बजट 2026: हेल्थ सेक्टर में 1 लाख करोड़ रुपये, मानसिक स्वास्थ्य और सस्ती इलाज पर जोर
हेल्थकेयर बजट 2026 पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है। यह ऐतिहासिक आवंटन स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: हेल्थकेयर बजट 2026 पहली बार 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है। यह ऐतिहासिक आवंटन स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
सरकार का फोकस अब मानसिक स्वास्थ्य, सस्ती इलाज सुविधाओं और AI आधारित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर है। अधिकारियों के अनुसार, इस निवेश से न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि टैक्स और प्रशासनिक क्षेत्रों में भी कार्यप्रणाली तेज और प्रभावी बनेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि हेल्थकेयर बजट में इस तरह का रिकॉर्ड आवंटन देश में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे मरीजों को किफायती इलाज उपलब्ध होगा और मानसिक स्वास्थ्य जैसी अनदेखी समस्याओं पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।
AI अब सिर्फ तकनीक नहीं, आर्थिक और रणनीतिक मुद्दा
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चर्चा का केंद्र रहा. अलग-अलग क्षेत्रों के नेताओं ने कहा कि AI अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व का मुद्दा बन चुका है. AI को अब बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) की तरह देखा जा रहा है, जिसके लिए कंप्यूटिंग क्षमता, टैलेंट और ऊर्जा में बड़े निवेश की जरूरत है. साथ ही सुरक्षा, गवर्नेंस और देशों के बीच तालमेल भी बेहद जरूरी है, क्योंकि तकनीक की रफ्तार नियमों से आगे निकल चुकी है.
IndiaAI मिशन से नई दिशा
IndiaAI मिशन यह संकेत देता है कि भारत अब अलग-अलग स्तर पर AI अपनाने से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर AI क्षमताएं विकसित करना चाहता है. बजट 2026-27 से उम्मीद है कि सरकार AI इंफ्रास्ट्रक्चर और टैलेंट पर और जोर देगी, जैसे कंप्यूटिंग संसाधनों को बढ़ावा देना, बेहतर डेटा तक पहुंच और इंडस्ट्री के साथ मिलकर स्किल डेवलपमेंट. मकसद है कि भारत सिर्फ AI का इस्तेमाल करने वाला देश न रहे, बल्कि बड़े पैमाने पर AI बनाने वाला देश बने. अच्छी बात यह है कि भारत का टैक्स सिस्टम, जो पहले से मजबूत डिजिटल ढांचे पर आधारित है, इस बदलाव को तेजी से अपनाने की स्थिति में है.
टैक्स सिस्टम में AI का बढ़ता इस्तेमाल
टैक्स से जुड़े कामों में AI अब पूरे वर्कफ्लो को संभालने में मदद कर रहा है. जहां पहले टैक्स विभाग और कंपनियां कागजी काम और रूटीन प्रक्रियाओं में उलझी रहती थीं, अब AI दस्तावेजों की समीक्षा, जवाब तैयार करने, जोखिम पहचानने और जटिल टैक्स मामलों को आसान भाषा में समझाने में मदद कर रहा है. इससे काम तेज, साफ और ज्यादा भरोसेमंद हो गया है.
भारत का डिजिटल टैक्स ढांचा
पिछले दस सालों में भारत ने GSTN, ई-इनवॉइसिंग, AIS/TIS, पैन-आधार लिंक और फेसलेस असेसमेंट जैसे डिजिटल सिस्टम खड़े किए हैं. इससे टैक्स डेटा बेहतर हुआ है और प्रोसेसिंग तेज हुई है. अब AI के जरिए टैक्स से जुड़े काम साल के आखिर में करने के बजाय लगातार और व्यवस्थित तरीके से हो रहे हैं.
AI को अपनाने में ह्यूमन इन द लूप जरूरी
AI जितना ताकतवर हो रहा है, उतना ही जरूरी है कि उस पर इंसानी निगरानी बनी रहे. इसलिए डेटा की विश्वसनीयता, फैसलों की जांच-पड़ताल और ह्यूमन-इन-द-लूप सिस्टम को जरूरी माना गया है, ताकि कानूनी सही-गलत में कोई चूक न हो.
आगे की राह
AI टैक्स और गवर्नेंस का भविष्य बदल रहा है. लेकिन इंसानों की जगह लेने के लिए नहीं, बल्कि उनकी क्षमता बढ़ाने के लिए. सही गवर्नेंस और सोच-समझकर इस्तेमाल करने से टैक्स सिस्टम ज्यादा सटीक, तेज और भरोसेमंद बन सकता है.



