केशुभाई पटेल के नाम पर सियासत | Gopal Italia का BJP पर तीखा हमला

गुजरात की राजनीति में एक बार फिर केशुभाई पटेल का नाम चर्चा में है... आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल इटालिया ने भाजपा पर... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात विधानसभा के सत्र में एक बार फिर सियासी तापमान चढ़ गया.. जब आम आदमी पार्टी के विधायक गोपाल इटालिया ने प्रश्नकाल के दौरान.. अनुशासन बनाए रखने के लिए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया.. उनका कहना था कि सुबह का एक घंटे का प्रश्नकाल सिर्फ सवाल-जवाब के लिए है.. इसमें कोई विधायक सरकार का धन्यवाद न करे.. आलोचना न करे, राजनीतिक टिप्पणियां न करे.. और व्यंग्य न करे.. सिर्फ साफ-सुथरा सवाल पूछे और जवाब सुने.. लेकिन इसी पॉइंट ऑफ ऑर्डर के बाद भाजपा के मंत्रियों ने गोपाल इटालिया पर व्यक्तिगत हमले शुरू कर दिए..

कृषि मंत्री जितु वाघानी और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने उन पर ब्रेक ऑफ प्रिविलेज का आरोप लगाया.. और मीडिया में दिए बयानों का जिक्र किया.. वहीं बहस इतनी गर्म हुई कि भाजपा नेताओं ने स्वर्गीय केशुभाई पटेल का नाम ले लिया.. गोपाल इटालिया ने बाद में प्रेस में कहा कि भाजपा को अपने ठपके छिपाने के लिए केशुभाई पटेल का सहारा लेना पड़ा.. और उन्होंने केशुभाई की सरकार को अच्छी सरकार माना.. यह पूरा मामला गुजरात की राजनीति में पाटीदार वोट.. किसान नेता के सम्मान और विपक्ष की रणनीति को लेकर नई बहस छेड़ गया है..

आपको बता दें कि विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई.. वहीं कार्यवाही के दौरान सामान्य तौर पर प्रश्नकाल में हर विधायक अपने क्षेत्र की समस्याएं मंत्रियों से पूछते हैं.. लेकिन कई बार यह समय राजनीतिक कटाक्ष, धन्यवाद और आलोचना में बर्बाद हो जाता है.. गोपाल इटालिया ने इसी समस्या पर ध्यान खींचा.. और उन्होंने स्पीकर शंकर चौधरी से कहा कि सभी सदस्यों को आदेश दें कि जब कोई खड़ा हो तो सिर्फ सवाल पूछे.. सरकार की तारीफ या निंदा न करे.. कोई राजनीतिक टिप्पणी न करे.. और उन्होंने किसी पार्टी की आलोचना नहीं की.. सिर्फ नियम का पालन मांगा.. स्पीकर ने कहा कि वे बाद में फैसला देंगे..

लेकिन इसके तुरंत बाद कृषि मंत्री जितु वाघानी ने गोपाल इटालिया पर पलटवार किया.. उन्होंने कहा कि इटालिया ने 10 मार्च को सदन में नहीं उठाए गए स्टार्ड प्रश्न पर मीडिया को बाइट दी.. जो ब्रेक ऑफ प्रिविलेज है.. वाघानी ने इटालिया पर जमींदार जैसा व्यवहार करने का आरोप लगाया.. गोपाल इटालिया ने इसका जवाब दिया.. उन्होंने कहा कि सदन में पूछे गए सवाल और सरकार के लिखित जवाब सार्वजनिक संपत्ति हैं.. ये नेशनल ई-विधान एप पर उपलब्ध हैं.. कोई भी देख सकता है.. बाहर मीडिया में चर्चा करने पर कोई पाबंदी नहीं हो सकती.. उन्होंने अपनी पढ़ाई का जिक्र करते हुए कहा कि मैं आठवीं पास नहीं हूं.. मैं बीए, एलएलबी और एलएलएम हूं.. मैं खुद को प्रधानमंत्री या अमेरिका का राष्ट्रपति मानूं तो वह मेरी समस्या है.. आप मुझे जमींदार क्यों कह रहे हैं..

इसी दौरान उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी बोल उठे.. उन्होंने 2017 के उस पुराने घटनाक्रम का जिक्र किया.. जब गोपाल इटालिया ने तत्कालीन गृह राज्य मंत्री प्रदीपसिंह जडेजा पर जूता फेंका था.. संघवी ने कहा कि बीए एलएलबी में कानून पढ़ लिए होंगे.. लेकिन जूता फेंकना सीखा नहीं होगा.. उन्होंने यह भी कहा कि किसी ने कम पढ़ाई की हो तो क्या हुआ.. लेकिन झूठ बोलना किसी पाठ्यक्रम में नहीं सिखाया जाता..

