गुजरात में नकली पनीर फैक्ट्री का पर्दाफाश | 1400 किलो पनीर जब्त | जिम्मेदार मौन?

गुजरात में नकली पनीर बनाने वाली एक फैक्ट्री का बड़ा खुलासा हुआ है... छापेमारी के दौरान करीब 1400 किलो नकली पनीर बरामद किया गया...

4पीएम गुजरातः गुजरात के व्यस्त शहर सूरत में एक ऐसी घटना सामने आई है.. जो लोगों के स्वास्थ्य को सीधे निशाना बना रही है.. होली के त्योहार के मद्देनजर.. स्थानीय पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने पांडेसरा इलाके की भीड़भंजन सोसाइटी में एक अवैध फैक्ट्री पर छापा मारा.. यहां से 1401 किलो नकली पनीर जब्त किया गया.. जिसकी बाजार मूल्य करीब 3 लाख रुपये बताई जा रही है.. जानकारी के अनुसार यह पनीर पाम ऑयल, सस्ते केमिकल्स.. और दूध के पाउडर से बनाया जा रहा था.. जो न केवल धोखा है बल्कि लोगों की सेहत के लिए घातक साबित हो सकता है..

बता दें कि आरोपी महेश कुमार शर्मा नाम के व्यक्ति ने पिछले दो साल से यह अवैध कारोबार चला रहा था.. रोजाना 400 किलो से ज्यादा मिलावटी पनीर बनाकर सूरत की विभिन्न डेयरी में 220 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जाता था.. इस छापेमारी को ‘ऑपरेशन शुद्धि’ का हिस्सा बताया जा रहा है.. जो त्योहारों के दौरान मिलावट रोकने के लिए चलाया जा रहा अभियान है.. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया के दिशानिर्देशों का खुला उल्लंघन करते हुए.. यह रैकेट सूरत की डेयरी इंडस्ट्री को प्रभावित कर रहा था.. जब्त पनीर के सैंपल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेज दिए गए हैं.. और रिपोर्ट आने पर सख्त कार्रवाई का वादा किया गया है.. वहीं फैक्ट्री को सील कर दिया गया है.. जबकि 24 लाख रुपये से ज्यादा की मशीनरी जब्त हो चुकी है.. यह घटना न केवल सूरत बल्कि पूरे गुजरात के लिए एक चेतावनी है कि.. सस्ते मुनाफे के चक्कर में स्वास्थ्य का क्या हाल हो रहा है..

आपको बता दें कि इस घटना की शुरुआत एक खुफिया जानकारी से हुई.. सूरत स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस राजवीर सिंह नकुम ने बताया कि होली के मौसम में दूध.. और दूध उत्पादों में मिलावट की आशंका को देखते हुए टीम अलर्ट मोड में थी.. खबर मिली कि भीड़भंजन सोसाइटी में एक छोटी सी जगह पर बड़े पैमाने पर पनीर बनाया जा रहा है.. जो असली दूध से नहीं बल्कि सस्ते विकल्पों से तैयार हो रहा है.. 5 मार्च 2026 की शाम को सूरत म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीम के साथ SOG ने अचानक दबिश दी.. फैक्ट्री के अंदर का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए.. जगह-जगह पाम ऑयल के ड्रम बिखरे पड़े थे.. केमिकल्स की बोतलें और दूध पाउडर के बड़े-बड़े बैग मौजूद थे..

मशीनों पर चिपचिपा पदार्थ चिपका हुआ था.. जो पनीर बनाने की प्रक्रिया का सबूत था.. कुल 1401 किलो तैयार पनीर के अलावा, कच्चा माल भी जब्त किया गया.. पाम ऑयल के 500 लीटर से ज्यादा ड्रम, साइट्रिक एसिड जैसे केमिकल्स.. और 200 किलो दूध पाउडर बरामद हुए.. ये सामग्रियां मिलाकर बनाया गया पनीर बाहरी.. तौर पर असली जैसा दिखता था.. लेकिन अंदर से जहरीला था.. मालिक महेश शर्मा को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया.. पूछताछ में उसने कबूल किया कि वह सूरत की 10 से ज्यादा डेयरी को सप्लाई करता था.. जहां से यह पनीर होटलों, रेस्टोरेंट्स और घरों तक पहुंच जाता था.. इस रैकेट की चपेट में हजारों लोग आ सकते थे.. खासकर होली के दौरान जब पनीर की डिमांड चरम पर होती है.. SOG ने फैक्ट्री की मशीनरी को जब्त कर लिया.. जिसकी कीमत 24.44 लाख रुपये आंकी गई.. पूरा सेटअप बिना किसी लाइसेंस के चल रहा था.. जो FSSAI के नियमों का सीधा उल्लंघन है..

