दुर्भाग्य है अब धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा है– शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का बड़ा ऐलान
धर्म की राजनीति करने वाली बीजेपी आज खुद ही अपने बनाये हुए हाल में बुरी तरह से फंस चुकी है। आलम ये है कि सरकार अब सवालों के घेरे में है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: धर्म की राजनीति करने वाली बीजेपी आज खुद ही अपने बनाये हुए हाल में बुरी तरह से फंस चुकी है। आलम ये है कि सरकार अब सवालों के घेरे में है.
फर्जी हिंदुत्व का खेल खेलने वाली योगी सरकार पूरी तरह से एक्सपोज हो चुकी है। दरअसल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बीते कुछ महीनों से लगातार चर्चा में बने हुए हैं। अब एक बार फिर उन्होंने योगी को ललकारा है। उन्होंने बड़ा ऐलान किया है जिसे लेकर प्रदेश में सियासी पारा हाई हो गया है।
योगी महकमे में भूंचाल आ गया है। वो योगी सरकार के खिलाफ लगातार हमलावर हैं और सवालों की झड़ी लगा रहे हैं। इसी बीच उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य है अब धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण घोषणा की है, जिसमें उन्होंने गौ संरक्षण के लिए ‘गौ प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ का आह्वान किया है।
शंकराचार्य के इस ऐलान के बाद से योगी सरकार पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। विपक्ष लगातार सरकार पर निशाना साध रहा है। इसी बीच सपा ने एक बार फिर यह मुद्दा उठाते हुए योगी सरकार को घेरा है। .सपा के द्वारा एक पोस्ट की गई है जिसमें लिखा गया है कि- झूठे, राजनैतिक लोभी, सत्ता के लालची, दंगाई, फसादी, भ्रष्टाचारी, दुराचारी, व्यभिचारी, अपराधी और जातिवादी मानसिकता एवं सनातन विरोधी मानसिकता वाले भाजपा नेताओं और भाजपा के खिलाफ शंकराचार्य जी को हिंदू जागरण यात्रा करनी पड़ रही है ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
भाजपा सत्ता का असली चेहरा जनता के सामने आ चुका है, सत्ता के लोभी भाजपाई कितना गिर सकते हैं, सत्ता के लोभ में किसी को भी मार सकते हैं, जेल में डाल सकते हैं ये देखना बेहद शर्मनाक है। शंकराचार्य जी सर्वोच्च सनातन के धर्माधिकारी हैं, इनके खिलाफ इस भाजपा सत्ता ने क्या क्या कुकर्म किये हैं ये भी बहुत शर्मनाक था।
शंकराचार्य ने यह घोषणा उत्तर प्रदेश में गौ-हत्या और गौ-संरक्षण के मुद्दे पर सरकार की कथित निष्क्रियता के खिलाफ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अब धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा है, क्योंकि सरकार ने उनके द्वारा दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। यह अल्टीमेटम जनवरी 2026 में प्रयागराज के माघ मेला में शुरू हुए विवादों की पृष्ठभूमि में दिया गया था, जहां प्रशासन ने उनकी शंकराचार्य की उपाधि पर सवाल उठाए और उनकी पारंपरिक शोभायात्रा को रोका गया, जिसके कारण उन्होंने भूख हड़ताल की। इस घटना ने स्वामी और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच तनाव को बढ़ा दिया, और अब यह गौ संरक्षण के मुद्दे पर केंद्रित हो गया है।
इस धर्मयुद्ध की शुरुआत 7 मार्च 2026 को वाराणसी से हुई, जहां स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गौ-माता की पूजा के साथ यात्रा का प्रारंभ किया। यह यात्रा लखनऊ तक जाएगी और 11 मार्च को शीतला अष्टमी पर समाप्त होगी। यात्रा के दौरान सुल्तानपुर, रायबरेली, नैमिषारण्य और उन्नाव जैसे जिलों में सार्वजनिक सभाएं आयोजित की जाएंगी।
स्वामी ने स्पष्ट किया कि यह धर्मयुद्ध पूरी तरह अहिंसक और वैचारिक होगा, जिसमें हथियार के रूप में शास्त्र और संवाद का उपयोग किया जाएगा, न कि हिंसा का। उनका उद्देश्य सरकार को उसके नैतिक और संवैधानिक दायित्वों की याद दिलाना है, विशेष रूप से गौ-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गौ को ‘राज्य माता’ घोषित करने के संबंध में। उन्होंने कहा कि हर हिंदू गौ की रक्षा करना चाहता है और गौ-हत्या बंद होनी चाहिए, तथा सभी को इस अभियान में शामिल होने का निमंत्रण दिया। इस यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं, और सोशल मीडिया पर वीडियो और तस्वीरें साझा की जा रही हैं, जिसकी वजह से बीजेपी के आला नेताओं की टेंशन भी बढ़ गई है।
इस घोषणा की पृष्ठभूमि में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच बढ़ता विवाद है। योगी आदित्यनाथ भाजपा के प्रमुख नेता हैं और हिंदुत्व के प्रबल समर्थक माने जाते हैं, लेकिन स्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य में गौ-हत्या अभी भी जारी है और बीफ निर्यात पर कोई प्रभावी रोक नहीं लगी है। उन्होंने कहा कि यदि अगले 9-10 दिनों में कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो जिम्मेदारी योगी आदित्यनाथ, राज्य सरकार और राजनीतिक दलों पर होगी।
विपक्षी दल जैसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने इस अभियान का समर्थन किया है, जो राजनीतिक रंग देता है। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने स्वामी का स्वागत किया और कहा कि उत्तर प्रदेश में गौ संरक्षण पहले से ही हो रहा है, तथा गौ को ‘राज्य माता’ घोषित करने की आवश्यकता नहीं क्योंकि यह सभी हिंदुओं के लिए स्पष्ट है कि गौ माता है। उन्होंने दावा किया कि सरकार पूरी क्षमता से गौ रक्षा कर रही है। यह प्रतिक्रिया दर्शाती है कि सरकार इस मुद्दे पर अपनी स्थिति मजबूत मानती है, लेकिन स्वामी की आलोचना जारी है।
यह धर्मयुद्ध उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया मोड़ ला सकता है, क्योंकि गौ संरक्षण हिंदुत्व का केंद्रीय मुद्दा है और भाजपा इसे अपनी पहचान से जोड़ती है। हालांकि, स्वामी की आलोचना दर्शाती है कि कार्यान्वयन में कमी हो सकती है। विपक्ष इसे सरकार के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है, जबकि सरकार इसे सामान्य मान रही है।
कुल मिलाकर, यह घोषणा धार्मिक नेताओं और राजनीतिक शक्ति के बीच टकराव को उजागर करती है, जहां दोनों पक्ष हिंदू भावनाओं का दावा करते हैं। भविष्य में इस यात्रा के परिणाम देखने योग्य होंगे, क्योंकि यह लोकसभा चुनावों से पहले की स्थिति में महत्वपूर्ण हो सकती है।


