ट्रंप की चेतावनी बेअसर, होर्मुज में ईरान ने ठोकी जंग की ताल
ईरान ने एक बार फिर से साबित किया है कि वो अमेरिका और ट्रंप की दादागिरी के आगे घुटना टेकने वाला नहीं है। खासतौर से उसके हिम्मत की दाद देनी होगी कि चारों तरफ से पूरी तरह से घिरने के बावजूद वो न तो डरा है और न ही उसने हिम्मत हारी है और यही वजह है

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिडिल ईस्ट में ईरान को खत्म करने का गेम उन पर उल्टा पड़ता दिख रहा है।
एक ओर जहां दुनिया की सबसे बड़ी सैन्य ताकत होने का दावा करने वाले अमेरिका ने अपने सबसे घातक एयरक्राफ्ट कैरियर और स्टील्थ फाइटर जेट्स के जरिए ईरान को चारों तरफ से घेर लेने का दावा पेश किया है तो वहीं दूसरी ओर ईरान ने बिना डरे, बिना दबे एक ऐसा ऐलान कर दिया है कि पूरी दुनिया में खलबली मच गई है। अभी तक अमेरिकी राष्ट्रपति अपने जिस यूएसएस अब्राहम लिंकन नाम के युद्धपोत पर इतरा रहे थे, ईरान ने ऐलान किया है कि इसी युद्धपोत के पास वो अपना नौसेना का अभ्यास करेगा। ऐसे में टकराव का बड़ा संकट खड़ा हो गया है और न सिर्फ ट्रंप की सिट्टी पिट्टी गुम है बल्कि ये बात पूरी तरह से तय हो गई है कि ईरान के सैन्य अभ्यास के शुरु होते ही जंग छिड़ जाएगी। क्यों ईरान अमेरिकी पोत के पास अपना 2 दिनी सैन्य अभ्यास शिविर लगाने जा रहा है और कैसे तेजी से अमेरिकी मिडिल ईस्ट में खुद को मजबूत कर रहा है।
ईरान ने एक बार फिर से साबित किया है कि वो अमेरिका और ट्रंप की दादागिरी के आगे घुटना टेकने वाला नहीं है। खासतौर से उसके हिम्मत की दाद देनी होगी कि चारों तरफ से पूरी तरह से घिरने के बावजूद वो न तो डरा है और न ही उसने हिम्मत हारी है और यही वजह है कि उनकी ये हिम्मत देख अमेरिका और ट्रंप की सिट्टी पिट्टी गुम है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वो अपने घर में किसी की दादागिरी नहीं चलने देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य वो संकरा समुद्री रास्ता जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई तेल गुजरता है। वहाँ ईरान ने दो दिवसीय नौसैनिक अभ्यास शुरू कर दिया है। ये अभ्यास उन अमेरिकी जहाजों की नाक के नीचे हो रहा है, जो ईरान को डराने के लिए भेजे गए हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अपनी मिसाइल प्रणालियों और रक्षा रणनीतियों का सौदा कभी नहीं करेंगे। ये ईरान का वो संकल्प है जो अमेरिका को चुभ रहा है। अमेरिका की चेतावनी है कि वो ईरानी स्पीडबोटों को अपने जहाजों के करीब नहीं आने देगा, लेकिन ईरान का कहना है कि यह हमारा इलाका है, हम यहाँ की भौगोलिक स्थिति और अपनी ताकत को आपसे बेहतर जानते हैं। ऐसे में टकराव के हालात पैदा हो गए हैं। ईरान के हाई सिक्योरिटी ऑफिसर और सर्वाेच्च नेता के सलाहकार अली शमखानी ने कहा है कि किसी भी दुश्मन कार्रवाई का प्रभावी और डर पैदा करने वाला जवाब दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान सिर्फ समुद्र तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापक और उन्नत सैन्य विकल्पों के लिए पूरी तरह तैयार है। शमखानी ने कहा कि फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने का मतलब यह नहीं कि अमेरिका को यहां बढ़त मिल गई है। उन्होंने कहा, श्यह हमारा क्षेत्र है, इसकी भौगोलिक स्थिति और ताकत को हम किसी भी बाहरी शक्ति से बेहतर जानते हैं।
