Amit Shah से मिलने पहुंचे Suvendu Adhikari, आधे घंटे की बैठक में तय हुई Bengal की नई रणनीति
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आहट तेज हो चुकी है और राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: एक तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का बंगाल दौरा तय है…तो वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल उस समय और तेज हो गई.
जब विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को अचानक दिल्ली तलब किया गया…और नई दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह के आधिकारिक आवास पर दोनों नेताओं के बीच करीब 30 मिनट तक बंद कमरे में सीक्रेट मीटिंग हुई…जिससे सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है…दरअसल, ये मुलाकात ऐसे समय में हुई है…जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की आहट तेज हो चुकी है और राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं….दिलचस्प बात ये है कि बैठक को लेकर न तो गृहमंत्री की ओर से कोई आधिकारिक बयान आया और न ही सुवेंदु अधिकारी ने मीडिया से कुछ शेयर किया…इस सन्नाटे ने ही इस मुलाकात को और भी ज्यादा सीक्रेट और अहम बना दिया है…
क्योंकि जैसा कि मैने पहले भी बताया कि एक तरफ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह 18 फरवरी को बंगाल दौरे पर जा रहे हैं…तो दूसरी तरफ उससे ठीक पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को अचानक दिल्ली तलब किया जाना…कई संकेतों की ओर इशारा करता है…दोनों नेताओं के बीच करीब 30 मिनट तक बंद कमरे में इस मुलाकात ने बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है…क्योंकि ये बैठक ऐसे समय में हुई है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारियां अपने चरम पर हैं…
जानकारी के मुताबिक, सुवेंदु अधिकारी सोमवार को ही दिल्ली पहुंचे…राजधानी पहुंचते ही वो सीधे गृहमंत्री के आवास पर गए…वहां दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत चली…ये कोई आम शिष्टाचार मुलाकात नहीं मानी जा रही…क्योंकि बैठक का समय, उसका तरीका और उसके तुरंत बाद अमित शाह का बंगाल दौरा…इन सबने इस मुलाकात को बेहद अहम बना दिया है…क्योंकि, इस बैठक को लेकर दोनों ही नेताओं की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया…जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में अलकटों के बाजार गर्म हो गए….
यही चुप्पी इस बैठक को और ज्यादा रहस्यमय बना रही है…हालांकि अचानक ये बैठक क्यों बुलाई गई…इस पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है…लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तीस मिनट की ये बातचीत पूरी तरह पश्चिम बंगाल की राजनीतिक स्थिति को ध्यान में रखकर की गई थी…पश्चिम बंगाल में आने वाले समय में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने की संभावना है…ऐसे में भाजपा कोई भी कदम बिना सोचे-समझे नहीं उठाना चाहती…
पिछले कुछ दिनों से भाजपा के अंदर बैठकों का सिलसिला लगातार जारी है…सूत्रों के अनुसार, कुछ दिन पहले पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार के आवास पर बंगाल के भाजपा सांसदों के साथ बैठक की थी…इस बैठक में संगठन की स्थिति, चुनावी रणनीति और आगे की योजना पर चर्चा हुई थी…उस बैठक के एक हफ्ते बाद 16 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी की आमने-सामने मुलाकात ने साफ संकेत दे दिया कि…पार्टी शीर्ष स्तर पर बंगाल को लेकर गंभीर मंथन कर रही है…
वहीं अब 18 फरवरी को अमित शाह खुद बंगाल जा रहे हैं…भाजपा सूत्रों का कहना है कि शाह का ये दौरा खासतौर से संगठनात्मक बैठक के लिए है…वो बंगाल भाजपा के शीर्ष नेताओं के साथ चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने वाले हैं…लेकिन सवाल ये है कि जब अमित शाह खुद बंगाल जा रहे थे…तो उससे पहले सुवेंदु अधिकारी को दिल्ली बुलाने की क्या जरूरत थी?…यही सवाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है….