यहां पर बहस ने नया मोड़ लिया.. कृषि मंत्री जितु वाघानी ने केशुभाई पटेल का नाम ले लिया.. और उन्होंने कहा कि इटालिया क्लास 8 की बात कर रहे हैं.. केशुभाई पटेल ने कितनी पढ़ाई की थी.. केशुभापा के आशीर्वाद लेने कौन गया था.. उनके शिक्षा पर मीडिया में जवाब दो.. वाघानी ने एक वीडियो का जिक्र किया जिसमें गोपाल इटालिया ने केशुभाई पटेल के पैर छुए थे.. उनका इशारा था कि अगर शिक्षा की बात है तो केशुभाई जैसे लोकप्रिय नेता की शिक्षा पर भी सवाल उठाओ.. यह बयान सदन में गूंजा.. कांग्रेस के विधायकों शैलेश परमार और अमित चावड़ा ने भी वाघानी के पॉइंट ऑफ ऑर्डर का विरोध किया.. उन्होंने कहा कि सदन के जवाब मीडिया में चर्चा करना हर विधायक का अधिकार है.. स्पीकर ने फैसला रिजर्व रख लिया..

वहीं इस पूरे हंगामे के बाद गोपाल इटालिया ने बाहर प्रेस को विस्तार से बताया कि क्या हुआ.. और उन्होंने कहा कि भाजपा के नेताओं को गृह के अंदर अपने ठपके पड़े हुए मुद्दों को छिपाने के लिए केशुभाई पटेल का सहारा लेना पड़ा है.. स्वर्गीय केशुभाई पटेल, जिन्हें हम पूज्य बापा कह सकते हैं, वडील कह सकते हैं.. ऐसे केशुभाई पटेल का अपमान करके.. और उन्हें सत्ता से हटाने का पाप भाजपा के नेताओं ने किया था..

जब केशुभाई पटेल राजनीति से बाहर हो गए.. और इस दुनिया से विदा ले ली.. उसके बाद भी भाजपा ने उनके नाम से एक भी योजना शुरू नहीं की.. केशुभाई का कोई पुतला भी नहीं लगाया.. उनके नाम का उल्लेख भी बहुत कम होता है.. और भाजपा के कार्यालयों में भी उनका फोटो नहीं लगाया जाता.. ऐसे केशुभाई पटेल का सहारा आज भाजपा के नेताओं को लेना पड़ा.. केशुभाई का शरण लेना पड़ा, केशुभाई के पैर पकड़ने पड़े और केशुभाई की सरकार अच्छी सरकार थी.. यह आज गुजरात के भाजपा नेताओं को गृह के अंदर स्वीकार करना पड़ा..

इटालिया ने आगे कहा कि मुझे गर्व है कि भाजपा के नेताओं को यह बात स्वीकार करनी पड़ी.. और उस घटना का कारण मैं बना.. विधानसभा के अंदर मैंने पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया था.. आज मैं भाजपा के सभी मित्रों का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं कि केशुभाई पटेल गुजरात के अब तक के सबसे लोकप्रिय किसान नेता थे.. हैं और रहेंगे.. भाजपा के नेताओं को अभी भी थोड़ी बहुत लाज-शर्म हो.. और आज केशुभाई के नाम से यदि उन्हें शर्म आती है.. तो कम से कम गांधीनगर के कोबा स्थित भाजपा कार्यालय में केशुभाई पटेल का बड़ा पूर्णाकृति फोटो लगाया जाना चाहिए, यह मेरी मांग है..

वहीं यह बयान गुजरात की राजनीति में तूफान ला गया.. लोग पूछने लगे कि आखिर केशुभाई पटेल कौन थे.. और भाजपा का उनके साथ रिश्ता क्या है.. केशुभाई पटेल का जन्म 24 जुलाई 1928 को गुजरात के जूनागढ़ जिले के विसावदर में एक किसान परिवार में हुआ था.. वे लेवा पाटीदार समुदाय से थे.. बचपन से ही खेती-बाड़ी से जुड़े रहे.. 1940 के दशक में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े.. फिर भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्यों में शामिल हुए.. 1970 के दशक में जनता पार्टी में रहे.. और 1980 में भाजपा में शामिल हो गए.. वे गुजरात में भाजपा को जड़ से खड़ा करने वाले नेताओं में से एक थे..

 

Related Articles

Back to top button