बांग्लादेश, श्रीलंका के बाद नेपाल में पॉलिटकल रीसेट
जेनजी सरकार का उभार लेकिन प्रचंड की चुनौती बरकरार, केपी ओली समेत तमाम पुराने नेता धराशाई, नई सियासी अंगड़ाई

जेन-ज़ी का उभार, पुराने किले ढहे-क्या भारत के सामने नई चुनौती?
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। रक्तहीन क्रांति के बाद हुए नेपाल में आम चुनाव के नतीजे आ रहे हैं। बंग्लादेश के बाद नेपाल में भी सत्ता का बदलाव साफ दिखाई दे रहा है। जिस प्रकार से बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी सरकार बनाती दिखाई दे रही है। पूर्व पीएम केपी ओली समेत तमाम बड़े नेता चुनाव हार चुके हैं वहीं प्रचंड की जीत नेपाल में सियासी तापमान को बढ़़ा सकती है।
दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया भूचाल आकार ले रहा है। सत्ता के पुराने स्तंभ दरक रहे हैं और उनकी जगह नई पीढ़ी की राजनीति तेजी से उभर रही है। नेपाल में हुए आम चुनावों के नतीजे इसी बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। रक्तहीन क्रांति के बाद हुए इस चुनाव में पारंपरिक दलों की पकड़ ढीली पड़ती दिखाई दे रही है जबकि काठमांडू के युवा मेयर से राष्ट्रीय नेता बने बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी तेजी से आगे बढ़ती दिख रही है।
भारत के लिए महत्तवपूर्ण
इन घटनाओं को जोडक़र देखें तो एक बड़ा ट्रेंड साफ दिखाई देता है कि दक्षिण एशिया में सत्ता के खिलाफ नई पीढ़ी का उभार तेजी से हुआ है। और इसी कारण नेपाल का यह चुनाव भारत के लिए भी महत्वपूर्ण बन जाता है। जब पुरानी राजनीति की दीवारें ढह रही है। नेपाल की राजनीति लंबे समय से कुछ सीमित चेहरों के इर्द ही गिर्द घूमती रही है। केपी ओली और प्रचंड नेपाली कांग्रेस के नेता इन नेताओं ने दशकों तक सत्ता और विपक्ष की राजनीति को नियंत्रित किया। लेकिन इस चुनाव ने यह संकेत दे दिया है कि जनता अब नई राजनीति चाहती है। युवा मतदाताओं ने बड़े पैमाने पर पारंपरिक दलों से दूरी बनाई। इसका फायदा सीधे तौर पर नई राजनीतिक ताकतों को मिला।

सिर्फ नेपाल का चुनाव नहीं
यह सिर्फ नेपाल का चुनाव नहीं है। यह दक्षिण एशिया की उस बदलती राजनीति का हिस्सा है जहां जनता खासकर युवा मतदाता दशकों से सत्ता में जमे नेताओं को चुनौती दे रहे हैं। चुनावी तस्वीर साफ संकेत दे रही है कि पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली जैसे पुराने दिग्गजों का प्रभाव कमजोर पड़ रहा है। कई बड़े नेता चुनावी मैदान में धराशायी हो चुके हैं। लेकिन कहानी इतनी सरल भी नहीं है। नेपाल की राजनीति में एक और बड़ा नाम पुष्प कमल दहल अब भी निर्णायक बना हुआ है। जिन्हें दुनिया प्रचंड के नाम से जानती है। उनकी जीत यह दिखाती है कि पुराने राजनीतिक खिलाड़ी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। बल्कि वे नई राजनीतिक ताकतों के सामने अब भी चुनौती बनकर खड़े हैं।
कई देशों में हो चुका है सत्ता परिवर्तन
नेपाल की यह सियासी करवट अकेली नहीं है। हाल के वर्षों में दक्षिण एशिया के कई देशों में सत्ता के खिलाफ जनता का असंतोष खुलकर सामने आया है। बालेन शाह में लंबे समय से चल रही सत्ता के खिलाफ छात्र आंदोलनों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। श्रीलंका में आर्थिक संकट ने जनता को सडक़ों पर ला दिया और सत्ता परिवर्तन का रास्ता बना। वहीं पाकिस्तान में भी सत्ता और जनता के बीच टकराव लगातार बढ़ता रहा है।
बालेन शाह का उदय
