4PM Films की पहली पेशकश इश्तियाक, बेहतर सिनेमा की तलाश कर रहे दर्शकों के लिए खास पेशकश
4PM Films की पहली पेशकश इश्तियाक एक 17 मिनट की बेहद खूबसूरत और संवेदनशील फिल्म है। यह फिल्म एक मर्द की जिंदगी और उसकी तकलीफों को बेहद शालीनता के साथ पर्दे पर उतारती है। फिल्म उन पहलुओं को भी छूती है, जिन्हें अक्सर समाज में नजरअंदाज कर दिया जाता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: 4PM Films की पहली पेशकश इश्तियाक एक 17 मिनट की बेहद खूबसूरत और संवेदनशील फिल्म है। यह फिल्म एक मर्द की जिंदगी और उसकी तकलीफों को बेहद शालीनता के साथ पर्दे पर उतारती है। फिल्म उन पहलुओं को भी छूती है, जिन्हें अक्सर समाज में नजरअंदाज कर दिया जाता है।
इश्तियाक यूट्यूब पर उपलब्ध है और दर्शकों से अपील की जा रही है कि वे इस फिल्म को देखें और अपने करीबी लोगों के साथ भी साझा करें। फिल्म की संवेदनशील प्रस्तुति और भावनात्मक गहराई इसे हर वर्ग के दर्शकों से जोड़ती है। अच्छे और सार्थक सिनेमा की तलाश कर रहे दर्शकों के लिए 4PM Films एक नया मंच बनकर सामने आया है। इस बैनर के तहत दर्शकों को एक से बढ़कर एक दिल छू लेने वाली फ़िल्में देखने को मिलेंगी।
इस सिलसिले की शुरुआत हो चुकी है और 4PM Films की पहली शॉर्ट फिल्म 19 जनवरी 2026 को रिलीज़ हो गई है। और ऐसी ही कई मूवी हमारे 4PM Films पर आगे भी रिलीज होती रहेंगी…तो दर्शकों से अपील है कि वे इस फिल्म को देखना न भूलें और अच्छे सिनेमा को समर्थन दें।
इश्तियाक़ 17 मिनट की बेहद खूबसूरत और मार्मिक फिल्म है।
4PM Films की यह पहली पेशकश है। यूट्यूब पर आप इस फिल्म को देखें और अपने करीबी लोगों को भी दिखाएँ। यकीन मानिए, यह फिल्म सभी को पसंद आएगी।
इश्तियाक़ बहुत शालीन तरीके से एक मर्द की जिंदगी और उसकी तकलीफों को दिखाती है। यह मर्द की… pic.twitter.com/kicdx6o5Ac— 4PM News Network (@4pmnews_network) January 22, 2026
फिल्म इश्तियाक में उस सामाजिक सोच को उजागर किया गया है, जिसमें यह माना जाता है कि मर्द कभी रोते नहीं हैं। फिल्म यह दिखाती है कि मर्द को भी दर्द होता है, भावनाएँ होती हैं और वह रोता भी है, लेकिन समाज के बनाए नियमों के कारण वह अपने आँसू छिपाने पर मजबूर होता है।
फिल्म में दिखाया गया है कि मर्द अपने दर्द को व्यक्त करने के लिए किसी कोने, किसी एकांत जगह की तलाश करता है, यह सुनिश्चित करता है कि उसे कोई देख न ले। समाज बचपन से ही यह सिखाता है कि मर्द को मज़बूत और कठोर होना चाहिए, इसलिए जब उसे तकलीफ़ होती है तो वह उसे कहने के बजाय छिपा लेता है और खुद को सख्त बनाने की कोशिश करता रहता है। इश्तियाक बहुत ही शालीन और प्रभावशाली तरीके से पुरुषों की उस भावनात्मक पीड़ा को सामने लाती है, जिस पर अक्सर बात नहीं की जाती।



