सूर्य नमस्कार के ये आसन सुबह सिर्फ 10 मिनट करने से मिलेंगे कई फायदे

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
सूर्य नमस्कार शरीर, मन और प्राण को संतुलित करने वाली प्राचीन विद्या है। 12 आसनों की यह श्रृंखला सुबह की धूप की तरह है जो धीरे-धीरे फैलती है, भीतर तक गर्माहट भरती है और हर हिस्से को नई ऊर्जा से जगाती है। जो लोग योग की शुरुआत करना चाहते हैं, उनके लिए सूर्य नमस्कार सबसे संपूर्ण, सबसे सरल और सबसे कारगर अभ्यास माना गया है। इस क्रम के हर आसन में श्वास और गति का ध्यान रखना होता है। यही संयोजन इसे पूर्ण व्यायाम की श्रेणी में रखता है। सूर्य नमस्कार वजन नियंत्रण और मोटापा कम करने में प्रभावी है। ये रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। पाचन, हार्मोन और मेटाबॉलिज्म में सुधार लाता है। तनाव, एंग्जायटी और नींद की समस्या कम होती है। पुरुषों में स्टैमिना और महिलाओं में हार्मोनल बैलेंस को बेहतर बनाता है। सूर्य नमस्कार के अभ्यास से पोश्चर सुधऱता है और शरीर में फ्लैक्सिबिलिटी और ताकत दोनों बढ़ती है।

भुजंगासन

इस आसन से वजन कम होता है। रीढ़ की हड्डी मजबूत और थकान कम करके शरीर को लचीला बनाता है। इसके अभ्यास से पीठ दर्द में राहत मिलती है। फेफड़ों और हृदय का विस्तार होता है। इस आसन को करने के लिए पेट के बल सीधा लेटकर पैरों के बीच थोड़ी दूरी रखें।

अधोमुख श्वनासन

यह आसन शरीर को तनावमुक्त करता है और रक्त संचार को बढ़ाता है। इससे शरीर मजबूत और लचीला बनता है। साथ ही तनाव कम करने और पाचन में सुधार करने में मदद करता है। पेट के बल लेटकर सांस खींचते हुए पैरों और हाथों के बल शरीर को उठाएं। कोहनी और घुटनों को सख्त रखते हुए हिप्स को ऊपर उठाएं और शरीर को उल्टे ङ्क का आकार दें। हाथों से जमीन पर दबाव देते हुए दृष्टि को नाभि पर केंद्रित करें। कुछ सेकेंड रुकने के बाद घुटने जमीन पर टिका दें और मेज जैसी स्थिति में फिर से वापस आ जाएं।

ताड़ासन

ताड़ासन का अभ्यास करने के लिए शरीर को सीधा रखकर हाथों को नीचे लाना होता है। इस दौरान श्वास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस आसन का अभ्यास से मानसिक शांति और संतुलन को बढ़ाने में सहायक है। हाथ को शरीर के बगल में रखकर सीधे खड़े हो जाएं। अब हाथों को सिर के ऊपर रखते हुए एडिय़ों को ऊपर उठाएं। जितना हो सके शरीर को स्ट्रेच करें। कुछ देर इसी स्थिति में रुके, फिर सांस छोड़ते हुए पुरानी स्थिति में आ जाएं।

हस्त पादासन

यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है और हैमस्ट्रिंग्स को खींचता है। इस आसन से पाचन मजबूत, कमर व जांघ की जकडऩ दूर और दिमाग पर ठंडा प्रभाव डालता है, जिसे तनाव कम होता है। सूर्य नमस्कार के तीसरे अभ्यास के लिए सांस भीतर खींचते हुए कमर को मोडक़र आगे की ओर झुकें। फिर हिप्स को ऊपर उठाते हुए हाथों को पंजे के बगल में जमीन पर रखें। सीना पैर को छूता रहे और सिर को नीचे की ओर झुकाते हुए टांगों के बीच से झांकते रहें। 10-30 सेकेंड इसी अवस्था में रुकें, फिर सांस छोड़ते हुए प्रारंभिक अवस्था में आ जाएं।

प्रणामासन

इस आसन में शरीर प्रणाम की मुद्रा में होता है। इसके लिए सीधा खड़े होकर अपने पैरों को पास रखते हुए हाथों को छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में जोडऩा चाहिए। प्रणामासन के अभ्यास से मानसिक एकाग्रता और शांति बढ़ती है। शरीर को अभ्यास के लिए तैयार करता है और संतुलन व स्थिरता बढ़ाता है। प्रणामासन के अभ्यास के लिए दोनों पंजे जोडक़र सीधे खड़े होकर छाती को फुलाएं और कंधे ढीले रखें। फिर श्वास लेते हुए दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाएं। अब श्वास छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ें और छाती के सामने प्रणाम मुद्रा में ले आएं।

पर्वतासन

यह आसन शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करता है। फेफड़ों और ब्लड सर्कुलेशन के लिए अच्छा है। हैमस्ट्रिंग और काफ मसल्स मजबूत बनाता है। इसके अभ्यास से शरीर से थकान बाहर निकलती है और रक्तसंचार सिर की ओर होता है, जिससे मस्तिष्क शांत और एकाग्रता बढ़ती है। इसके अभ्यास के लिए पैरों को सामने फैलाकर हाथों को शरीर के बगल में रखते हुए दाहिने पैर को बाईं जांघ पर रखें। बायां पैर दाईं जांघ पर रखते हुए कुछ सेकेंड गहरी सांस लें और नमस्कार की मुद्रा में हथेलियों को सिर के ऊपर ले जाएं। हिप्स को जमीन पर और हाथों को ऊपर की ओर खींचे। कुछ सेकेंड इसी मुद्रा में रहते हुए धीरे धीरे प्रारंभिक मुद्रा में आ जाएं।

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