HC ने राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता मामले में केंद्र से मांगा रिकॉर्ड, BJP खेमे में मचा बवाल!
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं, और अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की गई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मामले खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं..इसी बीच राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता का मामला इन दिनों एक बार फिर सुर्खियों में बना हुआ है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले से जुड़े रिकॉर्ड मांगे हैं, और अगली सुनवाई 19 मार्च 2026 को तय की गई है। दरअसल यह मामला मूल रूप से एक जनहित याचिका पर आधारित है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी भारतीय नागरिक होने के साथ-साथ ब्रिटिश नागरिक भी हैं। इस तरह की दोहरी नागरिकता भारतीय कानून के तहत प्रतिबंधित है, खासकर अगर कोई व्यक्ति लोकसभा का सदस्य हो।
याचिका में दावा किया गया है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन की कंपनियों में खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था, और इससे उनकी भारतीय नागरिकता पर सवाल उठते हैं। कोर्ट ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय से सभी संबंधित दस्तावेज पेश करने को कहा है, ताकि मामले की जांच की जा सके। बता दें कि यह फैसला बीते रोज हुई सुनवाई के दौरान लिया गया, जब कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सुनने के बाद केंद्र को निर्देश दिए।
बात की जाए इस पूरे मामले की टो इसकी शुरुआत कुछ साल पहले हुई जब 2024 में एक बीजेपी कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का कहना है कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन की कंपनियों के दस्तावेजों में खुद को ब्रिटिश सिटीजन घोषित किया था, जो भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 के सेक्शन 9 का उल्लंघन है।
इस अधिनियम के अनुसार, अगर कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता खत्म हो जाती है। याचिका में कुछ पुराने दस्तावेजों का हवाला दिया गया है, जैसे कि बैकबेंचर्स लिमिटेड नाम की कंपनी के रिकॉर्ड, जहां राहुल गांधी को ब्रिटिश नागरिक बताया गया था। हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि यह राजनीतिक साजिश है।
राहुल गांधी के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी कि ऐसे आरोप बेबुनियाद हैं और पुराने दस्तावेजों में गलती हो सकती है, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं है कि उन्होंने दोहरी नागरिकता ली है।
इतना ही नहीं दोस्तों कोर्ट ने इससे पहले भी केंद्र से इस पर जवाब मांगा था, और 2024-2025 में कई सुनवाईयां हुईं, जहां गृह मंत्रालय ने कहा कि मामला जांच के अधीन है।कोर्ट की हालिया कार्रवाई में जस्टिस राजीव सिंह की बेंच ने सुनवाई की। उन्होंने याचिकाकर्ता की अपील पर विचार किया, जिसमें एक निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी। निचली अदालत ने एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था, जिसके खिलाफ अपील की गई।
हाईकोर्ट ने 90 मिनट से ज्यादा बहस सुनने के बाद अंतरिम आदेश पारित किया और गृह मंत्रालय के फॉरेनर्स डिवीजन से पूरे केस फाइल मांगे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभी आरोपों पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है, बल्कि सिर्फ रिकॉर्ड्स की जांच की जा रही है। अगली सुनवाई में केंद्र को ये दस्तावेज पेश करने होंगे, और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। अगर आरोप साबित होते हैं, तो राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता पर असर पड़ सकता है, लेकिन अगर आरोप गलत साबित होते हैं, तो यह मामला खत्म हो सकता है।
इस मामले को लेकर बात की जाए केंद्र सरकार की तो इसमें उसकी भी भूमिका यहां बेहद महत्वपूर्ण है। गृह मंत्रालय को नागरिकता से जुड़े मामलों की जांच का अधिकार है। पहले की सुनवाईयों में केंद्र ने कोर्ट को बताया था कि याचिका पर विचार चल रहा है, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। अब कोर्ट ने 19 मार्च तक रिकॉर्ड पेश करने का आदेश दिया है, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
वहीं इस मामले को लेकर कानूनी जानकारों की माने तो यह यह प्रक्रिया जरूरी है, क्योंकि नागरिकता जैसे मुद्दों पर स्पष्टता होनी चाहिए। अगर राहुल गांधी की नागरिकता पर कोई संदेह है, तो उसे दूर किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि यह भाजपा की ओर से राजनीतिक बदले की कार्रवाई है, लेकिन कोर्ट ने इसे कानूनी प्रक्रिया के रूप में देखा है।
सीधे तौर पर देखा जाए तो इस मामले का असर भारतीय राजनीति पर पड़ सकता है। राहुल गांधी कांग्रेस के प्रमुख चेहरे हैं और वे लगातार मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। अगर यह मामला आगे बढ़ता है, तो विपक्ष को मजबूत बनाने की उनकी कोशिशों पर प्रभाव पड़ सकता है। वहीं इसे कानूनी नजरिये से अगर देखें, तो हर नागरिक को निष्पक्ष जांच का अधिकार है।
गौरतलब है कि राहुल गांधी का जन्म भारत में हुआ है और वे भारतीय पासपोर्ट धारक हैं, लेकिन आरोप ब्रिटिश दस्तावेजों पर आधारित हैं। कोर्ट की कार्रवाई से साफ है कि न्यायपालिका ऐसे मामलों में सक्रिय है और राजनीतिक आरोपों को भी गंभीरता से लेती है। आने वाली सुनवाई में क्या होता है, यह देखना होगा, लेकिन फिलहाल यह प्रक्रिया चल रही है और सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।



