ट्रंप ट्रेड डील पर सदन में भयंकर हंगामा, विपक्ष से भिड़ी सरकार

अमेरिका- भारत में ट्रेड डील पर फाइनल बातचीत होते ही एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अपने पीएम साहब के बीच दोबारा से माई फ्रेंड वाला खेल शुरु हो चुका है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ट्रेड डील को किसान हितों के साथ हुआ समझौता करारा दे रही है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अमेरिका- भारत में ट्रेड डील पर फाइनल बातचीत होते ही एक ओर जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अपने पीएम साहब के बीच दोबारा से माई फ्रेंड वाला खेल शुरु हो चुका है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस ट्रेड डील को किसान हितों के साथ हुआ समझौता करारा दे रही है।

बड़ी खबर यह है सदन की कार्रवाई शुरु होतेे ही विपक्ष सत्ता पक्ष से डायरेक्ट भिड़ गया है और प्रश्नकाल में हुए हंगामे के बाद लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्रवाई स्थगित करनी पड़ी है। ऐसे में बड़ा सवाल निकल कर सामने आया है कि आखिर कांग्रेस अमेरिकी टैरिफ में रिलीव पर क्यों आक्रामक है और क्या सच में ट्रेड डील में कुछ ऐसा है जिसको छिपाने की कोशिश की जा रही है।  कल रात में आचानक अमेरिकी राष्ट्रपति का ट्वीट वायरल होता है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से दावा किया जाता है कि उनकी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक ट्रेड डील हुई है।  ट्रंप ने सोशल टू्रथ पर लिखा है कि अपने खास फ्रेंड पीएम मोदी की विशेष डिमांड पर उन्होंने भारत पर लगने वाली टैरिफ को 25 परसेंट से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। हालांकि भारतीय मीडिया में इस बात का दावा किया जा रहा है कि 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है लेकिन ट्रंप ने जो अपने सोशल मीडिया पर लिखा है कि……. ट्रेड डील के तहत यूनाइटेड स्टेट्स कम रेसिप्रोकल टैरिफ लगाएगा और इसे 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया जाएगा।

ट्रंप का कहना है कि आज सुबह भारत के प्रधानमंत्री मोदी से बात करना मेरे लिए सम्मान की बात थी। वह मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक हैं और अपने देश के एक शक्तिशाली और सम्मानित नेता हैं। हमने कई चीजों पर बात की, जिसमें व्यापार, और रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध खत्म करना शामिल है। वह रूसी तेल खरीदना बंद करने और यूनाइटेड स्टेट्स और, शायद, वेनेजुएला से बहुत ज़्यादा तेल खरीदने पर सहमत हुए। इससे यूक्रेन में चल रहे युद्ध को खत्म करने में मदद मिलेगी, जिसमें हर हफ़्ते हज़ारों लोग मर रहे हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि वे भी मतलब पीएम मोदी इसी तरह यूनाइटेड स्टेट्स के खिलाफ अपने टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाओं को घटाकर ज़ीरो कर देंगे। ट्रंप का दावा है कि प्रधानमंत्री ने 500 बिलियन डॉलर से ज़्यादा की अमेरिकी एनर्जी, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर, कोयला और कई अन्य प्रोडक्ट्स के अलावा, बहुत बड़े लेवल पर बाय अमेरिकन के लिए भी कमिटमेंट किया। भारत के साथ हमारे शानदार रिश्ते आगे और भी मज़बूत होंगे।

ऐसे में साफ है कि ट्रंप ने कहा है कि वो टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर रहे हैं। माना जा रहा है कि भारतीय निर्यात करने वाली कंपनियों के लिए ये बहुत ही फायदेमंद सौदा है और कहीं न कहीं इससे बड़ा मुनाफा निर्यातक कंपनियां कमाएंगी। जैसे ही ये खबर आई है शेयर बाजार उछल पड़ा है और सिर्फ कुछ ही घंटो में डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत में बढ़ोत्तरी आई है। ऐसे में जहां एक जहां ओर बीजेपी और एनडीए जश्न मना रहा है। टैरिफ कम होने पर प्रधानमंत्री का माला पहनाकर स्वागत किया जा रहा है तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के तेवर तल्ख है। कांग्रेस का आरोप है कि भारत और अमेरिका के बीच हुई उस सीक्रेट ट्रेड डील की, जिसका ऐलान भारत सरकार ने नहीं, बल्कि सात समंदर पार बैठे डोनाल्ड ट्रंप ने किया। कांग्रेस का दावा है कि ट्रंप ने एक पोस्ट डाली और पूरी दुनिया को बता दिया कि उन्होंने भारत को घुटनों पर ला दिया है। कांग्रेस कह रही है कि ये सरेंडर है।

हालांकि आज जैसे ही सदन शुरु हुआ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने मंगलवार को लोकसभा में हंगामा किया। जैसे ही प्रश्नकाल शुरू हुआ कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सांसद नारेबाजी करते हुए आसन के समीप आ गए. वे भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का मुद्दा उठाते हुए सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे थे. शोर-शराबे के बीच ही गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने एक सदस्य के पूरक प्रश्न का उत्तर दिया।

हालांकि सदन के बाहर भी विपक्ष के तेवर नहीं थमे। एक ओर जहां अखिलेश यादव ने सीधे मोदी सरकार पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने किसानों के पक्ष में एक लंबा चौड़ा पोस्ट कर बीजेपी को विदेशियों के एजेंटों की पार्टी तक कह डाला है। साथ ही विपक्ष की नेता शिवसेना उद्धव गुट की प्रियंका चतुर्वेदी का भी आक्रामक बयान आया है। उन्होंने ट्रेड डील और किसानों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है।

