PM मोदी पर भड़कीं सुप्रिया श्रीनेत, दे डाली खुली चुनौती
सुप्रिया श्रीनेत ने मोदी सरकार पर तगड़ा हमला बोलते हुए कहा कि मुझ पर केस करो, बच्चों को मत डराओ... और उन्होंने नरेंद्र मोदी सरकार...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः हाल के हफ्तों में भारतीय राजनीति में एक नया.. और गंभीर विवाद उभरकर सामने आया है.. यह विवाद केवल सत्ता और विपक्ष के बीच की तकरार नहीं.. बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और डिजिटल सेंसरशिप जैसे बड़े सवालों को भी केंद्र में ले आया है.. आपको बता दें कि मुद्दा यह है कि कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार उनके द्वारा बनाए गए.. AI-आधारित वीडियो को जबरन डिलीट करवा रही है.. कांग्रेस की सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत ने दावा किया है कि.. पिछले छह हफ्तों में पार्टी के नौ AI वीडियो हटवाए गए हैं.. जबकि हर वीडियो में स्पष्ट रूप से AI Generated लिखा हुआ था.. ये वीडियो राजनीतिक व्यंग्य के रूप में बनाए गए थे.. जिनमें मोदी सरकार पर राष्ट्रीय हितों की अनदेखी.. अमेरिका के दबाव में फैसले लेने.. और संसद से अनुपस्थित रहने जैसे आरोप लगाए गए थे.. बता दें कि श्रीनेत ने दावा करते हुए कहा कि सरकार इन वीडियो से इतनी घबरा गई है कि.. पुलिस के जरिए उनकी टीम के युवा सदस्यों को कथित तौर पर धमकाया जा रहा है..
कांग्रेस का दावा है कि ये वीडियो सच्चाई पर आधारित थे.. और इनमें कोई झूठ या गलत जानकारी नहीं थी.. ये मुद्दे संसद में भी उठाए गए हैं.. और विपक्ष द्वारा लगातार पूछे जा रहे हैं.. लेकिन सरकार ने इन वीडियो को हटाने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया.. न ही कोई सार्वजनिक आदेश जारी किया.. इससे पारदर्शिता की कमी का सवाल उठता है.. सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मोदी जी AI की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं.. लेकिन असल में इससे डरते हैं.. उन्होंने चुनौती दी कि सरकार बताए कि इन वीडियो में क्या गैरकानूनी था.. इस विवाद ने AI के राजनीतिक इस्तेमाल, सेंसरशिप.. और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर बहस छेड़ दी है..
जानकारी के मुताबिक कांग्रेस ने पिछले कुछ महीनों में AI तकनीक का इस्तेमाल करके कई व्यंग्यात्मक वीडियो बनाए.. जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे यूट्यूब, फेसबुक, इंस्टाग्राम.. और एक्स पर पोस्ट किए गए.. इन वीडियो में मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए थे.. एक वीडियो में दिखाया गया कि कैसे मोदी ने जनरल एमएम नरवणे को चीन सीमा विवाद में जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते हुए कहा कि जो उचित समझो, वही करो.. दूसरे वीडियो में अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर राष्ट्रीय हितों की अनदेखी का जिक्र था.. सभी वीडियो में पूरे समय AI Generated Video का डिस्क्लेमर दिखाया गया था.. ताकि कोई इसे असली न समझे..
सुप्रिया श्रीनेत के मुताबिक, पिछले छह हफ्तों में इनमें से नौ वीडियो को जबरन हटाया गया.. डिलीशन ऑर्डर भाजपा-शासित राज्यों बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश.. और महाराष्ट्र की पुलिस से आए.. साथ ही केंद्र के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय से भी आए.. जिसको लेकर कांग्रेस का कहना है कि यह आईटी रूल्स 2021 का गलत इस्तेमाल है.. जो राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए किया जा रहा है.. कोई कारण नहीं बताया गया.. और न ही कोई पारदर्शिता बरती गई.. जिससे अदालत में चुनौती देना मुश्किल हो रहा है..
सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.. लेकिन सूत्रों का कहना है कि ये वीडियो भ्रामक थे.. और राजनीतिक अशांति फैला सकते थे.. हालांकि, कांग्रेस ने जोर देकर कहा कि ये वीडियो संसद में उठाए जा रहे मुद्दों जैसे किसान हित, विदेश नीति और सैन्य फैसलों पर आधारित थे.. AI के इस्तेमाल से ये वीडियो अधिक आकर्षक और व्यंग्यात्मक बने.. लेकिन सरकार को ये पसंद नहीं आए.. इसने राजनीति में AI के इस्तेमाल पर नई बहस शुरू कर दी है.. जहां एक तरफ नवाचार है.. तो दूसरी तरफ सेंसरशिप का डर है..
