बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर IT रेड दूसरे दिन भी जारी, क्रसर एसोसिएशन अध्यक्ष के घर भी छापे

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग (IT) की छापेमारी जारी है. रेड को 24 घंटे से ज्यादा का वक्त हो चुका है. लखनऊ स्थित उमाशंकर सिंह के आवास से इनकम टैक्स की टीम बुधवार रात 10:30 बजे निकली, लेकिन विपुल खंड स्थित ऑफिस में अभी भी इनकम टैक्स की टीम मौजूद है.
बलिया स्थित उनके SKY होटल, प्लांट और आवास के अलावा एक अन्य ठिकाने पर इनकम टैक्स की रेड जारी है. सोनभद्र और वाराणसी में भी इनकम टैक्स की टीमें मौजूद हैं. आयकर विभाग की टीम ने कई दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस को जब्त किया है. विधायक उमाशंकर सिंह, उनके भाई, करीबी और बिज़नेस पार्टनर्स मिलाकर कुल तीस ठिकानों पर इनकम टैक्स की रेड बुधवार सुबह पड़ी थी. आयकर विभाग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.
क्रसर ऑनर्स एसोशिएसन के अध्यक्ष के ठिकानों पर भी रेड
आयकर विभाग की टीम क्रसर ऑनर्स एसोशिएसन के अध्यक्ष अजय सिंह , चंद्रभूषण गुप्ता,देवेंद्र केसरी समेत कई ठिकानों पर भी जांच कर रही है. विभाग के अधिकारी मेसर्स छात्र शक्ति के क्रसर प्लांट और ऑफिस की जांच कर रहे हैं. सूत्रों की मानें तो आयकर अधिकारियों को कई अहम दस्तावेज मिले हैं.
उमाशंकर सिंह पहली बार बसपा के टिकट पर 2012 में रसड़ा विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए थे. उन्होंने 2017 और 2022 में भी बसपा के टिकट पर विजय दर्ज किया. इस बीच, बसपा विधायक के रिश्तेदार तथा बीजेपी नेता और प्रदेश की सरकार में मंत्री दिनेश सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए इस छापेमारी का विरोध किया है.
मंत्री ने और क्या लिखा?
मंत्री ने एक्स पर पोस्ट किया, आयकर विभाग बलिया जिले के रसड़ा से विधायक उमाशंकर सिंह के घर पर छापेमारी कर रहा है, जिनके परिवार में हमारी रिश्तेदारी है. उन्होंने कहा कि राज्य और देश के नेताओं के साथ-साथ आयकर विभाग एवं सभी अधिकारियों को इस बात की जानकारी है कि विधायक पिछले दो वर्षों से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं.
11 महीने पहले चर्चा में आए थे उमाशंकर
उमाशंकर सिंह 11 महीने पहले आय से अधिक संपत्ति के मामले में चर्चा में आए थे. उनके खिलाफ विजिलेंस ने जांच शुरू की थी. विजिलेंस ने उनके साथ ही उनकी पत्नी पुष्पा, बेटे युकेश और बेटी यामिनी के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों का ब्योरा जुटाना शुरू किया था. इसमें जमीन, मकान, फ्लैट, व्यावसायिक और कृषि संपत्तियां शामिल थीं. जांच के तहत विजिलेंस ने आईजी प्रयागराज को लेटर लिखकर संपत्तियों की डिलेट मांगी थी. इसके बाद आईजी ने संबंधित विभागों को जानकारी देने के निर्देश दिए थे. वाराणसी के उप-निबंधन कार्यालयों से भी रिकॉर्ड जुटाया गया था.



