चुनाव आयोग की सारी असलियत आई सामने, ज्ञानेश कुमार के ऑफिस में कैमरा लेकर पहुंची ममता

राजधानी दिल्ली में कल उस वक्त हंगामा मच गया जब रात के अंधेरे में काले कपड़ों में ममता बनर्जी कुछ लोगों को साथ में लेकर अचानक ज्ञानेश कुमार के दफ्तर पर पहुंचीं और उनके साथ एक मीटिंग की।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: राजधानी दिल्ली में कल उस वक्त हंगामा मच गया जब रात के अंधेरे में काले कपड़ों में ममता बनर्जी कुछ लोगों को साथ में लेकर अचानक ज्ञानेश कुमार के दफ्तर पर पहुंचीं और उनके साथ एक मीटिंग की।

लेकिन ज्ञानेश कुमार के साथ हुई इस मीटिंग के दौरान ममता के साथ ऐसा क्या हुआ कि अचानक बीच में उनको मीटिंग छोड़कर बाहर आना पड़ गया। और बाहर आकर उनको प्रेस कांफ्रेंस करके ये क्यों कहना पड़ गया कि ऐसा इलेक्शन कमिश्नर उन्होंने कभी नहीं देखा। आखिर क्यों उन्होंने चुनाव आयोग को बीजेपी का आईटी सेल बताया। वहीं इसके साथ ममता ने ज्ञानेश कुमार के साथ मीटिंग का एक वीडियो भी लीक करा दिया है जिसके बाहर आने से चुनाव आयोग में तहलका मच गया है।

एसआईआर को लेकर ममता बनर्जी की सरकार और चुनाव आयोग में तल्खी चल रही है। एसआईआर के सिलसिले में ही सोमवार को ममता बनर्जी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात करने दिल्ली पहुंची थी। लेकिन वो पश्चिम बंगाल से दिल्ली अकेली नहीं पहुंची थी। बल्कि उनके साथ वो परिवार भी थे जो राज्य में एसआईआर से प्रभावित हुए थे। जिनके जिंदा रहते हुए भी चुनाव आयोग ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अब ममता दी दिल्ली पहुंचे और ऐक्शन ड्रामा और हेडलाइन न बनें, भला ऐसा हो सकता है।

अब देखिए सीएम ममता बनर्जी सब को लेकर दिल्ली स्थित बंग भवन में ठहरी हुईं थी। लेकिन तभी वहां अचानक से अमित शाह की पुलिस पहुंच जाती है और तभी उस भवन को घेरने लगती है। अब ममता पर किसी तरह का दबाव पड़े और वो चुप रह जाएं ऐसा कभी हो नहीं सकता। ममत तुरंत ऐक्शन में आ गई और शाह की पुलिस को उसी के इलाके में खदेड़ दिया और उनसे सवाल पूछने लगी। पत्रकारों से बातचीत में बनर्जी ने दावा किया कि बंग भवन में ठहरे पश्चिम बंगाल के लोगों को धमकी दी जा रही है और उन्होंने भारी पुलिस तैनाती पर सवाल उठाया।

अमित शाह की पुलिस मौजूद होने के बाद भी ममता घबराई नहीं और वो पीड़ित परिवारों को अपने साथ लेकर चुनाव आयोग के दफ्तर पहुंच गई। उनके साथ टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी समेत पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद थे। बताया जा रहा है कि ये मुलाकात करीब 1.30 घंटे चली। इस दौरान एक 40 सेकेंड का एक वीडियो सामने आया जो चुनाव आयोग के ऑफिस के अंदर का है। ये वीडियो मिटिंग से पहले का लगता है। इसमें आप देख सकते हैं कि इस वीडियो में वह पीड़ित परिवार और टीएमसी के सांसद और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौजूद हैं। लेकिन जो सबसे दिलचस्प तस्वीर है वह इस वीडियो के आखिरी में आती है जहां देखने को मिलता है की पूरा प्रतिनिधित्व मंडल ज्ञानेश कुमार के दफ्तर में दाखिल हो रहा है और ज्ञानेश कुमार अपने अधिकारियों के साथ टेबल पर बैठे हुए हैं। ये मीटिंग होती है और तभी अचानक खबर आती है कि ममता बनर्जी मीटिंग को बीच में से ही छोड़कर बाहर आ गई हैं। बाहर आते ही ममता बनर्जी प्रेस को संबोधित करते हुए चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार पर बरस पड़ती हैं।

कुल मिलाकर इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर ये सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चुनाव आयोग अब सच में निष्पक्ष रह गया है या फिर सत्ता के दबाव में काम कर रहा है। ममता बनर्जी का मीटिंग बीच में छोड़कर बाहर आना कोई ड्रामा नहीं बल्कि उस सिस्टम के खिलाफ विरोध था, जहां एक चुनी हुई मुख्यमंत्री और पीड़ित परिवारों की बात तक सुनने की गंभीरता नजर नहीं आई। जिन लोगों को जिंदा रहते मृत घोषित कर दिया गया, उनकी पीड़ा लेकर ममता चुनाव आयोग पहुंचीं, लेकिन वहां संवेदनशीलता की जगह बेरुखी दिखाई दी। सामने आया वीडियो इस बात का सबूत है कि ममता अकेले नहीं, बल्कि पीड़ितों की आवाज बनकर गई थीं। जब अंदर लोकतंत्र की बात नहीं सुनी गई, तो बाहर आकर सच बोलना उनकी मजबूरी बन गई। चुनाव आयोग को बीजेपी का आईटी सेल कहना सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि उस गुस्से और निराशा की अभिव्यक्ति है जो आज देश के करोड़ों मतदाताओं के मन में है। अब ये लड़ाई सिर्फ बंगाल की नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई बन चुकी है।

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