रूस और अमेरिका परमाणु डील कैंसिल, ईरान अमेरिका वार्ता ध्वस्त, बस जंग एलान होना बाकी

अमेरिका के साथ परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता समाप्त, रूस ने दिए अगले कदम खुद तय करने के संकेत

यूएन प्रमुख ने ‘न्यू स्टार्ट’ संधि के खत्म होने को अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा के लिए गंभीर क्षण बताया
अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई विकसित देशों में अत्याधुनिक अंडरग्राउंड बंकर कालोनियों का युद्ध स्तर पर निर्माण

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। ईरान—अमेरिका क्राइसस के बीच रूस ने अमेरिका के साथ हुए परमाणू हथियार नियंत्रण संधि से खुद को अलग कर पूरी दुनिया को चौका दिया है। दुनिया एक बार फिर उसी मोड़ पर वापस आगर खड़ी होती दिखाई दे रही है जहां से लौटने का रास्ता इतिहास में अक्सर मलबे लाशों और रेडिएशन से होकर गया है।
रूस और अमेरिका के बीच न्यू स्टार्ट परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते का अंत अब सिर्फ कूटनीतिक खबर नहीं रही बल्कि यह वैश्विक अस्थिरता का अलार्म बन चुकी है। मॉस्को से आया ताज़ा बयान बताता है कि अब हालात उस बिंदु पर पहुंच गए हैं जहां नियम शर्तें और आपसी प्रतिबद्धताएं इतिहास के पन्नों में दफन की जा रही हैं।

 

न्यू स्टार्ट समझौता रूस ने किया दफन

रूस के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि न्यू स्टार्ट से जुड़ी सभी सीमाएं अब व्यवहार में नहीं रहीं। मंत्रालय का कहना है कि समझौते की अवधि समाप्त होने के बाद दोनों देश इसके नियमों को मानने के लिए बाध्य नहीं हैं। यह वही समझौता था जो दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु ताकतों के हथियारों पर आखिरी लगाम था। अब वह लगाम टूट चुकी है और घोड़ा बेकाबू है। हालात को और भयावह बनाता है यह तथ्य कि परमाणु हथियारों की तैनाती पर निगरानी और पारदर्शिता की व्यवस्था भी खत्म हो चुकी है। रूस ने यह भी संकेत दिया है कि यदि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी नए खतरे का सामना करना पड़ा तो वह कठोर सैन्य और तकनीकी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। यह बयान अपने आप में एक चेतावनी है।

बंकर अमीरों के लिए बनते हैं और कब्रें गरीबों के लिए

यह तैयारी अपने आप में एक सवाल है। क्या दुनिया के शासक वर्ग को युद्ध का यकीन है? अगर नहीं तो फिर अरबों डॉलर खर्च कर ज़मीन के नीचे शहर क्यों बसाए जा रहे हैं? और अगर हां तो यह युद्ध किसके लिए है और किसके खिलाफ इतिहास गवाह है कि जब भी युद्ध आता है बंकर अमीरों के लिए बनते हैं और कब्रें गरीबों के लिए। यह पूरी प्रक्रिया लोकतंत्र के उस दावे को भी कटघरे में खड़ा करती है जो कहता है कि युद्ध राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए लड़े जाते हैं। अगर सुरक्षा सच में सामूहिक होती तो तैयारी भी सामूहिक होती। लेकिन यहां तैयारी चयनित है वर्गीय है और चुपचाप है। जनता को युद्ध का डर नहीं दिखाया जा रहा बल्कि उसे युद्ध के लिए मानसिक रूप से सुन्न किया जा रहा है।

बिना धमकी दिए दी गई धमकी

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले ही संकेत दे चुके थे कि यदि अमेरिका ऐसे कदम उठाता है जिससे रणनीतिक संतुलन बिगड़ता है तो रूस इस समझौते के मूल प्रावधानों का पालन नहीं करेगा। अब वही चेतावनी हकीकत में बदलती दिख रही है। उधर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में कहा था कि उन्हें इस समझौते के खत्म होने की ज्यादा चिंता नहीं है और वे किसी नए करार की उम्मीद करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि जब भरोसे की नींव ही ढह चुकी हो तो नई इमारत कैसे खड़ी होगी? इस पूरी तस्वीर को और डरावना बनाता है ईरान-अमेरिका के बीच टूटी वार्ता। पश्चिम एशिया पहले ही बारूद के ढेर पर बैठा है और अब जब कूटनीति वहां भी दम तोड़ती दिख रही है तो दुनिया एक साथ कई मोर्चो पर युद्ध की आहट सुन रही है।

आखिरी बड़ा समझौता था

गौरतलब है कि न्यू स्टार्ट अब रूस और अमेरिका के बीच हथियार नियंत्रण से जुड़ा आखिरी बड़ा समझौता था। इससे पहले अमेरिका 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज ट्रीटी से बाहर निकल चुका है। यानी शीत युद्ध के बाद बनी सुरक्षा की पूरी संरचना एक-एक कर ढह चुकी है। आज हालात यह हैं कि दुनिया के पास न तो भरोसे का तंत्र बचा है न नियंत्रण का ढांचा। केवल बयान हैं चेतावनियां हैं और परमाणु बटन के पास बैठे हाथ।

