पतंग का जश्न या मौत का खेल? मांझे से 6 की मौत, मकर संक्रांति बनी मेडिकल इमरजेंसी

गुजरात में मकर संक्रांति का उत्सव इस बार दर्दनाक हादसों में बदल गया... खतरनाक मांझे की चपेट में आकर 2 दिनों में 6 लोगों की मौत हो गई...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः मकर संक्रांति जिसे गुजरात में उत्तरायण के नाम से जाना जाता है.. हर साल जनवरी में खुशियों की लहर लेकर आता है.. आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें उड़ती हैं.. लोग छतों पर जमा होते हैं.. संगीत बजता है.. और परिवार मिलकर त्योहार मनाते हैं.. लेकिन इस उत्सव की चमक के पीछे एक काला साया भी छिपा होता है.. जो पतंग उड़ाने से जुड़े हादसे का है.. 14 जनवरी 2026 को गुजरात में यह त्योहार कई परिवारों के लिए दुख का सबब बन गया.. राज्य में इमरजेंसी सर्विस 108 पर रिकॉर्ड कॉल्स आईं.. 6 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग घायल हुए.. यह सिर्फ एक साल की कहानी नहीं है.. बल्कि साल दर साल दोहराई जाने वाली त्रासदी है.. जहां चाइनीज मांझा जैसी खतरनाक डोर जिंदगियां छीन रही है..

जानकारी के मुताबिक इस साल उत्तरायण के दिन राज्य भर में इमरजेंसी मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई.. आम दिनों में जहां 108 इमरजेंसी सर्विस को औसतन 4,000 से 4,500 कॉल्स मिलती हैं.. वहीं 14 जनवरी को यह संख्या 5,897 तक पहुंच गई.. यानी 33.33 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.. इनमें से ज्यादातर कॉल्स पतंग उड़ाने से जुड़ी दुर्घटनाओं की थी.. वहीं गैर-वाहन दुर्घटनाओं में 171 प्रतिशत का उछाल आया.. जहां सामान्य दिनों में 484 मामले होते हैं.. वहां 1,313 मामले दर्ज हुए.. सबसे ज्यादा चिंता की बात पतंग की डोर (मांझा) से कटने या घायल होने के मामले थे.. जो 200 से 1,000 प्रतिशत तक बढ़ गए.. पूरे राज्य में 182 लोग मांझे से घायल हुए.. जबकि छत या ऊंचाई से गिरने के 488 मामले सामने आए.. 92.33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.. इन हादसों में 6 लोगों की मौत हो गई, जिनमें बच्चे और युवा शामिल थे..

आपको बता दें कि उत्तरायण गुजरात का सबसे बड़ा त्योहार है.. जहां लाखों लोग पतंग उड़ाते हैं.. लेकिन समस्या तब शुरू होती है.. जब लोग सस्ते और तेज कटने वाले चाइनीज मांझे का इस्तेमाल करते हैं.. यह मांझा नायलॉन या सिंथेटिक धागे से बना होता है.. जिस पर कांच की परत चढ़ी होती है.. जानकारी के मुताबिक यह इतना तेज होता है कि यह गले काट सकता है.. पक्षियों को घायल कर सकता है.. और यहां तक कि बिजली के तारों से चिपककर आग लगा सकता है.. गुजरात सरकार ने चाइनीज मांझे पर बैन लगा रखा है.. लेकिन फिर भी यह बाजार में मिल जाता है.. पुलिस हर साल छापे मारती है.. लेकिन त्योहार के समय यह बैन टूट जाता है..

पिछले सालों के आंकड़े देखें तो यह समस्या नई नहीं है.. 2025 में उत्तरायण के दौरान 6 मौतें हुईं.. जबकि सैकड़ों घायल हुए.. 2024 में यह संख्या 15 तक पहुंच गई थी.. जिसमें बच्चे और वयस्क शामिल थे.. EMRI 108 सर्विस के अनुसार 2024 में 4,948 इमरजेंसी मामले दर्ज हुए.. जो सामान्य दिनों से 30 प्रतिशत ज्यादा थे.. 2023 में 6 मौतें और 176 घायल हुए.. इनमें ज्यादातर मौतें मांझे से गला कटने या छत से गिरने से हुईं.. एक रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में 20 प्रतिशत ज्यादा इमरजेंसी कॉल्स आईं.. जिसमें छत से गिरने के मामले दोगुने थे..

इन हादसों का असर सिर्फ इंसानों पर नहीं पड़ता.. पक्षी और पशु भी शिकार होते हैं.. 2026 के उत्तरायण से पहले अहमदाबाद में 736 पक्षी मांझे से घायल हुए.. काले काइट, गौरैया और कौवे जैसे पक्षी सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं.. गुजरात सरकार हर साल ‘करुणा अभियान’ चलाती है.. जिसमें 10 से 20 जनवरी तक पक्षियों को बचाने के लिए हेल्पलाइन चलाई जाती है.. 2025 में 1,205 पक्षी और पशु घायल हुए.. एक स्टडी में पाया गया कि मकर संक्रांति के दौरान उत्तरी भारत में मांझे से सैकड़ों मौतें होती हैं..

 

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