Rahul के हमलों से बौखलाए Modi, बीच रैली में खोया आपा

असम की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंदाज इस बार कुछ अलग ही दिखा...मंच पर वही जोशीला अंदाज था...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: असम की रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अंदाज इस बार कुछ अलग ही दिखा…मंच पर वही जोशीला अंदाज था…

भीड़ भी मौजूद थी…लेकिन भाषण का बड़ा हिस्सा कांग्रेस और खास तौर पर राहुल गांधी पर फोक्स्ड रहा….राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि प्रधानमंत्री को खुद मोर्चा संभालना पड़ा?…और क्या वाकई राहुल गांधी के हालिया हमलों ने बीजेपी नेतृत्व को असहज कर दिया है?…तो आखिर बीच रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राहुल गांधी को लेकर ऐसी क्या कही बात?…और आखिर क्यों सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संभालना पड़ा मोर्चा..

बजट सत्र में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के तीखे हमलों ने देश की सियासत में हलचल मचा दी है…सदन में राहुल गांधी के भाषण के बाद ऐसा माहौल बना कि पूरी सरकार बचाव की स्थिति में दिखी…एक के बाद एक मंत्री सामने आए…केंद्रीय मंत्री अमित शाह, पीयूष गोयल, शिवराज सिंह चौहान…सबने राहुल को जवाब देने की कोशिश की…लेकिन जब बात बढ़ती गई तो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मैदान में उतरना पड़ा…जिसके बाद आलोचकों का कहना है कि…अगर आरोप बेअसर होते…तो इतनी बेचैनी क्यों दिखती?

दरअसल, असम की रैली में मोदी का आक्रामक अंदाज और राहुल गांधी पर लगातार निशाना साधना…इस बात का संकेत माना जा रहा है कि विपक्ष के सवालों ने उन्हें असहज कर दिया है…जिसे लेकर राजनीतिक जानकार मानते हैं कि राहुल गांधी के आरोपों से घिरी सरकार अब सीधा पलटवार कर अपनी छवि बचाने की कोशिश में है…सबसे पहले आप ये बयान सुनिए…फिर इस बयान के क्या मायने निकाले जा रहे हैं…उसपर बात करते हैं…..

असम में आयोजित इस रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना नाम लिए राहुल गांधी पर निशाना साधा…उन्होंने कहा कि 10 साल सत्ता से बाहर रहने के कारण कांग्रेस ज्यादा जहरीली हो गई है…उनके मुताबिक, पार्टी के टॉप लीडर से लेकर नीचे तक जुबान से जहर निकलता है…ये बयान अपने आप में काफी कड़ा माना जा रहा है…वहीं इसे लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि…जब प्रधानमंत्री खुद इस तरह की भाषा में जवाब देते हैं…तो उनका बयान ये बताता है कि विपक्ष के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा रहा…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ये भी कहा कि कांग्रेस असम को फिर से अशांति और अराजकता की ओर ले जाना चाहती है…उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राज्य को घुसपैठियों के हवाले करना चाहती है…इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस को मुस्लिम लीग कांग्रेस कहकर संबोधित किया…….इस तरह की टिप्पणी चुनावी माहौल में ध्रुवीकरण की राजनीति का संकेत मानी जा रही है…रैली में मौजूद भीड़ में बड़ी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ता थे…लेकिन भाषण का फोकस स्थानीय मुद्दों से ज्यादा कांग्रेस और राहुल गांधी पर रहा…इससे ये संदेश गया कि असम में कांग्रेस बीजेपी को चुनौती दे रही है और मुकाबला आसान नहीं है…अगर मुकाबला हल्का होता…तो शायद प्रधानमंत्री को इतना आक्रामक रुख अपनाने की जरूरत नहीं पड़ती…

