उत्तराखंड के बाद गुजरात में UCC की तैयारी | CM भूपेंद्र पटेल को सौंपी रिपोर्ट

उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर हलचल तेज हो गई है... समिति ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल... 

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में समान नागरिक संहिता लागू करने की राह में एक बड़ा कदम उठाया गया है.. राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति ने मंगलवार, 17 मार्च को मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अपनी विस्तृत.. और अंतिम रिपोर्ट सौंप दी.. यह रिपोर्ट तीन खंडों में तैयार की गई है.. और इसमें विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेना जैसे सभी महत्वपूर्ण व्यक्तिगत मामलों पर सभी धर्मों.. और समुदायों के लिए एक समान कानूनी ढांचा सुझाया गया है.. रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य अलग-अलग धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों की जगह एक ऐसा कानून बनाना है.. जो हर नागरिक पर बराबर लागू हो.. और लिंग भेदभाव को खत्म करे.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने रिपोर्ट प्राप्त करते हुए कहा कि सरकार अब इसकी गहन समीक्षा करेगी.. और उसके आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी.. अगर यह रिपोर्ट स्वीकार होती है.. और कानून बनता है.. तो गुजरात उत्तराखंड के बाद देश का दूसरा राज्य बनेगा.. जहां UCC लागू होगा..

जानकारी के अनुसार यह समिति फरवरी 2025 में गठित की गई थी.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 4 फरवरी 2025 को इसकी घोषणा की थी.. समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने की.. वे उत्तराखंड UCC समिति की भी अध्यक्ष रह चुकी हैं.. अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी सी.एल. मीणा, वरिष्ठ अधिवक्ता आर.सी. कोडेकर, वीर नर्मद दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. दक्षेश ठाकर.. और सामाजिक कार्यकर्ता गीता श्रॉफ शामिल थे.. समिति के सलाहकार के रूप में उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह भी जुड़े रहे.. समिति को शुरू में 45 दिनों का समय दिया गया था.. लेकिन विस्तार के बाद यह रिपोर्ट अब सौंपी गई है..

रिपोर्ट सौंपने के समय गांधीनगर में मुख्यमंत्री आवास पर एक औपचारिक बैठक हुई.. न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई ने तीन खंडों वाली रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी.. इस मौके पर मुख्य सचिव एम.के. दास, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव संजीव कुमार, अतिरिक्त प्रधान सचिव विक्रांत पांडे, विधायी एवं संसदीय कार्य विभाग के सचिव के.एम. लाला, विधि सचिव उपेंद्र भट्ट.. और अन्य अधिकारी मौजूद थे.. सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार समिति ने रिपोर्ट तैयार करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों का दौरा किया.. जनता से राय ली, सामाजिक, धार्मिक.. और राजनीतिक हितधारकों से विस्तृत परामर्श किया.. रिपोर्ट में गुजरात की भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विविधता को ध्यान में रखा गया है.. ताकि कानून सभी समुदायों के साथ संतुलन बनाए रखे..

समिति ने रिपोर्ट में महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा है.. रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि प्रस्तावित कानून ऐसा हो.. जो महिलाओं को पुरुषों के बराबर अधिकार दे.. किसी भी तरह का भेदभाव न हो और उनकी आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करे.. विवाह की उम्र, तलाक की प्रक्रिया, संपत्ति में हिस्सा.. और गोद लेने जैसे मामलों में महिलाओं को मजबूत अधिकार दिए गए हैं.. समिति का मानना है कि UCC से लिंग समानता बढ़ेगी.. और समाज में न्याय की भावना मजबूत होगी.. रिपोर्ट में कहा गया है कि UCC एक प्रगतिशील और समानता आधारित कानूनी ढांचा तैयार करेगा.. जिसमें हर नागरिक को बराबर न्याय और अधिकार मिलेंगे..

आपको बता दें कि समान नागरिक संहिता भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों के तहत शामिल है.. इसमें कहा गया है कि राज्य पूरे देश में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा.. वर्तमान में भारत में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार.. और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामले विभिन्न धर्मों के अलग-अलग कानूनों से नियंत्रित होते हैं.. हिंदू मैरिज एक्ट, मुस्लिम पर्सनल लॉ, क्रिश्चियन मैरिज एक्ट आदि अलग-अलग हैं.. UCC का मतलब है इन सभी को हटाकर एक ऐसा कानून बनाना.. जो धर्म से ऊपर हो और सब पर एक समान लागू हो.. इसका उद्देश्य राष्ट्रीय एकता बढ़ाना, लिंग भेदभाव खत्म करना और संविधान की भावना को पूरा करना है..

गुजरात में UCC की शुरुआत 2025 में हुई.. फरवरी 2025 में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने समिति गठित की.. यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन से प्रेरित था.. जिन्होंने कई बार UCC को लागू करने की बात कही है.. उत्तराखंड ने 2025 में UCC लागू किया था.. जो देश में पहला राज्य बना.. गुजरात अब दूसरा राज्य बनने की ओर है.. समिति ने रिपोर्ट तैयार करने के दौरान राज्य भर में दौरा किया.. विभिन्न समुदायों, महिलाओं, युवाओं, धार्मिक नेताओं और विशेषज्ञों से बातचीत की.. रिपोर्ट में गुजरात की विविधता का सम्मान करते हुए सुझाव दिए गए हैं.. ताकि कोई भी समुदाय असहज महसूस न करे..

 

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