Iran के रडार पर Trump? America को बड़ी चुनौती!

मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है...हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और ईरान लगातार अमेरिका और इजराइल को निशाना बना रहा है...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक मोड़ लेता दिखाई दे रहा है…हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं और ईरान लगातार अमेरिका और इजराइल को निशाना बना रहा है…

कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि…क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है…इजराइल को भी ईरानी हमलों से बड़ा झटका लगा है…इसी बीच ईरान की तरफ से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कड़ी चेतावनी दी गई है…तेहरान का कहना है कि ट्रंप को खामेनेई की हत्या की कीमत चुकानी होगी…जिसके बाद सवाल उठा कि…क्या खामेनेई की मौत के बाद अब ईरान के रडार पर आए अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप?

मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब और ज्यादा तीखा होता दिखाई दे रहा है…हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि बयानबाज़ी अब सीधे धमकियों तक पहुंच गई है…ईरान की ओर से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ बेहद कड़ा रुख अपनाया गया है…तेहरान ने साफ शब्दों में कहा है कि ट्रंप को उनके फैसलों की कीमत चुकानी ही पड़ेगी और उन्हें किसी भी हाल में माफ नहीं किया जाएगा…

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के वरिष्ठ नेता अली लारीजानी ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं…उनका कहना है कि अमेरिकी नेतृत्व के फैसलों की वजह से ईरान के कई अहम नेताओं की जान गई है…लारीजानी ने सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि…हम अपने लीडर और अपने लोगों के खून का बदला लगातार लेंगे…ट्रंप इसकी कीमत चुकानी होगी और चुकाएंगे…

अली लारीजानी के मुताबिक, ये सिर्फ राजनीतिक मतभेद का मामला नहीं है…बल्कि ईरान के लिए ये सम्मान और अस्तित्व से जुड़ा सवाल बन चुका है…लारीजानी ने अपने बयान में कहा कि जिन लोगों ने ईरान के नेताओं और नागरिकों की जान ली है…उन्हें इसके परिणाम भुगतने ही होंगे…उन्होंने साफ किया कि जब तक ईरान अपने लोगों के खून का बदला नहीं ले लेता…तब तक ये मामला खत्म नहीं माना जाएगा…उनके शब्दों में ये भी झलक रहा था कि तेहरान इस संघर्ष को लंबी लड़ाई के रूप में देख रहा है…

ईरान की तरफ से ये भी कहा गया है कि…अमेरिका को अब ये समझ लेना चाहिए कि उसके आक्रामक रवैये का जवाब दिया जाएगा…लारीजानी ने कहा कि जो घाव ईरान को दिया गया है…उसे भुलाना आसान नहीं है…यही कारण है कि ईरान अब किसी भी तरह की नरमी दिखाने के मूड में नहीं है…

अब तेहरान की इस चेतावनी का मतलब सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं माना जा रहा…बल्कि इसे आने वाले समय में और बड़े टकराव की भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है…ईरान ने ये भी संकेत दिया है कि अगर अमेरिका एकतरफा युद्धविराम का ऐलान भी करता है…तब भी ये जरूरी नहीं कि संघर्ष तुरंत समाप्त हो जाएगा…ईरान का कहना है कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलता, तब तक इस लड़ाई का अंत संभव नहीं है…

ईरान के नेताओं का कहना है कि उनके सर्वोच्च नेता के खिलाफ की गई कार्रवाई को वो कभी नहीं भूल सकते…यही वजह है कि ईरान ये साफ कर दिया है कि इस घटना का बदला लिया जाएगा…ईरान ने ये भी कहा है कि अमेरिका के नेता चाहे दुनिया के किसी भी हिस्से में हों…उन्हें सुरक्षित नहीं समझना चाहिए…

हालांकि, कहा ये भी जा रहा है कि ईरान के पास ऐसी लंबी दूरी की मिसाइलें नहीं हैं…जो सीधे अमेरिका की मुख्य भूमि तक पहुंच सकें…इसके बावजूद तेहरान का मानना है कि उसके पास जवाब देने के कई और तरीके हैं…इसी वजह से ईरान का कहना है कि अमेरिका को अपनी सुरक्षा को लेकर भ्रम में नहीं रहना चाहिए….

वहीं इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान के हालिया बयान पर भी चर्चा हो रही है…कुछ दिन पहले उन्होंने खाड़ी क्षेत्र के देशों पर हमले रोकने की बात कही थी…लेकिन ईरान के दूसरे नेताओं ने साफ कर दिया है कि इसका मतलब ये नहीं है कि अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाना बंद कर दिया गया है…

ईरान का कहना है कि जहां-जहां से उसके खिलाफ हमले होंगे…वहां जवाब भी दिया जाएगा…अगर किसी देश की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमला करने के लिए किया जाएगा…तो ईरान उसे भी निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा…

इस चेतावनी को मिडिल ईस्ट के कई देशों के लिए गंभीर संदेश माना जा रहा है…इसी बीच खबरें सामने आई हैं कि ईरान ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है…कमजोर नस पर वार होते ही घातक हुआ ईरान…अमेरिका की नेवी फ्लीट पर बरसाए बम, 21 सैनिक मार डाले….