हालांकि अमेरिका ने इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। उत्तरी अरब सागर में यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात है। दर्जनों गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर और परमाणु पनडुब्बियां समुद्र के नीचे से ईरान पर नजरें गड़ाए हुए हैं। कतर के अल-उदीद एयर बेस पर लगातार सी-17 और सी-5 जैसे विशाल सैन्य विमान हथियार और साजो-सामान उतार रहे हैं।एफ-35 और एफ-15ई जैसे फाइटर जेट्स का जमावड़ा ये बताने के लिए काफी है कि ट्रंप प्रशासन एक बड़े हमले की योजना बना रहा है। अमेरिका ने कतर और बहरीन में थाड और पैट्रियट मिसाइल सिस्टम तैनात किए हैं ताकि ईरान के जवाबी हमलों को रोका जा सके। लेकिन इस सबके बाद भी ईरान पूरी तरह से सीमाओं पर एक्टिव है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दावा किया जा रहा है कि अमेरिका का एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन ईरान पर उत्तरी अरब सागर से हमला कर सकता है। इसके अलावा इस इलाके में दूसरी जगहों पर चल रहे गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी ईरान पर हमला शुरू कर सकते हैं।
लाल सागर में तैनात हर एक युद्धपोत दर्जनों टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइलों से लैस हैं, जिनकी रेंज 1000 मील से थोड़ी ज्यादा है और इनमें 1000 पाउंड का पारंपरिक वारहेड लगा होता है। माना जा रहा है कि ईरान पर शुरूआती हमला टॉमहॉक मिसाइलों से ही होगा। इसके अलावा, अमेरिकी नौसेना के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप आमतौर पर एक हमलावर पनडु्ब्बी के साथ चलते हैं। हालांकि पनडुब्बियों के होने या ना होने का खुलासा कभी नहीं किया जाता है। एक ओर जहां लाल सागर में ये तैयारियां चल रही हैं तो वहीं दूसरी ओर सीएनएन के मुताबिक एक ई-11ए विमान, गुरुवार को कतर के अल-उदीद एयर बेस पर उतरा है। जो अमेरिका के लिए मुश्किल ऑपरेशन्स को कोऑर्डिनेट करने के लिए सबसे जरूरी आखिरी अहम साजो सामान में से एक है। ये पहले एक बिजनेस जेट हुआ करता था, जिसे अब सैन्य एयरक्राफ्ट में बदल दिया गया है। अब ये एक हाई-एल्टीट्यूड कम्युनिकेशन रिले सिस्टम की तरह काम करता है, जो किसी भी एयरबोर्न या ज़मीनी फोर्स की मदद के लिए डेटा भेजता है। इसके अलावा पिछले दिनों गुरुवार को ही अमेरिका का लड़ाकू सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने वाला मॉडिफायर कार्गाे विमान भी मिडिल ईस्ट पहुंच चुका है। इसके अलावा एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट्स का एक स्क्वाड्रन, जो गाइडेड बम और हवा से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस है, उसे भी हाल ही में प्लान्ड फोर्स रोटेशन के हिस्से के रूप में इस क्षेत्र में तैनात किया गया है। साथ ही अमेरिका के ड्रोन और टोही विमान लगातार होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में गश्त लगा रही हैं।
