US ट्रेड डील पर सियासी संग्राम, राहुल का सरकार पर हमला, बुरा फंसी गुजरात लॉबी!
US ट्रेड डील को लेकर सियासत तेज हो गई है... राहुल गांधी ने किसान नेताओं से मुलाकात कर टेक्सटाइल इंडस्ट्री और किसानों के मुद्दे उठाए...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः अमेरिका के साथ हाल ही में हुए व्यापार समझौते ने देश की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है.. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद भवन में किसान यूनियनों के प्रमुख नेताओं के साथ लंबी बैठक की.. इस बैठक में अमेरिका-भारत ट्रेड डील का पुरजोर विरोध किया गया.. और कहा गया कि यह डील किसानों, खेत मजदूरों और टेक्सटाइल इंडस्ट्री को भारी नुकसान पहुंचाएगी.. राहुल गांधी ने साफ कहा कि यह डील खेती के इंपोर्ट के लिए रास्ता खोल रही है.. जल्द ही मक्का, सोयाबीन, कपास, फल और मेवे जैसे कई उत्पाद सस्ते दाम पर भारत आएंगे.. जिससे हमारे अन्नदाताओं की रोजी-रोटी छिन जाएगी.. बैठक में पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री सुखपाल सिंह खैरा, रंजीत सिंह संधू और अशोक बलहारा सहित कई प्रमुख किसान नेता शामिल हुए..
आपको बता दें कि बैठक की शुरुआत में राहुल गांधी ने किसान नेताओं को हाल की ट्रेड डील की पूरी डिटेल बताई.. और उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने अमेरिका के दबाव में यह समझौता किया है.. जिसमें अमेरिकी कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क बहुत कम कर दिया गया है.. राहुल ने कहा कि अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है.. उनके मक्का, सोयाबीन और कपास का उत्पादन बहुत सस्ता पड़ता है.. अब ये उत्पाद भारत में सस्ते दाम पर आएंगे तो हमारे किसान अपना माल नहीं बेच पाएंगे..
किसान नेताओं ने भी अपनी चिंता जताई.. उन्होंने बताया कि गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब के लाखों किसान मक्का, सोयाबीन और कपास उगाते हैं.. अगर अमेरिकी आयात बढ़ा तो इन फसलों के भाव गिर जाएंगे.. और किसान घाटे में चले जाएंगे.. किसान नेता रंजीत संधू ने कहा कि कपास किसानों का सीधा नुकसान होगा.. भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कपास उत्पादक देश है.. लेकिन अमेरिकी कपास सस्ता आने से हमारे किसानों का बाजार छिन जाएगा.. टेक्सटाइल मिलें भी प्रभावित होंगी.. क्योंकि मिल मालिक सस्ता आयातित कपास खरीदेंगे.. और स्थानीय किसानों से खरीदना बंद कर देंगे..
वहीं राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर कहा कि यह सिर्फ किसानों का नहीं.. बल्कि करोड़ों टेक्सटाइल मजदूरों का भी सवाल है.. गुजरात, तमिलनाडु और महाराष्ट्र की टेक्सटाइल इंडस्ट्री इस डील से बुरी तरह प्रभावित होगी.. और उन्होंने आंकड़े भी दिए कि भारत में टेक्सटाइल सेक्टर में करीब 4.5 करोड़ लोग काम करते हैं.. और इनमें से ज्यादातर छोटे किसान परिवारों से आते हैं..
जानकारी के अनुसार बैठक में यह भी तय हुआ कि देशभर में बड़े पैमाने पर राष्ट्रीय आंदोलन चलाया जाएगा.. सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि हम दिल्ली में धरना देंगे.. राज्य स्तर पर रैलियां करेंगे और हर गांव में जाकर लोगों को जागरूक करेंगे.. राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव का पूरा समर्थन किया.. और कहा कि एफआईआर हो, मुकदमा हो या विशेषाधिकार प्रस्ताव आए.. मैं किसानों के साथ खड़ा रहूंगा.. जो भी डील किसानों की रोजी-रोटी छीने या देश की खाद्य सुरक्षा को कमजोर करे.. वह किसान-विरोधी है.. और उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार अन्नदाताओं के हितों से कोई समझौता नहीं कर पाएगी..
इससे पहले राहुल गांधी ने X पर भी इस डील पर हमला बोला था.. और उन्होंने लिखा था कि ट्रेड डील ने किसानों की पीठ में छुरा घोंप दिया है.. अमेरिका सब्सिडी देकर सस्ता माल बेचेगा और हमारे किसान बर्बाद हो जाएंगे.. बैठक के बाद राहुल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हम सिर्फ विरोध नहीं कर रहे, बल्कि विकल्प भी दे रहे हैं.. सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए.. MSP पर कानून बनाना चाहिए और विदेशी आयात पर सख्त शुल्क लगाना चाहिए..
वहीं सरकार ने इस डील को ‘ऐतिहासिक’ बताया है.. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि किसानों के हित सुरक्षित हैं.. संवेदनशील उत्पादों पर कोई रियायत नहीं दी गई है.. लेकिन कांग्रेस और किसान नेता इस दावे को झूठा बता रहे हैं.. राहुल गांधी ने कहा कि सरकार कह रही है कि कोई नुकसान नहीं होगा.. लेकिन हकीकत यह है कि अमेरिकी मक्का.. और सोयाबीन पहले ही भारत आ रहे हैं और भाव गिर रहे हैं.. किसान नेता अशोक बलहारा ने कहा कि हमारे पास आंकड़े हैं.. पिछले छह महीने में सोयाबीन के भाव 15 प्रतिशत गिर चुके हैं.. अगर डील लागू हुई तो और गिरेंगे..
गुजरात में AAP और कांग्रेस दोनों ही इस डील का विरोध कर रहे हैं.. AAP प्रदेश अध्यक्ष इशुदान गढ़वी ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है.. वे कहते हैं कि गुजरात की लॉबी इस डील से बुरी तरह फंसी है.. यहां के कपास और मूंगफली किसान बर्बाद हो जाएंगे.. कांग्रेस ने भी गुजरात में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके राहुल गांधी के बयान का समर्थन किया.. वडोदरा और सूरत जैसे शहरों में किसान संगठन सक्रिय हो गए हैं..
भारत की टेक्सटाइल इंडस्ट्री दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी है.. गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में हजारों मिलें चलती हैं.. इन मिलों में कच्चा माल मुख्य रूप से भारतीय कपास होता है.. अगर अमेरिकी कपास सस्ता आया तो मिलें भारतीय कपास कम खरीदेंगी.. इससे लाखों किसान और मजदूर बेरोजगार हो सकते हैं.. किसान नेता रंजीत संधू ने बैठक में कहा कि गुजरात के सौराष्ट्र और उत्तर गुजरात के कपास किसान पहले से ही सूखे.. और महंगाई से परेशान हैं.. वहीं अब यह डील उनके लिए आखिरी झटका होगी.. राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार टेक्सटाइल को ‘सनराइज सेक्टर’ कहती है.. लेकिन इस डील से यह सेक्टर डूब जाएगा..



