4PM की खबर का बड़ा असर, वरिष्ठ लिपिक उदय वीर सिंह निलंबित

उन्नाव से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई थी, जहां सरकार भले ही जीरो टोलरेंस की बात करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आ रही थी।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उन्नाव से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई थी, जहां सरकार भले ही जीरो टोलरेंस की बात करती हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती नजर आ रही थी। जिले में बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ा एक मामला सामने आया था, जिसने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे।

आरोप था कि एक स्कूल के खिलाफ आई शिकायत को खत्म करने के नाम पर बीएसए कार्यालय में तैनात एक बाबू ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की। जब पैसे देने में देरी हुई तो स्कूल को नोटिस पर नोटिस भेजकर दबाव बनाया गया। वहीं सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरे मामले का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें कथित तौर पर बाबू और शिक्षक के बीच हुई बातचीत खुफिया कैमरे में कैद हो गई थी। अब यह वीडियो वायरल होकर विभाग के अंदर चल रहे कथित खेल की पोल खोल रहा था।

दरअसल पूरा मामला उन्नाव जिले के बांगरमऊ ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय तमोरिया बुजुर्ग का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक जनसुनवाई पोर्टल पर की गई एक शिकायत के आधार पर बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश पाण्डेय की ओर से विद्यालय के प्रधानाध्यापक अमरेश प्रताप सिंह को नोटिस जारी किया गया था। बताया जा रहा है कि विद्यालय की ओर से शिकायत का जवाब भी दे दिया गया था, लेकिन आरोप है कि इसके बाद फाइल बंद कराने के नाम पर रिश्वत की मांग शुरू हो गई।

पीड़ित प्रधानाध्यापक का आरोप था कि बीएसए कार्यालय में तैनात बड़े बाबू उदयवीर सिंह ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के नाम पर 50 हजार रुपये की मांग की। जब पैसे देने में देरी हुई तो विद्यालय को दोबारा नोटिस भेजकर कार्रवाई का दबाव बनाया जाने लगा। इसी दौरान प्रधानाध्यापक और बाबू के बीच हुई बातचीत को खुफिया कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया गया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा था और बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा था ।

हालांकि वीडियो सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी शैलेश पाण्डेय ने सफाई देते हुए कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर शिक्षा के मंदिर में ही फाइलों का हिसाब नोटों से होने लगे तो बच्चों को ईमानदारी का पाठ आखिर कौन पढ़ाएगा?

जिसके बाद 4PM की  वेबसाइट पर ये खबर छापी गई, और खबर छापने के बाद उसका  बड़ा असर देखने को मिला है। खबर प्रसारित होने के बाद शासन ने मामले का संज्ञान लिया। निदेशालय के निर्देश पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने वरिष्ठ लिपिक उदय वीर सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

आरोप है कि शिकायत के निस्तारण के नाम पर BSA शैलेश पाण्डेय के नाम पर 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। शिक्षा विभाग में चल रहे इस कथित भ्रष्टाचार का खुलासा खुफिया कैमरे में कैद वीडियो के जरिए हुआ था।

मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और शासन स्तर से कार्रवाई करते हुए संबंधित कर्मचारी को सस्पेंड कर दिया गया। फिलहाल मामले की आगे की जांच की जा रही है।

रिपोर्ट- रंजन बाजपेई “निडर”,उन्नाव

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