पत्रकार रुचि तिवारी का चेहरा बेनकाब, सामने आया बड़ा सच
UGC को लेकर इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर है। जगह-जगह प्रोटेस्ट हो रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: UGC को लेकर इन दिनों सियासी पारा सातवें आसमान पर है। जगह-जगह प्रोटेस्ट हो रहे हैं।
कई वर्गों के लोग अलग-अलग अपने मत रख रहे हैं। लेकिन इन्हे प्रोटेस्ट के दौरान ऐसा कुछ भी हो जा रहा है जो की चर्चा का विषय बना जाता है। इसी बीच DU के नॉर्थ कैंपस के आर्ट्स फैकल्टी में एक कार्यक्रम आयोजित कर रही AISA की छात्राओं और एक महिला पत्रकार रुचि तिवारी के बीच कथित तौर पर झड़प हो गई।
यह बहस ने हिंसा और जातिवाद का रंग ले लिया। डीयू कैंपस में जमकर बवाल मच गया। इस कार्यक्रम का नाम ‘अधिकार रैली’ था, जिसमें कई प्रोफेसरों और अन्य वक्ताओं को UGC के नए नियमों पर चर्चा के लिए बुलाया गया था। पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए उन्हें आपस में भिड़ने से रोका।
लेकिन जिस तरह के आरोप और बयान सामने आ रहे हैं इससे यह पता चलता है कि ये ममला जितना सीधा दिख रहा है उतना ही पेचीदा भी है। एक तरफ जहां महिला पत्रकार रुचि तिवारी बड़े-बड़े आरोप लगा रही हैं कि उनके साथ बदसलूकी हुई और इसे लेकर इंटरनेट पर जमकर बवाल काटा जा रहा है।
वहीं दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि रुचि तिवारी का चैनल पूरी तरह से दुष्प्रचार पर टिका हुआ है। इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रिया सामने आ रही है। खैर इन पत्रकार महोदया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसे प्रियंका भारती के शेयर करते हुए लिखा कि “पानी नहीं मिला, पानी नहीं मिला..”इस महिला के जातंकवादी हरकत को जो भी जस्टिफाई कर रहे है वो सभी इस समाज में रहने लायक नहीं है! बाबा साहेब ने इनके नफरतों को संविधान बनाकर कुचल डाला, वरना ये लोग हमें जीने नहीं देते!
खैर इसी मामले पर एक साक्षी जोशी नाम की यूजर ने लिखा कि- जब पत्रकारिता गुंडागर्दी बन जाए, आराम से सवाल पूछने की बजाय माहौल बिगाड़ने का तरीक़ा बन जाए, तो ग़लत को ग़लत कहना ही होगा। साफ़ देखा जा सकता है उस महिला को कैसे नीचे पटका। क्या उस महिला के सिर से उसे नीचे हत्या के इरादे से फेंका गया? किसी शख़्स का फ़ोन छीनने की कोशिश चोरी के इरादे से की गई?
