अनंत सिंह ने ली शपथ, नीतीश कुमार को देख छू लिया पैर, भड़का विपक्ष!

बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर बाहुबली नेता अनंत सिंह ने भारी सुरक्षा और गहमागहमी के बीच बिहार विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ली।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अपने बयानों और कारनामों को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले JDU नेता अनंत सिंह एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।

बिहार की राजनीति में ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर बाहुबली नेता अनंत सिंह ने भारी सुरक्षा और गहमागहमी के बीच बिहार विधानसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। बीमार होने के कारण अनंत सिंह बेउर जेल से एम्बुलेंस के जरिए विधानसभा पहुंचे थे। मोकामा विधानसभा क्षेत्र से भारी मतों से जीत हासिल करने के बाद, सिंह की इस शपथ पर सबकी नजरें टिकी थीं। अनंत सिंह जब विधानसभा पहुंचे, तो उनके माथे पर लगा बड़ा तिलक चर्चा का विषय बना रहा।

स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने बिना दस्तावेज पढ़े ही पद की शपथ ली। शपथ लेने के तुरंत बाद वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचे और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। इस दौरान सदन में मौजूद अन्य सदस्य इस दृश्य को देखते रहे। मुख्यमंत्री ने भी मुस्कुराते हुए उनके माथे पर लगे तिलक के बारे में पूछताछ की और उनकी सेहत का हाल जाना। वहीं इस तरह से नीतीश और अनंत सिंह ले भरत मिलाप को लेकर अब सियासी गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। विपक्ष इसे लेकर हमलावर है।

वहीं विधानसभा से निकलने के दौरान अनंत सिंह ने कहा, ‘मैं न्याय की उम्मीद करता हूं। जांच चल रही है, 100 परसेंट न्याय मिलने की उम्मीद है। विपक्ष अब बोलने लायक नहीं है। तेजस्वी को अब किसी और पार्टी से टिकट लेकर चुनाव लड़ना होगा।’ नीट छात्रा रेप-हत्या मामले में अनंत सिंह से सवाल पूछा गया तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। बेऊर जेल से अनंत सिंह को एंबुलेंस से विधानसभा लाया गया था। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘तबीयत ठीक नहीं होने की वजह से शपथ लेने में देरी हुई।’ जब उनसे पूछा गया कि वो मोकामा की जनता से कब मिलेंगे। इस पर उन्होंने कहा, ‘जब जज साहब चाहेंगे तब ही ना जेल से बाहर आएंगे। मैंने बेल के लिए अप्लाई किया है।’ जानकारी के मुताबिक, कोर्ट ने अनंत सिंह को केवल शपथ ग्रहण के लिए अनुमति दी है। दुलारचंद यादव हत्याकांड में उन्हें फिलहाल जमानत नहीं मिली है।

अनंत सिंह फिलहाल दुलारचंद यादव हत्याकांड के सिलसिले में पिछले तीन महीनों से न्यायिक हिरासत में हैं। पटना सिविल कोर्ट ने उन्हें केवल शपथ ग्रहण के लिए विधानसभा जाने की अनुमति दी थी। सुरक्षा के मद्देनजर, विधानसभा परिसर को एक किले में तब्दील कर दिया गया था। चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही थी और क्विक रिस्पांस टीमें  तैनात थीं। समर्थकों के जमावड़े पर पूरी तरह रोक थी और सघन तलाशी के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी गई।  कि 2020 विधानसभा चुनाव में भी अनंत सिंह जेल से ही चुनाव जीते थे। जब विधानसभा का सत्र शुरू हुआ तो उन्होंने शपथ लेने के लिए पैरोल मांगी। जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया और उन्होंने विधानसभा में आकर शपथ ली थी।

वहीं 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा के घोसवरी थाना क्षेत्र के बसावनचक में राजद नेता और जनसुराज के प्रत्याशी के लिए प्रचार कर रहे दुलारचंद यादव की हत्या की गई थी। आरोप अनंत सिंह पर लगे थे। उन्हें 1 नंवबर की रात गिरफ्तार किया गया था। 2 नवंबर को कोर्ट में पेश करने के बाद बेऊर जेल में डाला गया। पटना SSP कार्तिकेय शर्मा के मुताबिक इस मामले में अब तक 4 FIR दर्ज की गई।  पहला केस भदौर थाने में दुलारचंद के पोते नीरज कुमार ने दर्ज कराया। दूसरा अनंत के समर्थक जितेंद्र कुमार ने और तीसरा केस पुलिस ने अपने बयान पर किया है। अभी मौजूदा समय की बात करें तो अनंत सिंह जेल में भले हैं लेकिन सीएम नीतीश का उनके लिए सॉफ्ट कॉर्नर एक बार फिर देखने को मिला है। अब ऐसे में सवाल ये उठ रहा है कि आखिर नीतीश राज में अनंत सिंह जैसे लोगों को लिए इतनी सहनुभूति क्यों दिखाई जा रही है।

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