कुछ लोगों का मानना है कि…पार्टी नेतृत्व कुछ खास मुद्दों पर पहले निजी तौर पर चर्चा करना चाहता था…पश्चिम बंगाल की राजनीति जटिल मानी जाती है…यहां सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन, उम्मीदवार चयन और स्थानीय नेताओं के बीच तालमेल जैसे कई पहलू अहम होते हैं…….सुवेंदु अधिकारी राज्य में भाजपा का बड़ा चेहरा हैं और जमीनी राजनीति की गहरी समझ रखते हैं…इसलिए माना जा रहा है कि शायद अमित शाह ने उनसे सीधा फीडबैक लेने के लिए ये बैठक की हो…
बैठक में राज्यसभा सीट को लेकर भी चर्चा होने की बात कही जा रही है…वर्तमान में पश्चिम बंगाल से भाजपा के राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य का कार्यकाल समाप्त होने वाला है…हाल ही में उन्हें संगठन में एक नई और बड़ी जिम्मेदारी भी दी गई है…ऐसे में पार्टी को राज्यसभा के लिए नया चेहरा तय करना है…सूत्रों का कहना है कि इस विषय पर भी अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी के बीच विचार-विमर्श हुआ…
इसके अलावा, बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए संभावित उम्मीदवारों की सूची पर भी चर्चा हुई बताई जा रही है…भाजपा इस बार उम्मीदवार चयन में कोई चूक नहीं करना चाहती…पिछले चुनाव में पार्टी ने बड़ी संख्या में सीटें जीती थीं और मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी थी…लेकिन सत्ता से दूर रह गई थी…इस बार पार्टी की कोशिश है कि…संगठन मजबूत हो…उम्मीदवार स्थानीय स्तर पर स्वीकार्य हों और चुनाव प्रचार में कोई कमी न रह जाए…
वहीं दोनों नेताओं के बीच हुई मीटिंग को लेकर राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि…जिस तरह से भाजपा के भीतर मीटिंग पर मीटिंग हो रही है…उससे साफ है कि अमित शाह पश्चिम बंगाल जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं… अमित सशाह की पहचान एक रणनीतिकार के रूप में रही है….वो चुनावी गणित, बूथ प्रबंधन और सामाजिक समीकरणों पर खास ध्यान देते हैं…पश्चिम बंगाल जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में वो कोई भी फैसला जल्दबाजी में नहीं लेना चाहते…
वहीं दिल्ली में हुई इस सीक्रेट मीटिंग का एक और मतलब निकाला जा रहा है….माना जा रहा है कि पार्टी बंगाल में एकजुटता का संदेश देना चाहती है…पिछले कुछ समय से राज्य इकाई के भीतर मतभेदों की खबरें भी सामने आती रही हैं…ऐसे में शाह सीधे हस्तक्षेप कर संगठन को मजबूत और एकजुट रखने की कोशिश कर रहा है…हालांकि, यहां ये भी ध्यान देने वाली बात है कि…अमित शाह का पश्चिम बंगाल दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं माना जा रहा…वो वहां संगठनात्मक बैठक करेंगे…नेताओं से अलग-अलग मुलाकात करेंगे और चुनावी तैयारी की समीक्षा करेंगे…लेकिन उससे पहले सुवेंदु अधिकारी को दिल्ली बुलाकर अलग से चर्चा करना…इस बात का संकेत देता है कि…कुछ मुद्दे इतने जरूरी थे कि…उन पर पहले सीक्रेट बातचीत जरूरी समझी गई….
जबकि, आम जनता के नजरिए से देखें तो ये पूरा घटनाक्रम एक बड़ी चुनावी तैयारी का हिस्सा लगता है…पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष की सांसदों के साथ बैठक…फिर अमित शाह और सुवेंदु अधिकारी की आमने-सामने मुलाकात….और उसके तुरंत बाद शाह का बंगाल दौरा….ये सब बताता है कि भाजपा शीर्ष नेतृत्व बंगाल को लेकर पूरी तरह सक्रिय है….साफ शब्दों में कहें तो एक तरफ अमित शाह बंगाल की जमीन पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं…तो वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में रणनीति की बिसात बिछाई जा रही है…तीस मिनट की ये बैठक भले ही आधिकारिक रूप से साधारण बताई जाए…लेकिन राजनीतिक तौर पर ये बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है…
अब आने वाले दिनों में ये देखना दिलचस्प होगा कि…इन बैठकों का असर चुनावी मैदान में कितना दिखाई देता है….लेकिन फिलहाल इतना तो तय है कि भाजपा…सीएम ममता बनर्जी का गढ़…पश्चिम बंगाल को जीतने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती….जिस तरह से शीर्ष स्तर पर लगातार मंथन हो रहा है…उससे साफ है कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह बंगाल फतह करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं….ऐसे में बंगाल की सियासत में अब मुकाबला और भी दिलचस्प होने वाला है कि…क्या सीएम ममता बनर्जी को हराने में कामयाब होंगे…और क्या सच में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपनी रणनीति के चलते…बाजपा को सत्ता की कुर्सी पर बिठा पाने में सफल होंगे?