संडे से, ये उड़ानें लगभग लगातार गति से चल रही हैं, जो कतर, बहरीन और यहां तक कि मध्य पूर्व के बाहर के अमेरिकी ठिकानों से शुरू हो रही हैं। साथ ही आरसी-135 टोही विमान भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं, जो न्यूक्लियर रेडिएशन का पता लगाने के लिए है। इसके अलावा लड़ाकू विमानों में आसमान में ही ईंधन भरने के लिए कम से कम 8 एयरक्राफ्ट टैंकर ने गुरुवार को अटलांटिक सागर को पार किया है। ये दक्षिणी स्पेन में मोरोन एयर बेस पर उतरे हैं। सीएनएन के दौरान कई एयरक्राफ्ट टैंकरों ने ऐसे संदेश दिए गये हैं, जिनसे पता चलता है कि वे ट्रांसअटलांटिक उड़ान पर कम से कम सात अतिरिक्त छोटे विमानों की मदद के लिए हैं, जो शायद इलेक्ट्रॉनिक युद्ध या फाइटर मिशन के लिए सुसज्जित हैं। इसके अलावा फिलहाल यह साफ नहीं है कि दुनिया भर में और कहां कहां से अमेरिकी सेना ऑपरेशन चलाने वाली है, लेकिन अमेरिका के दर्जनों बेस इन इलाकों में हैं। ऐसे में साफ है कि अमेरिका पूरी तरह से जंग की तैयारी कर रहा है और अपने हर ऑप्शन को पूरी तरह से सर्च कर रहा है।
आफगानिस्तान के बाद अब अमेरिका सीधे किसी देश से जंग करने जा रहा है। हालांकि इतना जरुर है कि पिछले दिनों जब ईरान-इजराइल जंग हुई थी तो अमेरिका भी इजराइल के साथ था लेकिन कोई सीधे तौर पर जंग में शमिल नहीं हुआ था लेकिन कहीं न कहीं अमेरिका की भागेदारी बड़ी थी। ईरान के सेना प्रमुख अमीर हातमी ने गर्व से कहा है कि इस संघर्ष ने ईरानी सेना को अपनी ताकत और कमजोरियों को समझने का अनूठा मौका दिया। ईरान के विदेश और रक्षा मंत्री की ओर से यह दावा किया गया है कि आज ईरान की मिसाइल प्रणाली, हवाई रक्षा और समग्र सैन्य क्षमता पहले से कहीं ज्यादा घातक है। इस युद्ध ने ईरान को वो अनुभव दिया है, जो किसी भी किताब या ट्रेनिंग से नहीं मिल सकता। ईरान ने दुश्मन की रणनीति को करीब से देखा और अब उसकी काट तैयार कर ली है। तेहरान के पास वो बैलिस्टिक मिसाइलें हैं जो पलक झपकते ही मिडिल ईस्ट में मौजूद हर अमेरिकी ठिकाने को राख में तब्दील कर सकती हैं।
ईरान के पास लाल सागर का वो संकरा रास्ता है जो दुनिया को जोड़ता है दुनिया के 60 से ज्यादा का कारोबार इसी रास्ते से होता है। ऐसे में होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं, बल्कि दुनिया की आर्थिक धड़कन है। अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला करने की गलती की, तो ये धड़कन रुक सकती है। दुनिया के अधिकतर तेल और गैस के लिए कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं है। पिछले साल के तनाव के दौरान वैश्विक ऊर्जा कीमतों में जो उछाल आया था, वो तो बस एक ट्रेलर था।
ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर उसे व्यापार करने से रोका गया, तो वो इस मार्ग को सुरक्षित नहीं रहने देगा। एशियाई देशों की ऊर्जा सप्लाई इसी रास्ते पर टिकी है। अमेरिका ईरान को घेरने की कोशिश में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को दांव पर लगा रहा है। ईरान ने सदियों से विदेशी हस्तक्षेप का विरोध किया है। आज अमेरिका की घेराबंदी जितनी बढ़ रही है, ईरान का संकल्प उतना ही मजबूत हो रहा है। अली शमखानी ने ठीक ही कहा है कि ईरान सिर्फ समुद्र तक सीमित नहीं रहेगा, उसके पास ऐसे उन्नत सैन्य विकल्प हैं जिनकी अमेरिका ने कल्पना भी नहीं की होगी।अगर ट्रंप को लगता है कि वो प्रतिबंधों और युद्धपोतों के दम पर ईरान को बातचीत की मेज पर अपनी शर्तों पर ला पाएंगे, तो ये उनकी बड़ी भूल है। ईरान झुकने वाला देश नहीं, बल्कि टकराने वाला देश है। पश्चिम एशिया का इतिहास गवाह है कि जिसने भी इस जमीन को दबाने की कोशिश की, उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी।