काठमांडू के मेयर के रूप में लोकप्रियता हासिल करने वाले बालेन शाह ने खुद को एंटी एस्टैब्लिशमेंट चेहरे के रूप में पेश किया। उनकी राजनीति के कुछ प्रमुख बिंदु भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख, पारंपरिक दलों से दूरी और युवा नेतृत्व की बात। यही कारण है कि उनकी पार्टी को तेजी से समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है। नेपाल में पहली बार ऐसा लग रहा है कि राजनीति का केंद्र पुराने दलों से हटकर नई पीढ़ी की ओर शिफ्ट हो सकता है।
प्रचंड की मौजूदगी
हालांकि नई राजनीति के इस उभार के बीच प्रचंड की जीत यह संकेत देती है कि नेपाल का राजनीतिक संक्रमण अभी अधूरा है। प्रचंड का आधार अब भी मजबूत है खासकर उन क्षेत्रों में जहां माओवादी आंदोलन का प्रभाव रहा है। यानी नेपाल की राजनीति अब दो ध्रुवों के बीच खड़ी दिखाई देती है एक तरफ नई पीढ़ी की राजनीति दूसरी तरफ पुराने राजनीतिक ढांचे का प्रभाव।
जदयू की कमान अगली पीढ़ी को सौंपने की तैयारी
नीतीश कुमार के बेटे निशांत कल जदयू में होंगे शामिल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
पटना। बिहार की सियासत में पिछले दो दशकों से अजेय रहे नीतीश कुमार ने अब अपनी विरासत की कमान अगली पीढ़ी को सौंपने का मन बना लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार कल यानी रविवार (8 मार्च) को औपचारिक रूप से जनता दल (यूनाइटेड) में शामिल होंगे। इसके साथ ही चर्चा यह भी है कि उन्हें राज्य की नई सरकार में उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी जा सकती है।जेडी(यू) के वर्कर्स और लीडर्स लगातार मांग कर रहे हैं कि निशांत को पॉलिटिक्स में आना चाहिए।
यह मांग शुक्रवार की मीटिंग के दौरान एक बार फिर उठाई गई, जिसमें पार्टी लीडर्स ने कहा कि निशांत अपने पिता की जगह लेने के लिए सबसे अच्छे चॉइस होंगे। खास बात यह है कि मीटिंग के दौरान, नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि राज्यसभा मेंबर बनने के बाद भी वह पार्टी पर नजर रखेंगे। नीतीश के अपर हाउस जाने के साथ, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का बिहार में पहली बार अपना मुख्यमंत्री बनना तय है। साथ ही, शुक्रवार को सूत्रों ने बताया कि निशांत को राज्य में डिप्टी मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। यह भी मांग की जा रही है कि नीतीश को जेडीयू चीफ बनाया जाए, क्योंकि उनके आने से पार्टी में फूट से बचा जा सकता है। जेडीयू के टॉप पोस्ट के लिए कुछ और नामों पर भी बात हो रही है, जिनमें यूनियन मिनिस्टर ललन सिंह, बिहार के मिनिस्टर अशोक चौधरी और विजय चौधरी, और संजय कुमार झा शामिल हैं।
बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार अब राज्यसभा जाएंगे। गुरुवार को उन्होंने कहा कि उनके पॉलिटिकल करियर की शुरुआत से ही उनकी इच्छा थी कि वे पार्लियामेंट के दोनों हाउस और बिहार लेजिस्लेचर के दोनों हाउस के मेंबर बनें। लेकिन उन्होंने कहा है कि वे बिहार में अगली सरकार को अपना पूरा सपोर्ट और सहयोग देंगे।
बिहार से मेरा रिश्ता भविष्य में भी बना रहेगा : नीतीश कुमार
उन्होंने हिंदी में एक्स पर पोस्ट किया, दो दशक से ज़्यादा समय से, आपने लगातार मुझ पर अपना भरोसा और सपोर्ट दिखाया है, और इसी भरोसे के दम पर हमने बिहार और आप सभी की पूरी लगन से सेवा की है। यह आपके भरोसे और सपोर्ट की ताकत थी जिसने आज बिहार को विकास और सम्मान का एक नया आयाम दिया है। उन्होंने कहा, मैं आपको पूरी ईमानदारी से भरोसा दिलाना चाहता हूं कि आपके साथ मेरा रिश्ता भविष्य में भी बना रहेगा और एक विकसित बिहार बनाने के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का मेरा इरादा पक्का रहेगा। जो नई सरकार बनेगी, उसे मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।
