क्या सच में शहीद हो गए अली लारीजानी, जानिए कितना सच है इजराइल का दावा
इजराइल ने आज सुबह एक ऐसा दावा किया जिसने तेहरान से लेकर वॉशिंगटन तक हड़कंप मचा दिया है। इजराइल का कहना है कि उन्होंने ईरान के सबसे ताकतवर अफसर और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली लारीजानी को एक एयरस्ट्राइक में मार गिराया है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इस वक्त पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट की जंग अब उस मोड़ पर आ गई है जहाँ सच और झूठ के बीच की लकीर धुंधली हो चुकी है।
इजराइल ने आज सुबह एक ऐसा दावा किया जिसने तेहरान से लेकर वॉशिंगटन तक हड़कंप मचा दिया है। इजराइल का कहना है कि उन्होंने ईरान के सबसे ताकतवर अफसर और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली लारीजानी को एक एयरस्ट्राइक में मार गिराया है। इतना ही नहीं, ‘बसीज फोर्स’ के कमांडर गुलामरेज़ा सुलेमानी की मौत का भी दावा किया जा रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वाकई सच है या फिर हार की कगार पर खड़े नेतन्याहू का कोई नया प्रोपेगेंडा? और सबसे बड़ा सवाल—ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई कहाँ हैं? क्या वे घायल हैं, या फिर रूस के किसी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं? आज की इस खास रिपोर्ट में हम इन तमाम अफवाहों का पोस्टमार्टम करेंगे और बताएंगे कि कैसे ट्रंप और नेतन्याहू मिलकर दुनिया को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने आज सीना ठोककर कहा कि लारीजानी को जहन्नुम भेज दिया गया है। इजराइल का दावा है कि तेहरान में एक सीक्रेट मीटिंग के दौरान उनकी मिसाइलों ने लारीजानी को निशाना बनाया। अली लारीजानी, जो ईरान के सर्वोच्च नेता के सबसे करीबी सलाहकार और जंग के मामलों के चाणक्य माने जाते हैं, अगर उनकी मौत की खबर सच है, तो यह ईरान के लिए सबसे बड़ा झटका होगा। लेकिन ठहरिए! ईरान ने अभी तक इस पर खामोशी अख्तियार की हुई है।
ईरानी मीडिया का कहना है कि इजराइल अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए मनगढ़ंत कहानियां गढ़ रहा है। याद रहे, ये वही नेतन्याहू हैं जो पिछले कई दिनों से खुद गायब हैं और एआई (AI) वीडियो के जरिए अपनी मौजूदगी का नाटक कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या लारीजानी की मौत का दावा सिर्फ तेल अवीव की जनता को खुश करने के लिए किया गया है?
इजराइल ने लारीजानी के साथ-साथ एक और नाम उछाला है—गुलामरेज़ा सुलेमानी। बसीज फोर्स के ये वही कमांडर हैं जिन्होंने ईरान के अंदरूनी विद्रोहों को लोहे के हाथ से कुचला था। इजराइली सेना (IDF) का दावा है कि उन्होंने एक टेंट एरिया पर हमला किया जहाँ ये कमांडर अपने 10 सीनियर अफसरों के साथ छिपे थे। इजराइल का कहना है कि सुलेमानी के जाने से ईरान का ‘कमांड एंड कंट्रोल’ सिस्टम टूट चुका है। लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि ईरान की ‘तस्नीम’ एजेंसी ने इन दावों को पूरी तरह खारिज नहीं किया, बल्कि इसे ‘दुश्मन की मनोवैज्ञानिक जंग’ करार दिया है। क्या वाकई ईरान के सैन्य ढांचे में बड़ी सेंध लग चुकी है?
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़ ने दावा किया है कि ईरान पर रात को किए गए एयरस्ट्राइक में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी मारे गए हैं। इससे पहले इजराइली सेना ने पुष्टि की थी कि उसने लारीजानी को निशाना बनाया था। इसके साथ ही आईडीएफ ने बताया कि एक अलग हमले में बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर गुलामरेज़ा सुलेमानी को भी मार गिराया गया। रक्षा मंत्री काट्ज़ ने बयान में कहा कि लारीजानी और बसीज कमांडर को खत्म कर दिया गया है और वे उन लोगों के साथ जा मिले हैं, जिन्हें इजराइल पहले ही मार चुका है। हालांकि, इन दावों पर अभी तक ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं आई है।
वहीं दूसरी ओर इजराइल का दावा है कि सोमवार रात हुए हमले में बसीज फोर्स के टॉप लीडर गुलामरेज़ा सुलेमानी पर भी हमला हुआ है। ‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ के मुताबिक, एक सीनियर आईडीएफ अफसर ने कहा— “बीती रात ईरान में अलग-अलग हमलों में एक दर्जन से ज्यादा बसीज अधिकारियों को निशाना बनाया गया, जिनमें बसीज बलों के प्रमुख गुलामरेज़ा सुलेमानी भी शामिल हैं। यह अमेरिका और इजराइल का जॉइंट ऑपरेशन था।”
