फिल्म घूसखोर पंडित पर भड़कीं मायावती, कहा- जातिसूचक नाम से ब्राह्मण समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं

नेटफ्लिक्स की फिल्म घूसखोर पंडित के टाइटल को लेकर छिड़ा विवाद अब सियासी गलियारों तक पहुँच गया है। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मुखिया मायावती ने इस फिल्म के नाम को जातिसूचक बताते हुए केंद्र सरकार से इसे तुरंत बैन करने की मांग की है। मायावती ने साफ शब्दों में कहा है कि फिल्मों के जरिए किसी विशेष समुदाय की छवि बिगाड़ना निंदनीय है।
शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए मायावती ने लिखा- यह बड़े दुख व चिंता की बात है कि अब फिल्मों में भी ‘पंडित’ को घुसपैठिया (घूसखोर) बताकर जो अपमान किया जा रहा है, उससे समूचे ब्राह्मण समाज में जबरदस्त रोष है। हमारी पार्टी इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है। केंद्र सरकार को ऐसी जातिसूचक फिल्म पर तुरंत प्रतिबंध लगाना चाहिए।
फिल्म के नाम को लेकर केवल राजनीति ही नहीं, बल्कि कानूनी लड़ाई भी शुरू हो गई है। दिल्ली के अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की है। याचिका में दलील दी गई है कि ‘पंडित’ शब्द को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी (घूसखोरी) से जोड़ना पूरे ब्राह्मण समाज की गरिमा को ठेस पहुँचाता है। इस तरह के टाइटल जानबूझकर सांप्रदायिक तनाव और हेट स्पीच को बढ़ावा देने के लिए रखे जा रहे हैं। नेटफ्लिक्स द्वारा फिल्म का प्रचार शुरू करना सामाजिक सद्भाव के लिए खतरा बन सकता है।

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