चार दशक की कानूनी लड़ाई के बाद राहत, 100 साल की उम्र में आरोपी को कोर्ट से इंसाफ

साल 1982 में ज़मीन विवाद को लेकर हुए एक हत्या के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब 100 साल की उम्र पार कर चुके आरोपी को अदालत ने बरी कर दिया। यह मामला चार दशक से भी ज़्यादा समय से कोर्ट में लंबित था।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: साल 1982 में ज़मीन विवाद को लेकर हुए एक हत्या के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। करीब 100 साल की उम्र पार कर चुके आरोपी को अदालत ने बरी कर दिया। यह मामला चार दशक से भी ज़्यादा समय से कोर्ट में लंबित था।

इस हत्याकांड में मैकू, सत्ती दीन और धनी राम को आरोपी बनाया गया था। घटना के बाद मैकू फरार हो गया था, जबकि सत्ती दीन और धनी राम को निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दोनों ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद से मामला अपील के स्तर पर विचाराधीन था।

बुधवार को मामले की सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपी को राहत देते हुए कहा कि उम्रकैद की सजा के खिलाफ उसकी अपील चार दशक से अधिक समय से लंबित रही है। कोर्ट ने यह भी माना कि इस दौरान आरोपी ने सामाजिक और मानसिक रूप से गंभीर परिणाम झेले हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। अदालत ने इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आरोपी को बरी करने का आदेश दिया। इस फैसले को न्याय में देरी के बाद मिला इंसाफ माना जा रहा है। जस्टिस चंद्र धारी सिंह और जस्टिस संजीव कुमार की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि अपील का लंबे समय तक लंबित रहना और आरोपी धनी राम की लंबी उम्र को देखते हुए राहत देना प्रासंगिक है.

1984 में सुनाई गई थी उम्र कैद की सजा
मामला उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले का है. साल 1982 में यह हत्या जमीन से जुड़े एक विवाद को लेकर हुई थी, और इस मामले में 3 लोग मैकू, सत्ती दीन और धनी राम आरोपी बनाए गए. हत्याकांड के बाद मैकू फरार हो गया था, जबकि हमीरपुर सेशंस कोर्ट ने 2 साल बाद 1984 में सत्ती दीन और धनी राम को उम्रकैद की सजा सुना दी थी. धनी राम को उसी साल जमानत पर रिहा कर दिया गया था. जबकि सत्ती दीन की अपील लंबित रहने के दौरान मौत हो गई, ऐसे में राम इस केस में एकमात्र जीवित अपीलकर्ता रह गया.

अभियोजन पक्ष शक साबित नहीं कर सकाः HC
यह देखते हुए कि राम तब से जमानत पर है, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि उसकी जमानत बॉन्ड को खत्म कर दिया जाए और यह भी कहा कि आरोपी को बरी करने का फैसला मामले की खूबियों पर आधारित है, खासकर अभियोजन पक्ष के आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में नाकामी को देखते हुए.

फैसला सुनाते समय डिवीजन बेंच ने आगे यह भी कहा कि दशकों से आरोपी द्वारा झेली गई चिंता, अनिश्चितता और सामाजिक नतीजों को आकलन करते समय इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि अब इस केस में न्याय क्या मांगता है. धनी राम के वकील ने सुनवाई के दौरान कोर्ट से कहा कि अपीलकर्ता की उम्र करीब 100 साल है और उसने केवल मैकू को पीड़ित पर गोली चलाने के लिए उकसाया था.

Related Articles

Back to top button