फिलहाल यह पता लगाने के लिए आकलन जारी है कि इनमें से कौन मारा गया और कौन घायल हुआ। हालांकि मीडिया में खबरें आ गई हैं, लेकिन अभी ईरान ने इस खबर की कोई पुष्टि नहीं की है। लेकिन यह बात सच है कि अगर अली लारीजानी शहीद हुए हैं, तो यह ईरान को जोर का झटका है। क्योंकि लारीजानी न सिर्फ जंग की तगड़ी रणनीति के माहिर हैं, बल्कि जंग में कब कौन से बड़े फैसले लेने हैं और कम संसाधनों के बावजूद कैसे जंग में टिका रहा जा सकता है, इसके भी माहिर माने जाते हैं।
ईरान के सुरक्षा प्रमुख लारीजानी आखिरी बार शुक्रवार को तेहरान में आयोजित अल-कुद्स डे की रैली में दिखाई दिए थे। रैली के दौरान ईरानी सरकारी मीडिया से बात करते हुए लारीजानी ने कहा था कि ईरान पर हमला दुश्मनों के डर को दिखाता है। उन्होंने कहा कि ये हमले डर और हताशा की वजह से हो रहे हैं। “जो मजबूत होता है, वह प्रदर्शनों पर बमबारी नहीं करता। साफ है कि वे असफल हो चुके हैं।” लारीजानी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह यह नहीं समझते कि ईरानी लोग एकजुट हैं। उन्होंने कहा, “जितना ज्यादा दबाव डाला जाएगा, उतनी ही इस देश की दृढ़ता बढ़ेगी।”
ऐसे में एक ओर जहाँ अली लारीजानी के मारे जाने की खबर है, तो वहीं दूसरी ओर पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर मोजतबा खामेनेई को लेकर तरह-तरह की बातें हो रही हैं। कोई कह रहा है कि वह मॉस्को के अस्पताल में कोमा में हैं, तो कोई उन्हें ‘डिस्फ़िगर्ड’ यानी चेहरा खराब होने की बात कह रहा है।
ट्रंप ने भी आग में घी डालते हुए कह दिया कि “मुझे तो पता ही नहीं कि वह जिंदा भी हैं या नहीं।” लेकिन अब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इन तमाम अफवाहों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने साफ कहा कि लीडर की सेहत बिल्कुल ठीक है और वे अपने पद पर रहकर पूरी स्थिति को संभाल रहे हैं। अराघची का कहना है कि अमेरिका और इजराइल सिर्फ भ्रम फैलाकर ईरान की जनता को डराना चाहते हैं।
वहीं दूसरी ओर, एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के उप-विदेश मंत्री इस्माइल बघाई ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि देश का नेतृत्व पूरी तरह एक्टिव है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘मैं आपको बता सकता हूँ कि वे (मोजतबा खामेनेई) पूरी तरह ठीक हैं। आपने उनका संदेश सुना ही होगा और जल्द ही वे जनता को एक और संदेश देंगे।’ मिडिल ईस्ट में छिड़ी जंग को ईरान ने पहले ही वॉशिंगटन और तेल अवीव द्वारा थोपा गया आक्रमण बताया है।
इस्माइल बघाई ने कहा, ‘आज इस अनुचित आक्रमण का 17वाँ दिन है। यह स्पष्ट है कि अमेरिका और इजराइल ने इसे ईरान पर थोपा है।’ ईरानी अधिकारी इसे रक्षात्मक कार्रवाई करार देते हैं, जो संप्रभुता की रक्षा के लिए आवश्यक है। युद्ध शुरू होने से ठीक पहले तेहरान वार्ता में लगा था, लेकिन अब राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता है। गौरतलब है कि युद्ध का एक प्रमुख प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है, जहाँ से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
अगर इस पूरे खेल का सबसे बड़ा खलनायक कोई है, तो वह ट्रंप हैं। ट्रंप साहब रोज प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हैं, नए-नए आंकड़े देते हैं कि 90 प्रतिशत मिसाइलें खत्म, 95 प्रतिशत ड्रोन तबाह। लेकिन सवाल यह है कि ट्रंप साहब, अगर सब खत्म हो गया है, तो आपकी तेल कंपनियां व्हाइट हाउस के बाहर क्यों रो रही हैं? क्यों तेल की कीमतें 153 डॉलर के पार जा चुकी हैं?
हकीकत यह है कि ट्रंप का अहंकार और नेतन्याहू की कुर्सी बचाने की सनक ने दुनिया को तबाही के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। ये दोनों नेता झूठ के ऐसे जाल बुन रहे हैं जिसमें खुद ही उलझते जा रहे हैं। कभी मोसाद के जासूस पकड़े जाते हैं, तो कभी होर्मुज में अमेरिकी जहाजों को रास्ता नहीं मिलता। अपनी नाकामियों को ढंकने के लिए अब ये हाई-प्रोफाइल हत्याओं के दावे कर रहे हैं।
आज की स्थिति यह है कि इजराइल दावों की बौछार कर रहा है और ईरान खामोशी से अपने अगले कदम की तैयारी कर रहा है। लारीजानी और सुलेमानी की मौत के दावों के पीछे का सच जल्द ही सामने आ जाएगा। लेकिन एक बात साफ है कि 2026 की यह जंग अब सिर्फ बारूद की नहीं, बल्कि ‘झूठ और प्रोपेगेंडा’ की जंग बन चुकी है। क्या नेतन्याहू की यह नई चाल उन्हें बचा पाएगी? क्या ट्रंप का ईगो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को ले डूबेगा? और मोजतबा खामेनेई कब दुनिया के सामने आएंगे?