महासचिव ने चेतावनी दी

महासचिव ने चेतावनी दी कि हथियार नियंत्रण तंत्र का इस तरह बिखरना रणनीतिक अस्थिरता को जन्म देगा, जिससे गलत आकलन, दुर्घटनाओं और टकराव की आशंका कई गुना बढ़ जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि परमाणु हथियारों की मौजूदगी अपने आप में खतरा है और जब उन पर निगरानी पारदर्शिता और संवाद खत्म हो जाए, तो वह खतरा वैश्विक संकट में बदल सकता है।

बंकर कालोनियों की बाढ़

इन खबरों के बीच अहम खबर यह है कि अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई विकसित देशों में बंकर कालोनियों की बाढ़ सी आ गयी है। अत्याधुनिक अंडरग्राउंड बंकर कॉलोनियों का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। यह बंकर महज कंक्रीट के तहखाने नहीं हैं बल्कि जमीन के भीतर बसाई जा रही वैकल्पिक सभ्यताएं हैं। इन बंकरों में जिम हैं, स्विमिंग पूल हैं, अस्पताल हैं, स्कूल हैं, क्लब और बार हैं। यानी वह सब कुछ जो ऊपर की दुनिया में सामान्य जीवन कहलाता है। फर्क सिर्फ इतना है कि यह जीवन अब सूरज की रोशनी से दूर मोटी दीवारों और लोहे के दरवाज़ों के पीछे सोचा जा रहा है। इन बंकर कॉलोनियों को सर्वाइवल हब कहा जा रहा है। ऐसी जगहें जहां महीनों सालों तक बाहर की दुनिया से कटकर जिया जा सके। ऑक्सीजन फिल्टर, फूड स्टोरेज, मेडिकल यूनिट, मनोरंजन के साधन सब कुछ। संदेश साफ है ऊपर अगर सब कुछ राख हो जाए तब भी नीचे ज़िंदगी चलती रहनी चाहिए। लेकिन सवाल यह नहीं है कि बंकरों में क्या-क्या है सवाल यह है कि बंकरों में कौन-कौन होगा?

लोकसभा की कार्यवाही पर राज्यसभा में चर्चा पर बवाल

संसद में सातवें दिन भी हंगामा जारी

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। संसद में सातवें दिन भी हंगामा जारी है। गुरुवार को राज्यसभा में उस समय गरमागरम माहौल देखने को मिला जब विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा संसदीय प्रक्रिया को लेकर एक-दूसरे से तीखी बहस में उलझ गए। यह घटना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसभा भाषण के बाधित होने के एक दिन बाद हुई। दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक तब शुरू हुई जब खरगे ने संसद में राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर बोलने पर लगाए जा रहे प्रतिबंधों पर आपत्ति जताई।
लोकसभा में हुई बाधा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि निचले सदन में कांग्रेस नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर बोलने की अनुमति नहीं दी गई, जिस पर नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। खरगे ने पूछा कि संसद का अर्थ लोकसभा और राज्यसभा दोनों है। लोकसभा में विपक्ष के नेता देश के हितों पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें बोलने नहीं दिया गया। इस तरह सदन कैसे चलाया जा सकता है?

सरकार किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिए हमेशा तत्पर : नड्डा

राज्यसभा में सदन के नेता नड्डा ने कड़ा जवाब देते हुए इस आरोप को खारिज कर दिया और सदन को संसदीय परंपराओं की याद दिलाई। लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने न देने का मुद्दा उठाने पर नड्डा ने राज्यसभा में कहा कि लोकसभा की कार्यवाही पर राज्यसभा में चर्चा नहीं की जा सकती, मेरे सम्मानित सहकर्मी को यह बात पता होनी चाहिए। नड्डा ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार किसी भी विषय पर चर्चा करने के लिए हमेशा तत्पर है। नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी लोकसभा में किसी भी प्रश्न का उत्तर देने के लिए हमेशा तैयार हैं, लेकिन विपक्ष सदन की कार्यवाही को आगे नहीं बढऩे दे रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विपक्ष के अनुरोध पर भारत-अमेरिका व्यापार समझौतों पर बयान दिया है।
खरगे ने आगे आरोप लगाया कि भाजपा लोगों को बोलने नहीं देती, और कहा कि पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी को जंजीरों में जकड़ रखा है, उन्हें बोलने नहीं दे रही। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल के लोग बंधुआ मजदूर हैं। विपक्ष सत्ताधारी दल की तरह दूसरों को गाली-गलौज या अपशब्द नहीं कहता। मैं बता रहा हूं कि कैसे जनता को बोलने न देकर जनता को कुचल रही है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने किया हस्तक्षेप

