कानपुर सेंट्रल की लिफ्ट बनी मौत का डिब्बा, 18 यात्री फंसे — भगवान भरोसे रेलवे का सिस्टम

देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में गिने जाने वाले कानपुर सेंट्रल पर बड़ा हादसा होते-होते टल गया। प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 पर बनी लिफ्ट अचानक बंद हो गई और करीब 18 यात्री अंदर फंस गए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: देश में रेलवे खुद को आधुनिक और “स्मार्ट” बताने और साबित करने में लगा है… लेकिन हकीकत क्या है, ये कानपुर सेंट्रल स्टेशन की इस घटना ने फिर उजागर कर दी है।

यहां प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 पर लगी लिफ्ट अचानक खराब हो गई… और करीब 18 यात्री उसी के अंदर कैद हो गए। कुछ देर के लिए ऐसा लगा मानो यात्रियों की जान सचमुच भगवान भरोसे छोड़ दी गई हो।

देश के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में गिने जाने वाले कानपुर सेंट्रल पर बड़ा हादसा होते-होते टल गया। प्लेटफॉर्म नंबर 2 और 3 पर बनी लिफ्ट अचानक बंद हो गई और करीब 18 यात्री अंदर फंस गए। लिफ्ट बंद होते ही अंदर मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई… चीख-पुकार और रोने की आवाजें बाहर तक सुनाई देने लगीं। मौके पर मौजूद संदीप नाम के व्यक्ति ने बताया कि वह लिफ्ट के पास से गुजर रहा था, तभी अंदर से लोगों के रोने-चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। सूचना मिलते ही आरपीएफ का एक सिपाही मौके पर पहुंचा।

इसके बाद आरपीएफ जवान और पास के एक स्टॉल संचालक ने मिलकर लिफ्ट का दरवाजा तोड़ा और सभी 18 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात ये रही कि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ… लेकिन सवाल वही पुराना है क्या रेलवे हादसे के बाद ही जागेगा….?

कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर लिफ्ट का खराब होना कोई नई बात नहीं है। अक्सर लिफ्ट बंद रहती है और एस्केलेटर भी कई बार “आराम” फरमाते नजर आते हैं। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और दिव्यांग यात्रियों को होती है, जिनके लिए ये सुविधाएं बनाई गई हैं। लेकिन जब वही लिफ्ट बंद मिलती है तो मजबूरी में उन्हें स्टेशन की बैटरी कार का सहारा लेना पड़ता है… और उसके बदले में वसूला जाता है मनमाना किराया।

अब सवाल ये उठता है कि रेलवे के दावों की “हाई-स्पीड” तो खूब सुनाई और दिखाई देती है… लेकिन सिस्टम की हालत आज भी “लो-मेंटेनेंस” क्यों है…?

फिलहाल 18 यात्रियों की जान बच गई… लेकिन अगर थोड़ी और देर हो जाती तो कानपुर सेंट्रल से एक बड़ी दुघर्टना सामने आ सकती थी। अब देखना ये है कि रेलवे इस वाक़िए से सबक लेता है…

रिपोर्ट – प्रांजुल मिश्रा, कानपुर

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