क्या हक़ बनता है आपको किसी का भी मोबाइल छीनने का! दिल्ली विश्वविद्यालय का माहौल बिगाड़ने के लिए एक सोची समझी साज़िश के तहत इन्हें ‘पत्रकार’ की आड़ में भेजा गया? इसके पीछे बहुत बड़ी साज़िश की बू आ रही है। सुनने में आ रहा है एक बड़ी ‘सवर्ण’ पत्रकारों की लॉबी है इसके पीछे। प्रदर्शनकारियों से सवाल पूछने का सिलसिला यहाँ तक कैसे पहुँचा ये बड़ा जाँच का विषय है और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं पता कीजिए।
वहीँ आवेश तिवारी का कहना है कि- दिल्ली में सवर्ण यूट्यूबर्स का एक बड़ा गैंग है।रूचि तिवारी, अमनीषा पाल और दीपक लाल आदमी इसमें शामिल हैं। चित्रा त्रिपाठी जैसे दुकड़हे पत्रकारों ने इन्हें संरक्षण दिया हुआ है। इसे गोरखपुर या पूर्वांचल गैंग भी कहा जा रहा है। रूचि तिवारी, अमनीषा पाल और झंडू लाल दीपक आदि आदि। एक साथी कहते हैं कि हर जगह पहुंचकर चिल्लाना, बदतमीजी करना, मुँह में जबरदस्ती माइक ठूंसना, दलितों पिछड़ों को हड़काना इन लोगों का काम है. ये लोग आपस में ही कैमरामैन और ऑडियंस बनते रहते हैं। इस गैंग में तकरीबन 50 लोग शामिल हैं। आगे की कहानी यह है कि यूजीसी एक्ट हटाने के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के दौरान रुचि तिवारी दिल्ली विश्विद्यालय पहुंच गई।
पहले दो वीडियो में आपको वो दिख जाएगा कि वो कैसे जबरदस्ती दलित छात्रों को ट्रोल कर रही है। किसी के मुंह में माइक घुसेड़ कर कह रही कि 5000 साल से पानी नहीं पिए हो जब एक लड़की ने प्रतिवाद किया तो उसे धकेल गिरा दिया। लड़के लड़कियां नाराज हो गए तो विक्टिम गेम शुरू हो गया कि कपड़ा फट गया। हिंसा कत्तई समाधान नहीं है। लेकिन पत्रकारिता के नाम पर लुच्चई, जातिगत अहंकार और किसी को नीचा दिखाना भी ठीक नहीं है।
वहीं एक यूजर का कहना है की रुचि तिवारी के मामले का पूरा सच जानिए। रुचि तिवारी के साथ “बाद” में जो हुआ, उसकी निंदा के साथ, एक बार “पहले” ये भी देख लीजिए कि रुचि तिवारी वहां कर क्या रहीं थीं? ये उनके ही चैनल का वीडियो है। ये किस कोने से पत्रकारिता लग रही है? आप दलितों के बीच जाकर उन्हें उकसाएंगी। उन पर चीखे चिल्लाएंगी। हाथ में माइक लेकर वहां ताल ठोंककर झगड़ा करने जाएंगी, और उसके बाद आप चाहेंगी कि देश भर के ब्राह्मण अपने तमाम ज़रूरी मुद्दे छोड़कर इस ड्रामे में शरीक हो जाएं? यहां योगी आदित्यनाथ की सरकार में ब्राह्मणों की चोटी खींच खींचकर उन्हें मारा जा रहा है। पुलिस ऐसे भयावह कृत्य को अंजाम देती हुई कैमरे पर है। मगर किसी के मुंह से चूं तक नहीं निकल रही है!
ब्राह्मणों के सारे ठेकेदार हाथों में फिरोजाबाद की रंग-बिरंगी कांच वाली चूड़ियां पहनकर बैठे हुए हैं? क्योंकि योगी आदित्यनाथ के खिलाफ बोलने की ताकत नहीं है? क्योंकि सूचना के कुबेर कोष की सप्लाई लाइन से आपके हाथों में स्टाइलिश घड़ियां सज रही हैं और पैरों में प्यूमा ब्रांड के जूते चमचमा रहे हैं। न कभी एक भी गरीब ब्राह्मण को दो जून का निवाला दीजिए, न कभी किसी गरीब ब्राह्राण परिवार के बच्चे की फीस के पैसे भरिए, न कभी किसी गरीब ब्राह्राण की कन्या की शादी में एक साड़ी खरीदने भर की उदारता रखिए, बस सोशल मीडिया पर ही खाइए, वहीं पर पीजिए, वहीं अघाइए और सारा ब्राह्मणवाद दलितों और पिछड़ों से झगड़ने में दिखाइए। खुद कंक्रीट की आलीशान छतों के नीचे रहिए, और फूस की झोपड़ियों में माचिस दिखाइए.