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मोदी AI पर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं.. जैसे AI समिट में भारत को AI हब बनाने की बात.. लेकिन असल में इससे डरते हैं.. हाल ही में दिल्ली में AI इम्पैक्ट समिट हुआ.. जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने AI को भारत की प्रगति का इंजन बताया.. लेकिन कांग्रेस का आरोप है कि सरकार AI कंटेंट को सेंसर कर रही है.. खासकर जब वह व्यंग्य के रूप में सरकार से सवाल पूछता है..
कांग्रेस ने कहा कि ये वीडियो सच का नाट्य रूपांतरण थे.. यानी सच्चाई को नाटकीय रूप में प्रस्तुत किया गया था.. भाजपा और मोदी इनसे डरते हैं.. क्योंकि ये जनता तक आसानी से पहुंच जाते हैं.. एक उदाहरण 2024 में बॉलीवुड सितारों के डीपफेक वीडियो का है.. जिन्हें चुनाव के दौरान इस्तेमाल किया गया.. और बाद में हटाया गया.. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे वीडियो चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं.. इसलिए सरकार सख्ती बरत रही है.. लेकिन कांग्रेस का कहना है कि जब स्पष्ट डिस्क्लेमर मौजूद हो.. तो आपत्ति नहीं होनी चाहिए..
जानकारी के अनुसार एक वीडियो में दिखाया गया कि 2020 में लद्दाख में चीन के साथ टकराव के दौरान.. मोदी ने आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे से कहा कि जो उचित समझो, वही करो.. यह आरोप जनरल नरवणे के अप्रकाशित मेमॉयर ‘Four Stars of Destiny’ से लिया गया है.. मेमॉयर में लिखा है कि अगस्त 2020 में जब चीनी टैंक आगे बढ़ रहे थे.. तब नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को फोन किया.. सिंह ने मोदी से बात कर संदेश दिया कि सेना जो ठीक समझे, वही करे..
राहुल गांधी ने संसद में इस अंश को पढ़ने की कोशिश की.. लेकिन भाजपा ने विरोध किया.. राहुल गांधी ने कहा कि यह मोदी की जिम्मेदारी से बचने का सबूत है.. सरकार ने किताब को अप्रकाशित बताकर खारिज किया.. लेकिन नरवणे ने प्रकाशक का बयान साझा कर इसकी पुष्टि की.. बीबीसी की रिपोर्ट में भी जिक्र है कि फैसला सेना पर छोड़ दिया गया था.. जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से गंभीर सवाल उठाता है..
वहीं यह मुद्दा 2020 के गलवान घाटी संघर्ष से जुड़ा है.. जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे.. जिसको लेकर विपक्ष का कहना है कि मोदी ने कोई नहीं आया कहकर भ्रामक बयान दिया.. जबकि नरवणे की किताब से संकेत मिलता है कि सरकार ने स्पष्ट राजनीतिक निर्णय नहीं लिया.. यह वीडियो इसी पहलू को उजागर करता था..
एक अन्य वीडियो में आरोप लगाया गया कि मोदी ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारत के हितों की अनदेखी की.. हाल ही में फाइनल हुए भारत–अमेरिका व्यापार समझौते में भारत द्वारा रूसी तेल खरीद में कमी.. और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ घटाने की बात सामने आई.. ट्रंप ने दावा किया कि भारत 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदेगा..
कांग्रेस ने इसे सरेंडर बताया और कहा कि मोदी ने दबाव में यह निर्णय लिया.. रूस से सस्ता तेल बंद होने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो सकती है.. भारत पहले रूस से लगभग 40 फीसदी तेल आयात करता था.. जो घटकर करीब 25 फीसदी रह गया.. क्रेमलिन ने कहा कि भारत ने ऐसा कोई औपचारिक वादा नहीं किया.. लेकिन ट्रंप के एक्जीक्यूटिव ऑर्डर में दबाव का संकेत मिलता है..
आपको बता दें कि यह डील ट्रंप के Make America Great Again एजेंडे से जुड़ी बताई जा रही है.. जिसके तहत भारत को अमेरिकी कृषि उत्पाद सोयाबीन और कॉर्न आयात करने होंगे.. जिसके लेकर भारतीय किसान संगठनों ने यह कहते हुए विरोध जताया है.. कि अमेरिकी सब्सिडी वाले उत्पाद स्थानीय बाजार को नुकसान पहुंचा सकते हैं.. एक भारतीय किसान को सालाना लगभग 155 डॉलर का समर्थन मिलता है.. जबकि अमेरिकी किसानों को इससे कहीं अधिक सहायता मिलती है..



