन सभा बड़ी रैली में बदल गई.. जहां हजारों लोग जुटे.. इसी तरह एक और जन सभा में भारी भीड़ देखी गई.. जो मोदी के लिए चिंता का विषय बन रही है.. केजरीवाल ने राजकोट में किसानों की रैली में कहा कि BJP किसानों पर अत्याचार कर रही है.. और AAP उनके साथ खड़ी है.. और उन्होंने चेतावनी दी कि 37 साल पहले कांग्रेस ने किसानों पर अत्याचार किया था.. जिससे वह कभी सत्ता में नहीं लौटी.. और अब BJP का भी वही हाल होगा..

केजरीवाल गुजरात के लोगों के लिए उम्मीद का प्रतीक बन चुके हैं.. एक पोस्ट में कहा गया कि गुजरात में कुछ बड़ा होने वाला है.. जहां AAP की नुक्कड़ सभाएं रैलियां बन रही हैं.. और केजरीवाल भरोसे का नाम हैं.. AAP की परिवर्तन यात्रा में भारी भीड़ जुट रही है.. जो मोदी के गुजरात आउटरीच प्रोग्राम्स की वजह से है.. रूरल गुजरात में चैतर वासवा की सभाओं में बड़ी भीड़ देखी जा रही है.. जो AAP की ईमानदार गवर्नेंस की उम्मीद से जुड़ी है..

बता दें कि AAP की रणनीति ग्राउंड लेवल पर काम करने की है.. वे किसानों पर लाठीचार्ज, फर्जी केस और जेल जैसे मुद्दों को उठा रहे हैं.. केजरीवाल ने राजकोट जेल में किसानों से मिलने की कोशिश की.. लेकिन उन्हें रोका गया.. जो BJP की डिक्टेटरशिप का उदाहरण बताया गया.. इससे AAP को सहानुभूति मिल रही है.. 2025 में AAP ने गुजरात में डोर-टू-डोर कैंपेन शुरू किया.. जो 2027 तक जारी रहेगा..

जानकारी के अनुसार कांग्रेस गुजरात में कहीं नजर नहीं आ रही है.. 2022 चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा.. और अब वह ग्राउंड पर सक्रिय नहीं दिखती.. एक पोस्ट में कहा गया कि कांग्रेस गुजरात में लापता है.. जबकि AAP बढ़ रही है.. कांग्रेस के कार्यकर्ता AAP की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं.. क्योंकि राहुल गांधी ने अपने कार्यकर्ताओं पर BJP से मिलीभगत का आरोप लगाया..

 

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