बहस तेज होते देख वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हस्तक्षेप करते हुए मांग की कि खरगे द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द लिंच रिकॉर्ड से हटा दिया जाए। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस मामले में दखल देते हुए बजट सत्र के दौरान बार-बार हो रही बाधाओं के बीच सदन के नियमों और परंपराओं का पालन करने का आग्रह किया। रिजिजू ने कहा कि आज सभी सांसद नियमों और परंपराओं के पालन की उम्मीद कर रहे हैं। सभी राज्यसभा में प्रधानमंत्री का भाषण सुनने का इंतजार कर रहे हैं। अगर कांग्रेस प्रधानमंत्री का भाषण नहीं सुनना चाहती, तो यह उसकी मर्जी है, लेकिन अन्य सदस्य सुनना चाहते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता ने सदन के नियमों का पालन नहीं किया।

अज्ञात वाहन की टक्कर से कार सवार दंपती समेत तीन की मौत

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । लखीमपुर खीरी के गोला क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर जलालपुर मोड़ के पास गोला से लखीमपुर की ओर जा रही कार को किसी वाहन ने टक्कर मारी दी। जिससे कार में सवार तीन लोगों की मौत हो गई। तीन लोग घायल हुए हैं। इनमें एक व्यक्ति की हालत नाजुक है।
हादसा बृहस्पतिवार तडक़े करीब छह बजे हुआ। राहगीर शुभम रस्तोगी ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी को सीएचसी गोला भेजा गया। जहां से एक व्यक्ति की हालत नाजुक होने पर उसे जिला अस्पताल रेफर किया गया।
कार सवार सभी लोग एक ही परिवार के सदस्य थे। दिल्ली से धर्म कुंडा बहराइच अपने घर जा रहे थे।

फिर से हो बिहार चुनाव, सुप्रीम कोर्ट पहुंची सुराज पार्टी

प्रशांत किशोर बोले- आचार संहिता लागू होने के दौरान बांटे गए 10 हजार रुपये

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने गुरुवार (5 फरवरी, 2026) को याचिका दाखिल की, जिसमें खासतौर पर बिहार की मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना को चुनौती दी गई है।
उनका कहना है कि सरकार ने आचार संहिता लागू होने के दौरान न सिर्फ 25-35 लाख महिलाओं के खाते में 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए, बल्कि नए लाभार्थियों को भी स्कीम में जोड़ा और यह तरीका गैरकानूनी है। उन्होंने कोर्ट से गुजारिश की है कि वह चुनाव आयोग को चुनाव प्रभावित करने वाली मुफ्त और कल्याणकारी योजनाएं शुरू करने के लिए सत्ताधारी पार्टी के लिए छह महीनों की समयसीमा निर्धारित करने का निर्देश दे। बिहार चुनाव में अवैध प्रक्रियाओं का आरोप लगाते हुए जनसुराज ने रिट याचिका फाइल की है।

वीबीजी रामजी पर कर्नाटक विस में संग्राम

कांग्रेस सरकार ने पारित किया प्रस्ताव, भाजपा व जेडीएस ने बताया अवैध

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। कर्नाटक सरकार ने को केंद्र सरकार के एमजीएनआरईजीए को निरस्त करने और उसके स्थान पर वीबी-जी राम जी अधिनियम लागू करने के फैसले का विरोध करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया। इस बीच, भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (एस) के सदस्यों ने विधानसभा और विधानसभा परिषद से वॉकआउट किया।
यह प्रस्ताव 75 सदस्यीय उच्च सदन में पारित हुआ, जहां विपक्ष का एक भी सदस्य उपस्थित नहीं था क्योंकि उन्होंने आधिकारिक तौर पर कार्यवाही का बहिष्कार किया था और सदन से बाहर चले गए थे। कानून और संसदीय कार्य मंत्री एच.के. पाटिल, ग्रामीण विकास और जनसंपर्क एवं सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी मंत्री प्रियांक खरगे और के. शिव कुमार जैसे सदस्यों ने इस बात पर जोर दिया कि यह विधेयक राज्यों पर 40प्रतिशत का बोझ डालकर, रोजगार गारंटी को सीमित करके और केंद्र को कार्यों के प्रकार, वित्तपोषण और कार्यान्वयन क्षेत्रों के निर्धारण में अधिक शक्तियां प्रदान करके संघवाद को कमजोर करता है।

लोकसभा में पीएम मोदी के भाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पास

बुधवार को पीएम मोदी को लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब देना था, लेकिन हंगामे के कारण सदन स्थगित हो गया। लोकसभा में पीएम मोदी के भाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पास हो गया। सूत्रों के मुताबिक, यह अभूतपूर्व है कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री ने लोकसभा में भाषण नहीं दिया. स्पष्ट जानकारी थी कि कांग्रेस की ओर से लोकसभा के भीतर प्रधानमंत्री पर शारीरिक हमला करने की योजना बनाई जा रही है। इसी कारण एहतियाती कदम के तौर पर महिला सांसदों को उनके चारों ओर कवर के रूप में भेजा गया।

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