बिहार में राष्ट्रपति शासन और सीमांचल को केंद्र शासित प्रदेश बनाने की तैयारी : पप्पू यादव
पूर्णिया सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने बिहार की राजनीति में एक नया राजनीतिक मुद्दा खड़ा कर दिया है। उन्होंने दावा किया है कि आने वाले समय में बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है और इसके बाद सीमांचल क्षेत्र तथा पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर एक नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पर काम हो रहा है। सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि पहले पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू करने की रणनीति बनाई जा सकती है। इसके बाद बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर सीमांचल इलाके के साथ पश्चिम बंगाल के कुछ जिलों को जोडक़र एक नया प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसी बड़ी रणनीति के तहत बिहार में सत्ता परिवर्तन और प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाएं भी चल रही हैं। पप्पू यादव की पोस्ट के अनुसार सीमांचल और मालदा, मुर्शिदाबाद, रायगंज दिनाजपुर आदि जिलों को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने का खेल बीजेपी करने वाली है। नीतीश जी को हटाने और लेफ्टिनेंट जनरल राज्यपाल लाने के पीछे का यह खेल है।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य शनिवार को एक बड़े हादसे से बाल-बाल बच गए। उनके हेलीकॉप्टर में उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद तकनीकी खराबी आ गई, जिसके चलते उसमें धुआं भरने लगा। स्थिति को देखते हुए पायलट ने तुरंत अमौसी एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग कराई।
डिप्टी सीएम को सुबह करीब 11:30 बजे कौशाम्बी पहुंचना था, जहां पार्टी पदाधिकारियों और विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक प्रस्तावित थी। इसके अलावा उन्हें विभिन्न विकास परियोजनाओं का निरीक्षण भी करना था। वह ला-माटीनियर ग्राउंड से हेलीकॉप्टर से रवाना हुए थे। उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद तकनीकी खराबी के कारण हेलीकॉप्टर में धुआं फैलने लगा। पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत अमौसी एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग कराई। समय रहते हेलीकॉप्टर को उतार लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। डिप्टी सीएम पूरी तरह सुरक्षित हैं।
राजस्थान में सुबह-सुबह आया भूकंप, कोई नुकसान नहीं
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राजस्थान के सीकर जिले में शनिवार सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप के झटके खाटूश्यामजी सहित सीकर के कई गांवों में महसूस किए गए। भूकंप सुबह 6 बजकर 32 मिनट पर आया। भूकंप की तीव्रता रिएक्टल पैमाने पर 3.5 दर्ज किया गया।
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, सुबह 6 बजकर 32 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस हुए। इस दौरान घरों के पंखे और बर्तन गिर गए। दहशत में लोग घरों से बाहर निकल गए। काफी देर तक लोग भूकंप की डर से घरों से बाहर ही रहे। स्थानीय लोगों ने बताया कि रानोली और आस-पास के इलाकों में भी झटके महसूस किए गए। जानकारी के अनुसार, भूकंप का केंद्र सीकर रहा। भूकंप के झटके रानोली, खाटूश्यामजी, फतेहपुर और लक्ष्मणगढ़ सहित कई गांवों और कस्बों में महसूस किए गए। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद खाटूश्यामजी में भी होटल और धर्मशालाओं में रुके लोग बाहर निकल आए। हालांकि, किसी तरह के जान माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