वहीं बीते कल की तारीख पुलवामा हमले की बरसी भी थी…Pulwama में 2019 में हुए आतंकी हमले की याद दिलाते हुए पीएम मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया…उन्होंने कहा कि उनकी सरकार सख्त फैसले लेने वाली सरकार है…इसी संदर्भ में उन्होंने Surgical Strike का जिक्र किया…उन्होंने ये संदेश देने की कोशिश की कि उनकी सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलती है…

साथ ही पीएम मोदी ने तंज कसते हुए कहा कि…कुछ लोगों को रात में नींद नहीं आती, और जब नींद नहीं आती तो दिन में कुछ भी बोलते रहते हैं…….पीएम मोदी के इस बयान को सीधे तौर पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के हालिया बयानों से जोड़कर देखा जा रहा है…उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वो आतंकियों के प्रति नरम रुख रखती है और देशहित के खिलाफ खड़ी होती है…

वहीं दूसरी तरफ, सोशल मीडिया पर उस दौर की घटनाओं को लेकर फिर से चर्चा तेज हो गई है….खासकर पूर्व राज्यपाल Satya Pal Malik के पुराने बयानों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं….इसके अलावा, पूर्व सेना प्रमुख Manoj Mukund Naravane की किताब के कुछ अंशों को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है…….क्योंकि, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने इन्हीं मुद्दों को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा था…राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भी तीखा बयान दिया था…उन्होंने कहा था कि…पीएम मोदी ने भारत माता को बेच दिया…

राहुल गांधी का ये बयान बीजेपी को काफी चुभा…इसके बाद से बीजेपी नेताओं ने इसे राष्ट्रविरोधी बयान बताते हुए पलटवार शुरू कर दिया…जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में ये सवाल उठ रहा है कि…क्या राहुल गांधी का आक्रामक अंदाज बीजेपी के बीच डर का माहौल बना रहा है?……दोस्तों, असम की रैली में पीएम मोदी का भाषण सुनकर ये साफ लगा कि कांग्रेस पर हमला सिर्फ राजनीतिक रणनीति नहीं…बल्कि अब सीधा जवाब भी है…जब प्रधानमंत्री कहते हैं कि कांग्रेस जहरीली हो गई है…तो ये सिर्फ चुनावी जुमला नहीं, बल्कि विपक्ष के आरोपों का जवाब भी है…

ऐसे में बीजेपी की रणनीति साफ दिखती है…यानी राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और राष्ट्रवाद के मुद्दों को आगे रखकर विपक्ष को घेरना….वहीं कांग्रेस की रणनीति सरकार को कमजोर दिखाना और सवालों के घेरे में खड़ा करना है…ये सीधा मुकाबला अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच चुका है……और जैसा कि हम सभी जानते हैं कि राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप नया नहीं है….लेकिन जब भाषा तीखी हो जाए और बयान व्यक्तिगत स्तर तक पहुंच जाएं…तो बहस का स्तर भी बदल जाता है…असम की रैली में पीएम मोदी का तेवर ये दिखाता है कि मोदी सरकार अब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के आरोपों से डरने लगी है…और ये डर इस कदर बढ़ चुका है कि अब पीएम मोदी खुद इस जंग में उतर आए हैं…

ऐसे में कांग्रेस की ओर से भी जवाब आने तय हैं…कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पहले ही कह चुके हैं कि वो सवाल पूछते रहेंगे…ऐसे में आने वाले दिनों में संसद से लेकर चुनावी रैलियों तक ये टकराव और बढ़ सकता है…..वहीं जनता के बीच सवाल यही है कि…क्या ये बयानबाजी विकास और रोजगार जैसे मुद्दों को पीछे छोड़ देगी?…या फिर यही आक्रामक राजनीति आने वाले चुनावों की दिशा तय करेगी?…

लेकिन, फिलहाल इतना तो तय है कि असम की रैली ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है…राहुल गांधी के हमलों के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ये तेवर बताता है कि मुकाबला सीधा और तीखा है…अब ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि कौन किस पर भारी पड़ेगा….हालांकि, इसका फैसला जनता करेगी….लेकिन ये राजनीतिक जंग अब खुलकर सामने आ चुकी है.

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