वैसे ही भी ट्रंप की राजनीति का एक ही स्टाइल है – पहले थप्पड़ मारो, फिर मरहम लगाओ और बदले में उसकी पूरी जायदाद मांग लो। आपको अगर याद हो तो पिछले एक साल में ट्रंप ने भारत पर क्या नहीं किया? पहले अमेरिका में रह रहे भारतीयों को हथकड़ियां लगाकर भेजा, फिर भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया। और हद तो तब हुई जब भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना जारी रखा, तो ट्रंप भड़क गए। उन्होंने भारत पर अतिरिक्त 25 प्रतिशत का जुर्माना टैरिफ ठोक दिया। कुल मिलाकर भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत का टैक्स हो गया। मतलब, अगर कोई भारतीय व्यापारी अमेरिका में जूते या कपड़े बेचना चाहता था, तो उसे आधे दाम तो टैक्स में ही देने पड़ रहे थे। हमारे एक्सपोर्टर्स बर्बाद हो रहे थे। और ट्रंप भारत को टैरिफ किंग कहकर चिढ़ा रहे थे लेकिन फिर अचानक एक फोन कॉल आती है और सारी बातें दोस्ती और कम टैरिफ में बदल जाती है।

खबर सामने आई है और कांग्रेस का आरोप है कि ट्रंप ने अपनी शर्तों पर एक बार फिर से रूस से तेल बंद करा दिया है। भारत अब रूस से एक बूंद तेल नहीं खरीदेगा। वही रूस जिसने मुश्किल वक्त में हमें सस्ता तेल दिया और हमेशा से भारत का दोस्त रहा। अब भारत वहां से तेल नहीं खरीदेगा। साथ ही वेनेजुएला से तेल खरीद पर डील फाइनल हुई है। जैसा कि अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा है कि भारत अपने सारे टैरिफ बैरियर जीरो कर देगा। यानी अब अमेरिका का सेब, अमेरिका का दूध, अमेरिका का चिकन और अमेरिका की मशीनें बिना किसी टैक्स के भारत में बिकेंगी। साथ ही भारत ने वादा किया है कि वो अमेरिका से 500 अरब डॉलर का सामान खरीदेगा।

कांग्रेस और विपक्ष का दावा है कि अगर हमें 500 अरब डॉलर कोई छोटी रकम नहीं होती। ये भारत के कई सालों के बजट के बराबर है। अगर हमें सब कुछ अमेरिका से ही खरीदना है, तो फिर उस मेक इन इंडिया का क्या हुआ जिसके विज्ञापन पर करोड़ों खर्च किए गए? क्या आत्मनिर्भर भारत का सपना अब अमेरिका पर निर्भर भारत में बदल गया है? हालांकि कांग्रेस ने जो तीखे सवाल दागे हैं, उसका जवाब सरकार के पास नहीं है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा – मोगैम्बो खुश हुआ! कांग्रेस का कहना है कि ये कोई बराबरी की डील नहीं है, ये एक कैपिटुलेशन है, यानी पूरी तरह से आत्मसमर्पण। कांग्रेस पूछ रही है कि क्या मोदी सरकार ने भारतीय किसानों के हितों का सौदा कर दिया?

सोचिए, अगर अमेरिका से बिना किसी टैक्स के कृषि उत्पाद भारत आने लगे, तो हमारे पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों का क्या होगा? क्या वो अमेरिकी मशीनी खेती और भारी सब्सिडी वाले उत्पादों का मुकाबला कर पाएंगे? कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने अपनी छवि चमकाने के लिए और ट्रंप के साथ अपनी तथाकथित दोस्ती दिखाने के लिए देश के छोटे व्यापारियों और किसानों को दांव पर लगा दिया है। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या सच में मोदी सरकार झुक गई है सच्चाई ये है कि पिछले एक साल में भारत से विदेशी निवेश (रिकॉर्ड स्तर पर बाहर गया है। रुपया अपने सबसे निचले स्तर पर है। शेयर मार्केट डरा हुआ है। मोदी सरकार को लगा कि अगर ट्रंप ने और सख्ती की, तो भारत का बचा-खुचा एक्सपोर्ट भी खत्म हो जाएगा।

इसी डर का फायदा ट्रंप ने उठाया। कांग्रेस का मानना है कि भारत को एक ऐसी डील पर साइन करने के लिए मजबूर किया जिसमें फायदा 90 प्रतिशत अमेरिका का है और भारत को सिर्फ 7 प्रतिशत टैरिफ की छोटी सी राहत मिली है। ये वैसी ही बात है कि किसी ने आपकी जेब से 100 रुपये निकाले और फिर 10 रुपये वापस देकर कहा कि ष्देखो, मैं तुम्हारा कितना अच्छा दोस्त हूं। सिंर्फ इतना ही नहीं ट्रंप चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे हैं कि ये डील अमेरिका फर्स्ट की जीत है। वो अपनी जनता को बता रहे हैं कि उन्होंने भारत जैसे स्वाभिमानी देश को सीधा कर दिया और इधर हमारे यहां इसे मास्टरस्ट्रोक बताया जा रहा है और पीएम साहब माला पहन रहे हैं। सवाल यह है कि ये कैसा मास्टरस्ट्रोक है ? जिसमें हम अपना पुराना और भरोसेमंद साथी रूस खो रहे हैं? जिसमें हम अपना बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए बिना किसी सुरक्षा के खोल रहे हैं? जिसमें हम 500 अरब डॉलर का कर्ज या खर्च अपने सिर ले रहे हैं? कांग्रेस का कहना है कि दोस्ती बराबर वालों में होती है। यहां तो ट्रंप हुक्म दे रहे हैं और दिल्ली से सिर्फ जी हुजूर की आवाज आ रही है।

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