ईरानी सेना ने दावा किया है कि…उसने अमेरिका की पांचवीं नेवी फ्लीट पर हमला करके उनके 21 सैनिकों को मार दिया है…जबकि कई जख्मी भी हुए हैं…ये घटना तब हुई है…जब इजरायल ने ईरान की तेल सप्लाई वाले ऑयल डिपो रात में फूंक दिए…जो अब भी सुलग रहे हैं….बताया जा रहा है कि ये हमला बहरीन की राजधानी मनामा के जुफैर इलाके में किया गया…

जहां अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय मौजूद है…ये ठिकाना अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है….ईरानी मीडिया ने इस हमले से जुड़ा एक वीडियो भी जारी किया है…जिसमें हमले के बाद आग और धुएं के गुबार दिखाई दे रहे हैं….हालांकि अमेरिका की तरफ से इस घटना पर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है….

बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना की फिफ्थ फ्लीट मिडिल ईस्ट में अमेरिका की सबसे अहम सैन्य ताकतों में से एक मानी जाती है…इस बेड़े की जिम्मेदारी पर्शियन गल्फ, रेड सी और अरब सागर जैसे विशाल समुद्री क्षेत्रों की निगरानी करना है…ये बेड़ा खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के आसपास सुरक्षा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है…ये वही समुद्री रास्ता है…

जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल का व्यापार होता है…इसलिए इस क्षेत्र की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है…आमतौर पर इस बेड़े में हजारों अमेरिकी सैनिक तैनात रहते हैं और इसमें कई युद्धपोत, पनडुब्बियां, ड्रोन और अन्य उन्नत सैन्य उपकरण शामिल होते हैं…इसके बावजूद हाल के घटनाक्रम ने ये सवाल खड़ा कर दिया है कि..क्या अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखने में सफल हो पा रहा है….

रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि इस समय स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर भी तनाव का असर दिखाई दे रहा है…कई जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं….वहीं ईरान का दावा है कि उसके पास अब भी इस क्षेत्र में काफी प्रभाव है और वो अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है…इसी दौरान अली लारीजानी ने ये भी दावा किया कि ईरान की सेना ने कुछ अमेरिकी सैनिकों को गिरफ्तार भी किया है…उनका कहना है कि ये सैनिक हालिया संघर्ष के दौरान पकड़े गए हैं….

लारीजानी का आरोप है कि अमेरिका कभी भी ये स्वीकार नहीं करेगा कि उसके सैनिक पकड़े गए हैं…उनका कहना है कि बाद में इन सैनिकों की मौत को किसी हादसे या दूसरी वजह से जोड़ दिया जाएगा…ईरान के नेताओं का मानना है कि अमेरिका इस युद्ध में बड़ी कीमत चुका रहा है…उनके मुताबिक, यही कारण है कि अब अमेरिका इस क्षेत्र के कुछ समूहों से भी मदद मांगने की कोशिश कर रहा है…

लारीजानी ने दावा किया कि अमेरिका ने इराक के कुर्द लड़ाकों से संपर्क साधा है और उन्हें ईरान के खिलाफ इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है…इसके अलावा ईरान में रहने वाले सुन्नी समुदाय के कुछ लोगों को भी भड़काने की कोशिश की जा रही है…हालांकि उनका कहना है कि अमेरिका की ये कोशिशें सफल होती नहीं दिख रही हैं…

लारीजानी के अनुसार, कुर्द समुदाय को अमेरिका के पुराने रवैये का पूरा अनुभव है….उन्होंने याद दिलाया कि सीरिया में भी अमेरिका ने शुरुआत में कुर्दों का समर्थन किया था…लेकिन बाद में उन्हें अकेला छोड़ दिया…यही वजह है कि अब कुर्द समुदाय अमेरिका पर भरोसा करने से बच रहा है….लारीजानी ने कहा कि इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिका किसी का स्थायी सहयोगी नहीं हो सकता…उसके फैसले हमेशा अपने हितों के हिसाब से बदलते रहते हैं…

इस बीच मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने अमेरिका की चिंता भी बढ़ा दी है….रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने भी ये संकेत दिया है कि…ये संघर्ष जल्दी खत्म होता नहीं दिख रहा…अमेरिका के भीतर भी इस बात को लेकर चर्चा हो रही है कि…क्या ये लड़ाई जीतना संभव है…कुछ सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना बेहद कठिन होगा…क्योंकि, ईरान का रुख लगातार सख्त होता जा रहा है और तेहरान साफ कर चुका है कि वो इस मामले को भूलने वाला नहीं है…

यानी, एक तरफ अमेरिका अपनी रणनीति पर विचार कर रहा है…तो वहीं दूसरी तरफ ईरान लगातार चेतावनी दे रहा है…फिलहाल, आने वाले दिनों में ये संघर्ष किस दिशा में जाएगा…ये कहना अभी मुश्किल है…लेकिन इतना तो जरूर साफ है कि इस टकराव का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा…बल्कि पूरी दुनिया की राजनीति और सुरक्षा पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ सकता है.

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