उन्नाव में शिक्षा विभाग का बड़ा घोटाला? फाइल बंद कराने के नाम पर इतने हजार की मांग

बेसिक शिक्षा विभाग में कथित रूप से रिश्वत मांगने का एक वीडियो सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश सरकार जहां भ्रष्टाचार पर जीरो टोलरेंस की नीति की बात करती है,

वहीं उन्नाव से सामने आया एक मामला इस दावे पर सवाल खड़े करता नजर आ रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग में कथित रूप से रिश्वत मांगने का एक वीडियो सामने आया है, जिसने शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामला उन्नाव जिले के बांगरमऊ ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय तमोरिया बुजुर्ग का बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार जनसुनवाई पोर्टल पर विद्यालय के खिलाफ की गई एक शिकायत के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) शैलेश पाण्डेय की ओर से विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमरेश प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया गया था।

बताया जा रहा है कि विद्यालय प्रशासन की ओर से शिकायत का जवाब भी दे दिया गया था। लेकिन आरोप है कि इसके बाद मामले की फाइल बंद कराने के लिए कथित तौर पर रिश्वत की मांग की गई। आरोप है कि बीएसए कार्यालय में तैनात बड़े बाबू उदयवीर सिंह ने बीएसए के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की।

सूत्रों के मुताबिक, जब पैसे देने में देरी हुई तो विद्यालय को दोबारा नोटिस भेजकर कार्रवाई का दबाव बनाया गया। इसी दौरान अध्यापक और बाबू के बीच हुई बातचीत का एक वीडियो खुफिया कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।

वहीं, वीडियो सामने आने के बाद बीएसए शैलेश पाण्डेय ने सफाई देते हुए कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि इस पूरे प्रकरण ने शिक्षा विभाग की पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठ रहा है कि यदि शिक्षा के मंदिर में ही फाइलों का फैसला नोटों से होने लगे, तो बच्चों को ईमानदारी का पाठ आखिर कौन पढ़ाएगा।

रिपोर्ट- रंजन बाजपेई “निडर”,उन्नाव

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