ट्रंप को कमजोर होता देख नॉर्थ कोरिया ने बढ़ाई सैन्य गतिविधियां, किसी बड़े हमले की तैयारी में जुटे किम?

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे माहौल के बीच अब एशिया में भी हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अमेरिका साउथ कोरिया से अपनी रक्षा संपत्तियों को क्यों हटा रहा है? एक तरफ जहां मिडिल ईस्ट में तबाही का मंज़र देखने को मिल रहा है तो वहीं अब उत्तर कोरिया ने एक साथ 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर दुनिया को चौंका दिया है।

इसके साथ ही जापान और दक्षिण कोरिया ने अपनी सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट पर रखते हुए स्थिति की निगरानी तेज कर दी है। तो आखिर क्या वजह है कि किम जोंग सैन्य अभ्यास कर रहे हैं और आखिर क्यों अब अमेरिका साउथ कोरिया से अपनी रक्षा संपत्तियों को क्यों हटा रहा है,

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे माहौल के बीच अब एशिया में भी हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। इसी बीच उत्तर कोरिया ने शनिवार को ऐसा कदम उठाया जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया। उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी तट से एक साथ 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दीं। इस घटना ने जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका समेत कई देशों को चिंता में डाल दिया है।

इस मिसाइल परीक्षण की पुष्टि दक्षिण कोरिया और जापान की सैन्य एजेंसियों ने की है। दक्षिण कोरिया की सेना ने बताया कि जैसे ही मिसाइलें दागी गईं, उनकी निगरानी तुरंत शुरू कर दी गई थी। इन मिसाइलों ने समुद्र की दिशा में उड़ान भरी और बाद में समुद्र में गिर गईं। फिलहाल किसी तरह के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर एक साथ मिसाइलें दागे जाने के बाद पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। जापान की सरकार ने भी पुष्टि की है कि ये मिसाइलें उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी ईईजेड के बाहर गिरी हैं। इसलिए जापान के इलाके में किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। लेकिन इसके बावजूद जापान ने अपनी सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।

दक्षिण कोरिया और जापान दोनों ने एक संयुक्त बयान जारी करके इन मिसाइल परीक्षणों को अंतरराष्ट्रीय शांति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बताया है। दोनों देशों का कहना है कि उत्तर कोरिया लगातार इस तरह के परीक्षण करके पूरे एशिया प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया ने यह कदम केवल सैन्य ताकत दिखाने के लिए उठाया है। दुनिया के अलग अलग हिस्सों में इस समय तनाव और युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं। ऐसे माहौल में उत्तर कोरिया अपने विरोधियों को यह संदेश देना चाहता है कि वह अभी भी मजबूत है और किसी भी चुनौती का जवाब देने की क्षमता रखता है।

यह मिसाइल प्रक्षेपण ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है। वाशिंगटन और सियोल इन अभ्यासों को पूरी तरह रक्षात्मक बताते हैं। उनका कहना है कि यह अभ्यास केवल अपनी सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए किया जाता है। लेकिन उत्तर कोरिया लंबे समय से इन सैन्य अभ्यासों का विरोध करता रहा है। उत्तर कोरिया का कहना है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया का यह संयुक्त सैन्य अभ्यास दरअसल उस पर हमला करने की तैयारी है।

इसी वजह से हर बार जब भी इस तरह के सैन्य अभ्यास होते हैं, उत्तर कोरिया की तरफ से मिसाइल परीक्षण या हथियारों का प्रदर्शन देखने को मिलता है। दक्षिण कोरिया के संयुक्त चीफ्स ऑफ स्टाफ ने कहा है कि मिसाइलों को छोड़े जाने के तुरंत बाद इलाके में निगरानी और सतर्कता को और ज्यादा बढ़ा दिया गया है। सेना लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और ज्यादा बढ़ा दिया है। पिछले कुछ दिनों से यह भी चर्चा हो रही है कि अमेरिका अपने कुछ सैन्य संसाधनों को एशिया से हटाकर मिडिल ईस्ट में भेज सकता है। अगर ऐसा होता है तो इससे इलाके में शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या अमेरिका ने दक्षिण कोरिया को अकेला छोड़ दिया है।