बीजेपी स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान कर रही : केजरीवाल
दिल्ली विधानसभा में फांसी घर पर मचा घमासान, आप व भाजपा में छिड़ी बहस
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को फांसी घर मामले के सिलसिले में दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति के समक्ष पेश हुए। प्रद्युमन सिंह राजपूत की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में केजरीवाल ने विधानसभा परिसर में स्थित एक शाफ्ट को फांसी घर घोषित करने और उसे आम जनता के लिए खोलने के संबंध में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया।
विशेषाधिकार समिति में विधायक सूर्य प्रकाश खत्री, अभय कुमार वर्मा, अजय कुमार महावर, सतीश उपाध्याय, नीरज बसोया, रवि कांत, राम सिंह नेताजी और सुरेंद्र कुमार भी शामिल हैं। यह मामला मूल रूप से दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता द्वारा उठाया गया था और इसमें दिल्ली विधानसभा परिसर के भीतर 9 अगस्त, 2022 को उद्घाटन किए गए फांसी घर की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं। इस दौरान केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली विधानसभा परिसर एक ऐतिहासिक इमारत है। यह इमारत 1912 में ब्रिटिश शासन के दौरान बनी थी, जब राजधानी कोलकाता से दिल्ली स्थानांतरित की गई थी। 2022 में, तत्कालीन अध्यक्ष राम निवास गोयल के प्रयासों से पता चला कि इस इमारत के एक कोने में फांसी का तख्ता था। वहां स्वतंत्रता सेनानियों को फांसी दी जाती थी।
उन्होंने आगे कहा कि तत्कालीन अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री रहते हुए मुझे बुलाया और कहा कि हमें इसे पर्यटकों के लिए खोल देना चाहिए ताकि लोग इससे प्रेरणा ले सकें। मैंने इसे खोला और इसका उद्घाटन किया। अब, जब से उनकी सरकार सत्ता में आई है, वे यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि यह फांसी का तख्ता नहीं, बल्कि एक टिफिन रूम था। मेरा मानना है कि स्वतंत्रता सेनानियों का इससे बड़ा अपमान और कुछ नहीं हो सकता। मुझे आज विधानसभा में बुलाया गया और मुझसे यह साबित करने को कहा गया कि यह फांसी का तख्ता था। मैंने जवाब दिया कि तत्कालीन अध्यक्ष ने गहन जांच के बाद ऐसा साबित किया था। लेकिन मैंने उनसे पूछा कि उनके पास क्या सबूत है कि यह एक टिफिन रूम था। उनके पास कोई सबूत नहीं है… जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है, दिल्ली की हालत बेहद खराब है।
केजरीवाल ने दावा किया कि दिल्ली के लोग रो रहे हैं। उन्हें फिर से आम आदमी पार्टी की सरकार याद आ रही है। दिल्ली में हर जगह कूड़ा-कचरा फैला है। प्रदूषण भयानक है। सडक़ें टूटी-फूटी हैं। मोहल्ले के क्लीनिक बंद हो रहे हैं। अस्पतालों में दवाइयां नहीं मिल रही हैं… अगर उनकी किसी कमेटी ने मुझसे पूछा होता, केजरीवाल जी, मुझे बताइए सीवर कैसे ठीक करें, सडक़ें कैसे ठीक करें। तो मुझे खुशी होती। मैं अपना अनुभव साझा करता। मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसकी सरकार सत्ता में है। मैं बस इतना चाहता हूं कि दिल्ली में सुधार हो। लेकिन वे दिल्ली चलाना ही नहीं चाहते।


