America की बढ़ी धड़कनें! Iran का एक और प्रहार ! युद्ध खत्म करने की रखी 3 शर्तें
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का आज 13वां दिन है और हालात शांत होने के बजाय और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पश्चिम एशिया में चल रही जंग अब और भी ज्यादा खतरनाक मोड़ पर पहुंचती जा रही है…
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध का आज 13वां दिन है और हालात शांत होने के बजाय और ज्यादा गंभीर होते जा रहे हैं…मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हमलों की इस जंग में अब तेल टैंकर और ऊर्जा ठिकाने भी निशाने पर आ गए हैं…इसी बीच इराक के बसरा के पास हुए एक बड़े हमले ने इस युद्ध को और भी ज्यादा आक्रमक बना दिया है…
एक तरफ अमेरिका युद्ध खत्म करने की गुहार लगा रहा है…तो वहीं दूसरी तरफ…ईरान ने अमेरिका के सामने 3 बड़ी शर्तें रख दी है…ईरान ने साफ कह दिया है कि अगर युद्ध रुकवाना है…तो पहले इन शर्तों को मानिए नहीं तो जंग खत्म होने का सपना भूल जाइए…इसी बीच खबर निकलकर सामने आई कि…बहरीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ईरान का हमला, तेल टैंकों में लगी भीषण आग…..वहीं दूसरी हेडलाइन देखिए…जिसमें लिखा है कि…ईरानी ने बसरा के पास अमेरिकी तेल टैंकर पर किया हमला…बसरा के पास समुद्र में अमेरिकी स्वामित्व वाले कच्चे तेल के टैंकर सेफसी विष्णु पर ईरान की कथित सुसाइड बोट से हमला किया गया…ये जहाज मार्शल द्वीप समूह के झंडे के तहत चल रहा था और उस पर भारतीय चालक दल के सदस्य भी मौजूद थे…
हमले में एक भारतीय नाविक की दुखद मौत हो गई…जबकि बाकी 15 भारतीय क्रू मेंबर को सुरक्षित निकाल लिया गया…इस घटना ने ये साफ कर दिया है कि अब ये युद्ध सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा…बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार भी इसकी चपेट में आ चुका है…
बगदाद स्थित भारतीय दूतावास ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि…वो इराकी अधिकारियों और बचाए गए भारतीय नाविकों के साथ लगातार संपर्क में है…दूतावास की ओर से मेडिकल सहायता, सुरक्षित ठिकाने तक पहुंचाने और परिवारों से संपर्क कराने की व्यवस्था की जा रही है…वहीं मृत भारतीय नागरिक की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है…लेकिन परिवार को सूचना देने की प्रक्रिया जारी है…दोस्तों, ये हमला ऐसे समय में हुआ है…जब पूरे पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं…इजरायल की सेना लेबनान की राजधानी बेरूत में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर लगातार हमले कर रही है…वहीं दूसरी ओर ईरान भी इजरायल के उत्तरी इलाकों पर मिसाइल और ड्रोन से जवाबी हमला कर रहा है…इजरायली सेना के मुताबिक, ईरान की ओर से मिसाइलों की एक नई बौछार के बाद उत्तरी इजरायल के कई शहरों में सायरन बजने लगे और लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के निर्देश दिए गए…
साफ है कि इस युद्ध का असर अब सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है…बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है…तेल और गैस की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है और वैश्विक बाजारों में महंगाई का खतरा बढ़ गया है…खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है…क्योंकि, यही वो समुद्री रास्ता है…जहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई गुजरती है…इसी बीच ओमान के दक्षिणी शहर सलालाह के पोर्ट पर भी हमला हुआ है…यहां तेल स्टोरेज टैंकों को ड्रोन से निशाना बनाया गया…इस हमले के बाद ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक अल-सईद ने तुरंत ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से फोन पर बात की…माना जा रहा है कि ओमान इस संकट को शांत कराने की कोशिश में मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है…
हालांकि इन हमलों और तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी सामने आया है…ट्रंप ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात जल्द सामान्य हो जाएंगे और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा…लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए ट्रंप का ये दावा ज्यादा भरोसेमंद नहीं लगता…दरअसल, इस युद्ध के बीच पहली बार ईरान ने खुलकर बताया है कि…वो किन शर्तों पर अमेरिका और इजरायल के साथ युद्ध खत्म करने को तैयार है…
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ शब्दों में कहा है कि…युद्ध खत्म करने का सिर्फ एक रास्ता है और वो है ईरान के वैध अधिकारों को स्वीकार करना…ईरानी राष्ट्रपति ने तीन बड़ी शर्तें रखी हैं……पहली शर्त ये है कि ईरान के कानूनी और वैध अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जाए….दूसरी शर्त ये है कि युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की जाए…..और तीसरी शर्त ये है कि भविष्य में ईरान पर किसी भी हमले के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए…..