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि अमेरिका अपनी मिसाइलें और अन्य सैन्य उपकरण मिडिल ईस्ट में भेज रहा है ताकि ईरान के खिलाफ अपने अभियानों को मजबूत किया जा सके। दक्षिण कोरिया में इस बात को लेकर चिंता भी बढ़ गई है। वहां के स्थानीय मीडिया ने सुरक्षा कैमरों की फुटेज और कुछ तस्वीरों के आधार पर यह अनुमान लगाया है कि अमेरिका अपनी कुछ मिसाइल रक्षा प्रणालियों को दक्षिण कोरिया से हटाकर मिडिल ईस्ट में भेज रहा है।

इस बीच एसोसिएटेड प्रेस ने भी इस मामले को लेकर सवाल उठाया। जब पूछा गया कि क्या अमेरिकी सेना दक्षिण कोरिया के सियोंगजू में मौजूद अपने टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस यानी थाड सिस्टम से अवरोधक मिसाइलों को मिडिल ईस्ट में स्थानांतरित कर रही है, तो दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के कार्यालय ने कहा कि वे अमेरिकी सैन्य अभियानों के बारे में किसी तरह की पुष्टि नहीं कर सकते।

राष्ट्रपति कार्यालय ने यह जरूर कहा कि अगर अमेरिकी सैन्य संपत्तियों का कोई संभावित ट्रांसफर होता भी है, तो उससे उत्तर कोरिया के खिलाफ सहयोगियों की रक्षा स्थिति कमजोर नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण कोरिया की अपनी पारंपरिक सैन्य शक्ति भी काफी मजबूत है। इससे पहले भी दक्षिण कोरिया से पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणालियों के संभावित स्थानांतरण को लेकर इसी तरह की खबरें सामने आई थीं। लेकिन तब भी सरकार ने कहा था कि देश की सुरक्षा व्यवस्था पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। इस पूरे मामले में एक और अहम पहलू यह है कि उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने पिछले कुछ समय से रूस के साथ अपने संबंधों को काफी मजबूत किया है। उन्होंने रूस को अपनी विदेश नीति की प्राथमिकता बना दिया है।

रिपोर्टों के मुताबिक उत्तर कोरिया ने रूस की मदद के लिए हजारों सैनिक और बड़ी मात्रा में सैन्य हथियार भी भेजे हैं। रूस इस समय यूक्रेन के खिलाफ युद्ध लड़ रहा है और उत्तर कोरिया ने खुले तौर पर उसका समर्थन किया है। इसके बदले रूस उत्तर कोरिया को नई सैन्य तकनीक देने की कोशिश कर रहा है। माना जा रहा है कि इस सहयोग से उत्तर कोरिया की सैन्य ताकत पहले से ज्यादा मजबूत हो सकती है।

इसी बीच कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा जारी है। हालांकि अभी तक प्योंगयांग की तरफ से इस बारे में कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया गया है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि उत्तर कोरिया बेहतर संबंधों के बदले अपने परमाणु दर्जे की अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है। यानी वह चाहता है कि दुनिया उसे एक परमाणु शक्ति के रूप में स्वीकार करे। लेकिन फिलहाल स्थिति काफी जटिल बनी हुई है।

उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण करता रहा है और इसी वजह से उस पर संयुक्त राष्ट्र के कड़े प्रतिबंध भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद उत्तर कोरिया अपने हथियार कार्यक्रम को लगातार आगे बढ़ा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा मिसाइल लॉन्च भी उसी रणनीति का हिस्सा है। इसके जरिए उत्तर कोरिया एक तरफ अपनी सैन्य क्षमता दिखाना चाहता है और दूसरी तरफ अपने विरोधियों को यह संदेश देना चाहता है कि वह किसी भी दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। इस बीच मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव ने भी एशिया की राजनीति और सुरक्षा समीकरणों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। अगर अमेरिका सच में अपने सैन्य संसाधनों को वहां भेज रहा है तो इससे एशिया में मौजूद उसके सहयोगी देशों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।

यही वजह है कि जापान और दक्षिण कोरिया दोनों इस पूरे घटनाक्रम पर बेहद करीब से नजर रख रहे हैं। दोनों देशों ने अपनी सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट पर रखा हुआ है। दुनिया के अलग अलग हिस्सों में बढ़ते तनाव के बीच अब यह सवाल और भी बड़ा हो गया है कि क्या आने वाले दिनों में हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते हैं। फिलहाल इतना जरूर साफ है कि उत्तर कोरिया की इस नई मिसाइल गतिविधि ने पूरे एशिया प्रशांत क्षेत्र में बेचैनी और चिंता को काफी बढ़ा दिया है।

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