Mamata Banerjee का बड़ा दांव, युवा साथी योजन से युवाओं को 1500 रुपये मासिक भत्ता

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने युवाओं को लुभाने के लिए 'युवा साथी योजना' के तहत 1500 रुपए मासिक भत्ता देने की घोषणा की है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने युवाओं को लुभाने के लिए ‘युवा साथी योजना’ के तहत 1500 रुपए मासिक भत्ता देने की घोषणा की है.

यह उनकी ‘MMY’ (मुस्लिम, महिला, युवा) रणनीति का हिस्सा है. मुस्लिम और महिला वोटबैंक पर उनकी मजबूत पकड़ रही है और अब वे युवा वोटरों को साधकर आगामी चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती हैं.

पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है और इसके साथ ही सियासी चालें चली जाने लगी हैं. विधानसभा चुनाव से पहले टीएमसी सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुस्लिम, महिला के बाद इस बार युवाओं को अपने पाले में करने के लिए नया कार्ड खेला है. मुस्लिम और महिला वोटबैंक के सहारे लगातार चुनाव जीत रहीं ममता बनर्जी की नजर अब युवा वोटरों पर हैं. चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने महिला, मुस्लिम, युवा (MMY) कार्ड खेल दिया है.

राज्य बजट में ममता बनर्जी ने युवा साथी योजना के तहत 21 से 40 साल के बेरोजगार युवाओं को हर माह 1500 रुपए भत्ता देने का ऐलान किया है. यह भत्ता एक अप्रैल से शुरू होगा. इसे लेकर रविवार बंगाल के विभिन्न जिलों में शिविर शुरू हुए हैं, जिनमें युवा आवेदन कर सकेंगे. आवेदन की यह प्रक्रिया 11 दिनों तक चलेगी.

रविवार को यह देखा गया है कि कोलकाता से लेकर जिलों में युवा लाइनों में खड़े होकर बेरोजगारी भत्ते के लिए अप्लाई कर रहे हैं. बेरोजगारी भत्ता के लिए अप्लाई करने वाले में एमए पास युवक हैं, तो बीए और बीएससी पास युवक भी हैं. ये युवक लाइन में खड़े होकर आवेदन कर रहे हैं. इसके माध्यम से युवाओं को ममता बनर्जी की सरकार लुभाने की कोशिश कर रही है.

मुस्लिम वोटबैंक पर ममता की नजर

साल 2011 की जनगणना के अनुसार बंगाल में मुस्लिम आबादी 27 फीसदी है. लेकिन अब अनुमान है कि मुस्लिमों की आबादी 34 फीसदी पहुंच गई हैं और मुस्लिम ममता बनर्जी का बड़ा वोटबैंक माना जाता है. ममता बनर्जी की पार्टी को मुस्लिमों का एकजुट वोट मिलता रहा है.

मुस्लिमों को ओबीसी लिस्ट में शामिल किया गया है. मुस्लिम कई सरकारी योजनाओं के लाभार्थी हैं. 2011 से पश्चिम बंगाल के ग्रामीण और शहरी इलाकों में मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार का वादा कर रही हैं.

और जिस तरह से ममता बनर्जी बीजेपी की खिलाफत करती है और स्टैंड लेती हैं. उससे उनकी लोकप्रियता मुस्लिमों के बीच बरकरार है. मुस्लिमों ने 2011 से लेकर अभी तक ममता बनर्जी का साथ दिया है.

आधी आबादी पर ममता का फोकस

उसी तरह से ममता बनर्जी ने महिलाओं के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं. लक्ष्मी भंडार के तहत पहले महिलाओं को 1000 रुपए प्रति माह दिए जाते थे. अब यह राशि बढ़ाकर 1500 रुपए कर दी गयी है.

इसके साथ ही स्वास्थ्य साथी योजनाओं में महिलाएं ही मुख्य भागीदारी होती हैं. महिलाओं ने ममता बनर्जी ने सबुज साथी सहित कई योजनाएं शुरू की हैं. इनमें छात्राओं को साइकिल देने से लेकर स्कॉलरशिप देने तक कई पहल की हैं.

महिलाएं राज्य की 50 फीसदी वोटर हैं. तृणमूल कांग्रेस ने पंचायत सिस्टम के तीनों लेवल पर महिलाओं के लिए 50% रिजर्वेशन शुरू किया.

इसके अलावा, कन्याश्री, सबुजसाथी, षष्ठोसाथी और आनंदधारा जैसी स्कीमें स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और हेल्थ सेंटर में लड़कियों और महिलाओं को खास सुविधाएं और फाइनेंशियल इंसेंटिव देती हैं. कोई भी लड़की जिसकी 18 साल की उम्र में शादी नहीं होती है, उसे प्रशासन की ओर से एकमुश्त 25 हजार रुपए दिए जाते हैं.

चुनाव से पहले ममता का बड़ा दांव

युवाओं कोे भत्ता देने पर मंत्री शशि पांजा ने कहा कि यह अच्छा लग रहा है कि युवा योजना से जुड़ रहे हैं, लेकिन हमारी भी उनके प्रति जिम्मेदारी है. लोग पहले ही आने लगे हैं. वे फॉर्म भरेंगे, इस प्रोजेक्ट के बारे में जानेंगे, और इससे पता चलता है कि ममता बनर्जी ने जो सोचा है, उसने सच में युवाओं की नब्ज को छुआ है. इसलिए हम चाहते हैं कि यह प्रोजेक्ट जल्दी शुरू हो.

राज्य की वित्त राज्य मंत्री मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि जिन युवाओं को नौकरी नहीं मिल रही है, उन्हें बढ़ावा देने के लिए पांच साल का लोन दिया जा रहा है. उन्हें इससे क्या दिक्कत है? पहले वे लक्ष्मी भंडार की बात करते थे, अब बीजेपी कहती है कि अगर वह सत्ता में आई तो तीन हजार रुपये देगी. क्या यह बदलेगा?

बंगाल में शुरू हुआ सियासी घमासान

दूसरी ओर, विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने कहा, इस सरकार ने न सिर्फ टाटा को बाहर किया है, बल्कि सरकारी नौकरियों के इंडस्ट्रियलाइजेशन के ज़रिए प्राइवेट नौकरियों को भी खत्म कर दिया है. यह सब जानते हैं. ममता बनर्जी ने साफ़ कर दिया है कि जैसे उन्होंने 2013 में युवाश्री की मौत का कारण बनीं, वैसे ही अगर वह दोबारा चुनाव जीतीं, तो वह उनकी भी मौत का कारण बनेंगी.

इस तरह से ममता बनर्जी ने पहले मुस्लिम, फिर महिला और युवाओं को टारगेट करना शुरू किया है. इस तरह से ममता बनर्जी ने चुनाव से पहले अपनी चाल चल दी हैं, अब देखना है कि क्या पिछले चुनाव की तरह ही ये ममता के साथ रहेंगे या फिर बंगाल में कोई नया खेला होगा? यह आने वाले चुनाव से ही साफ हो पाएगा.

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