पेजेशकियन ने ये बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दिया….उन्होंने लिखा कि….रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात करते हुए, मैंने क्षेत्र में शांति के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता को दोहराया…ज़ायोनी शासन और अमेरिका द्वारा भड़काए गए इस युद्ध को समाप्त करने का एकमात्र तरीका ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता देना, हर्जाना देना और भविष्य में होने वाले आक्रमणों के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी देना है…
ईरान का ये बयान उस समय आया है…जब जंग दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है और किसी भी तरफ से पीछे हटने के संकेत नहीं मिल रहे हैं….तेहरान का कहना है कि वो शांति चाहता है…लेकिन इसके लिए जिम्मेदार देशों को जवाबदेह ठहराना जरूरी है…आपको बता दें…इस पूरे संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी…जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के खिलाफ एक संयुक्त एहतियाती हमला किया था…इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए…इसके अलावा जॉर्डन, इराक और खाड़ी के देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया…
अब ये जंग जमीन, हवा और समुद्र…तीनों मोर्चों पर फैल चुकी है…खासतौर पर समुद्र में बढ़ते हमले दुनिया के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं…तेल टैंकरों पर हमले और समुद्री रास्तों में माइन बिछाए जाने की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है….विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो दुनिया भर में तेल की कीमतों में बड़ी उछाल आ सकती है…इससे सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं बल्कि एशिया, यूरोप और अमेरिका की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होगी….
भारत जैसे देशों के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है…क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है…अगर तेल की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है…इसी वजह से दुनिया के कई देश इस जंग को रोकने के लिए कूटनीतिक कोशिशें कर रहे हैं…रूस, पाकिस्तान और ओमान जैसे देश मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं…लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है…
दूसरी ओर अमेरिका और इजरायल का कहना है कि वे ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंतित हैं और इसी वजह से उन्होंने सैन्य कार्रवाई की…जबकि ईरान का दावा है कि उसने सिर्फ आत्मरक्षा में जवाबी हमला किया है…अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका ईरान की शर्तें मानने को तैयार होगा…अगर अमेरिका और उसके सहयोगी इन शर्तों को स्वीकार करते हैं तो संभव है कि युद्ध समाप्त हो जाए…लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो ये संघर्ष और लंबा खिंच सकता है….
वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल किसी भी पक्ष के झुकने की संभावना कम है…दोनों पक्ष अपनी ताकत दिखाने में लगे हुए हैं और इस शक्ति प्रदर्शन के बीच आम लोगों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है…बसरा के पास तेल टैंकर पर हुआ हमला इसी बात का संकेत है कि जंग अब खतरनाक दिशा में बढ़ रही है…अगर समुद्री रास्तों पर इसी तरह हमले होते रहे तो दुनिया के लिए ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है…
कुल मिलाकर पश्चिम एशिया की ये जंग अब सिर्फ क्षेत्रीय संघर्ष नहीं रही…बल्कि वैश्विक संकट का रूप लेती जा रही है…एक तरफ मिसाइल और ड्रोन हमले हैं…तो दूसरी तरफ तेल टैंकर और ऊर्जा ठिकाने निशाने पर हैं…ऐसे में दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान की शर्तों पर विचार करेंगे, या फिर यह युद्ध और ज्यादा भयानक रूप ले लेगा…और सबसे बड़ा सवाल अभी भी वही है कि…क्या ईरान के लगातार हमलों और दबाव के बाद अमेरिका घुटनों पर आएगा, या फिर यह जंग और लंबी और खतरनाक होने वाली है.


