ईरानी मिसाइलों से इजरायल मिडिल ईस्ट धुआं-धुआं

- मध्य पूर्व में तीसरे विश्वयुद्ध का ट्रेलर?
- भारतीय पत्रकार ने खोली इजरायल की पोल मौत का अंकड़ा छुपा रही है सरकार
- डिकैपिटेशन स्ट्रैटेजी की तरफ बढ़ता ईरान-इजरायल-अमेरिका युद्ध
- ईरान ने 500 मिसाइल और 2 हजार ड्रोन से किया अटैक बदले में अमेरिका ने बरसाए तेहरान पर आग के गोले
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ा है। आसमान में गूंजते सायरन शहरों के ऊपर चमकती इंटरसेप्टर मिसाइलें और दूर कहीं उठते धुएं के बादल। यह सब मिलकर उस युद्ध की तस्वीर बना रहे हैं जो अब सीमित संघर्ष से आगे बढ़कर बड़े टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है। ईरान-इजरायल के बीच चल रही लड़ाई अब बड़े युद्ध में बदलती दिख रही है। इस युद्ध में अबतक मोर्चे खुल चुके हैं या यूं कहें कि खोले जा चुके हैं। और कई ताकतें अप्रत्यक्ष रूप से शामिल हो रही है। ताजा सैन्य घटनाक्रम ने इस टकराव की तीव्रता को और बढ़ा दिया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ईरान ने हालिया हमलों में सैकड़ों मिसाइल और बड़ी संख्या में ड्रोन दागे हैं जिनका निशाना इजरायली सैन्य ठिकाने सुरक्षा प्रतिष्ठान और रणनीतिक इलाके रहे। ईरान की ओर से दागी जा रही न्यू जनरेशन मिसाइल सीधे निशाने को हिट कर रही है जिससे इजरायल में अफरा—तफरी का महौल बन चुका है। चारों ओर भगदड़ की खबरें और बंकर और हमले से पहले सायरन टेक्नोलॉजी बीता कल बन चुका है।
युद्ध का अगला चरण और भी खतरनाक होगा
भारतीय रक्षा विशेषज्ञ और पूर्व सैन्य अधिकारी इस युद्ध को मल्टी-फ्रंट वॉर कह रहे हैं। उनके मुताबिक यह एक ऐसा युद्ध है जिसमें एक साथ कई मोर्चे खुलते जा हैं और क्षेत्रीय संतुलन तेजी से बदलने लगता है। लेबनान में सक्रिय हेजबुल्ल, सीरिया के सैन्य ठिकाने, खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था और समुद्री मार्ग सभी इस संघर्ष की संभावित कडिय़ां बनते दिखाई दे रहे हैं। मिडिल ईस्ट उस दिशा में तेजी से बढ़ रहा है जिसे कुछ विश्लेषक तीसरे विश्वयुद्ध का ट्रेलर कहने लगे हैं। रणनीतिक स्तर पर यह युद्ध अब डिकैपिटेशन स्ट्रैटेजी की तरफ बढ़ता दिख रहा है। यानी दुश्मन की सैन्य कमान, मिसाइल नेटवर्क और रणनीतिक क्षमता को सीधे निशाना बनाना। अगर यह रणनीति पूरी तरह लागू होती है तो इसका मतलब होगा कि युद्ध का अगला चरण और भी तीखा और खतरनाक हो सकता है। इस संघर्ष का असर सिर्फ युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है। तेल बाजार समुद्री व्यापार और वैश्विक राजनीति सभी इस तनाव से प्रभावित हो रहे हैं।
भारतीय पत्रकार की इजरायल में आंखों देखी
इजरायल से लौटे एक भारतीय पत्रकार बृजमोहन ने एक भारतीय वेबसाइट को दिये इंटरव्यू में इजरायल के भीतर युद्ध के हालात की आंखों देखी सुनाते हुए बताया है कि इजरायल में मौत का आंकड़ा छुपाया जा रहा है। हमले से पहले सायरन नहीं बज रहे हैं और बंकर जैसी बातें बस कहानियां है। जहां तहां अगर बंकर है भी तो उन बंकरों में ईरानी मिसाइले मौंत का तांडव बरपा कर रही है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि वहां फंसे भारतीय पत्रकारों को तत्काल देश वापस लाये। उनके मुताबिक वह खुशकिस्मत रहे और खजूर खाकर किसी प्रकार काम चलाया। उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से पत्रकारों को साफ संदेश है कि मौत का आंकड़ा छुपाया जाए और असली कैजुअल्टी की संख्या किसी भी कीमत पर बाहर नहीं जानी चाहिए। उन्होंने भारतीय में रिपोर्टिंग के तौर तरीकों की तुलना इजरायल से करते हुए कहा कि वहां मीडिया पर पूरी तरह से सरकार की सेंसरशिप है।
वैश्विक संकट का रूप लेता युद्ध
मिडिल ईस्ट में बढ़ती आग अब सिर्फ क्षेत्रीय समस्या नहीं रही। यह धीरे-धीरे एक वैश्विक संकट का रूप लेती दिखाई दे रही है। हालिया हमलों में ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता खुलकर सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने एक साथ बड़ी संख्या में मिसाइल और ड्रोन लॉन्च कर इजरायल की एयर डिफेंस प्रणाली को भेद दिया है। यह रणनीति सैचुरेशन अटैक कहलाती है जहां दुश्मन की रक्षा प्रणाली को एक साथ इतने लक्ष्य दिए जाते हैं कि उसे हर दिशा में प्रतिक्रिया देनी पड़ती है। इजरायल की आयरन डोम और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम फेल हो गया है।
इंडियन आयल की सफाई
इंडियन आयल समेत देश की दूसरी अन्य तेल कंपनियों ने सोशल मीडिया पर चल रही तेल की कमी की बेबुनियाद खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि भारत में पेट्रोल और डीजल की कमी नहीं है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा है कि देश में ईंधन का पर्याप्त स्टॉक है और सप्लाई सिस्टम ठीक से काम कर रहे हैं। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के ये बयान वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव के बाद ग्लोबल एनर्जी सप्लाई की चिंताओं के बीच आए हैं।




