जमीन अधिग्रहण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, 2018 से पहले के केस बंद रहेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा है कि NHAI एक्ट के तहत 2018 से पहले के भूमि अधिग्रहण मामलों को ब्याज सहित मुआवजे के लिए फिर से नहीं खोला जाएगा.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा है कि NHAI एक्ट के तहत 2018 से पहले के भूमि अधिग्रहण मामलों को ब्याज सहित मुआवजे के लिए फिर से नहीं खोला जाएगा.

यह टिप्पणी NHAI की उस याचिका पर आई है, जिसमें 2019 के फैसले की समीक्षा की मांग की गई थी, जिसने किसानों को पिछली तारीख से मुआवजा देने का निर्देश दिया था, जिससे NHAI पर 32,000 करोड़ रुपए का वित्तीय बोझ पड़ा था.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मौखिक रूप से कहा कि NHAI एक्ट के तहत जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, उन्हें ब्याज सहित मुआवजा देने के लिए 2018 से पहले के जमीन अधिग्रहण के मामलों को फिर से नहीं खोला जा सकता.

2019 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि NHAI एक्ट के तहत जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी, उन्हें ब्याज सहित मुआवजा देने का फैसला पिछली तारीख से लागू होगा. यह मामला चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की स्पेशल बेंच के सामने आया.

बेंच ने यह टिप्पणी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की उस याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई शुरू करते हुए की, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले पर रिव्यू की मांग की गई थी. NHAI की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बेंच के सामने दलील दी कि 2019 के फैसले ने बहुत बड़ा वित्तीय बोझ (लगभग 32,000 करोड़ रुपये) डाला है और इसे केवल आगे से ही लागू होना चाहिए.

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ऐसे फायदों से इनकार करना संविधान के आर्टिकल 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है.

किसानों के मुआवजे पर SC की अहम टिप्पणी

आज, मेहता ने कहा, “शायद आपके लॉर्डशिप को इस बात पर तवज्जो दी गई कि यह 100 करोड़ रुपये था,” और कहा कि एक और फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निपटाए गए किसी भी केस को फिर से नहीं खोला जाएगा.

CJI ने कहा, “कट-ऑफ डेट 2008 की लगती है, बशर्ते उस समय क्लेम जिंदा हों. साल 2018 से पहले के मामले को फिर से नहीं खोला जा सकता है. जो मामले 2008 में लंबित थे, वे चलते रहेंगे. अगर 2020 की शुरुआत में किसी ने यह कहते हुए आवेदन फाइल की कि वे 2008 के आधार पर पैरिटी के हकदार हैं, तो हम सॉलिटियम के लिए हां कह सकते हैं लेकिन ब्याज के लिए नहीं, जैसा कि जमीन अधिग्रहण के मामलों में होता है.”

2018 से पहले के दावे फिर से नहीं खुलेंगे

बेंच ने पार्टियों से कहा कि अगर कोई हो तो वे लिखित सबमिशन फाइल करें, और रिव्यू अर्जी को दो हफ्ते बाद सुनवाई के लिए लिस्ट कर दिया. 4 नवंबर 2025 को, CJI की अगुवाई वाली बेंच NHAI की उस अर्जी पर ओपन कोर्ट में सुनवाई करने के लिए सहमत हो गई, जिसमें उसके फैसले के रिव्यू की मांग की गई थी.

नवंबर 2025 में, सॉलिसिटर जनरल ने बेंच के सामने कहा कि इस मामले का असर लगभग 32,000 करोड़ रुपए होगा, न कि 100 करोड़ रुपए जैसा कि पिटीशन में पहले कहा गया था.

4 फरवरी, 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने NHAI की अर्जी खारिज करते हुए फैसला सुनाया कि NHAI एक्ट के तहत जिन किसानों की ज़मीन एक्वायर की गई थी, उन्हें मुआवज़ा और ब्याज देने की इजाजत देने वाला उसका 2019 का फैसला पिछली तारीख से लागू होगा.

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