महेश कुमार शर्मा का नाम पहले भी फूड एडल्टरेशन के मामलों में चर्चा में रहा है.. मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले शर्मा ने दो साल पहले सूरत में बसने का फैसला किया.. सूरत की तेजी से बढ़ती डेयरी इंडस्ट्री को देखते हुए.. उन्होंने यह अवैध धंधा शुरू किया.. स्थानीय सूत्रों के अनुसार शर्मा ने शुरुआत छोटे स्तर पर की थी.. लेकिन जल्द ही सप्लाई चेन बना ली.. वह सस्ते चाइनीज केमिकल्स आयात करता था.. और पाम ऑयल को लोकल मार्केट से खरीदता था.. रोजाना का टारगेट 400 किलो रखा जाता था.. जो सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक की मेहनत से पूरा होता..

वहीं मजदूरों को कम वेतन देकर और कोई सेफ्टी प्रोटोकॉल न अपनाकर खर्च कम रखा जाता.. शर्मा का दावा था कि असली पनीर की कीमत 350-400 रुपये प्रति किलो है.. जबकि उनका मिलावटी पनीर 220 रुपये में बिक जाता था.. जिससे डेयरी मालिक खुश रहते.. लेकिन यह खुशी कीमत पर आ रही थी.. पुलिस पूछताछ में शर्मा ने बताया कि वह होली और दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान प्रोडक्शन दोगुना कर देता था.. क्योंकि डिमांड बढ़ जाती है.. अब जांच में यह भी पता चला कि शर्मा का नेटवर्क सूरत से बाहर भी फैला हुआ था.. जिसको लेकर SOG का कहना है कि अन्य राज्यों से भी लिंक हो सकते हैं.. जिसकी जांच चल रही है.. शर्मा के खिलाफ पहले से कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था.. लेकिन यह पहला बड़ा केस है.. जो उसे जेल की हवा खाने पर मजबूर कर सकता है..

नकली पनीर बनाने की प्रक्रिया सरल लेकिन घिनौनी है.. असली पनीर दूध को गर्म करके उसमें रेनेट एंजाइम या साइट्रिक एसिड डालकर कर्ड बनाया जाता है.. फिर उसे प्रेस करके पानी निकाला जाता है.. लेकिन इस फैक्ट्री में सब कुछ उल्टा था.. पाम ऑयल को गर्म किया जाता.. जिसमें साइट्रिक एसिड और अन्य स्टेबलाइजर्स मिलाए जाते.. फिर दूध पाउडर को पानी में घोलकर इस मिश्रण में डाला जाता.. केमिकल्स जैसे सोडियम बेंजोएट प्रिजर्वेटिव के तौर पर काम करते.. जो पनीर को लंबे समय तक ताजा रखते..

फिर इस चिपचिपे मिश्रण को मोल्ड्स में डालकर प्रेस किया जाता.. जिससे यह पनीर का आकार ले लेता.. बाहरी दिखावट के लिए नमक और मसाले मिलाए जाते.. यह प्रक्रिया सिर्फ 4-5 घंटे लेती.. जबकि असली पनीर को 12-24 घंटे लगते है.. वहीं इसकी लागत प्रति किलो 50-60 रुपये मात्र थी.. लेकिन लोगों के स्वास्थ्य के लिए बहुत बड़ा खतरा था.. पाम ऑयल में सैचुरेटेड फैट्स ज्यादा होते हैं.. जो कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं.. सस्ते केमिकल्स में भारी धातुएं हो सकती हैं.. जो किडनी और लीवर को नुकसान पहुंचाती हैं.. FSSAI के अनुसार ऐसे उत्पादों में बैक्टीरिया का खतरा भी रहता है.. क्योंकि साफ-सफाई का ध्यान नहीं रखा जाता.. इस फैक्ट्री में फ्लोर गंदा था.. विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसा पनीर खाने से कैंसर, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं.. एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल 10 लाख से ज्यादा लोग फूड एडल्टरेशन से प्रभावित होते हैं.. और दूध उत्पादों का हिस्सा 30% है..

 

Related Articles

Back to top button