लोकसभा में जोरदार हंगामा बना, पक्ष-विपक्ष में वार-पलटवार
कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक पर कांग्रेस का घोर विरोध, बैकफुट पर सरकार

सरकार ने विचार-विमर्श के लिए जेपीसी को भेजा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लोकसभा में आज भी जोरदार हंगामा बना रहा। संसद में पेश कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक पर सरकार और विपक्ष के बीच घारे मतभेद दिखे, जिसके बाद सरकार ने इसे व्यापक विचार-विमर्श हेतु जेपीसी को भेजने का निर्णय लिया। कांग्रेस ने प्रमुख नीतिगत मामलों को अधीनस्थ कानूनों पर छोडऩे का विरोध किया है, जबकि सरकार का लक्ष्य व्यवसायों के लिए मुकदमेबाजी का जोखिम कम करना है।
कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया गया, जिसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजने का प्रस्ताव रखा। सदन ने इस पर सहमति जताते हुए विधेयक को जेपीसी को भेज दिया। विधायक द्वारा विधेयक पेश किए जाने पर उठाई गई आपत्तियों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष ने जेपीसी द्वारा समीक्षा की मांग नहीं की थी। उन्होंने आगे कहा कि विधेयक को समिति को भेजने का निर्णय सरकार का था ताकि इस कानून पर व्यापक चर्चा हो सके। प्रमुख अपेक्षित प्रावधानों में से एक है छोटे कॉर्पोरेट अपराधों को और अधिक अपराध की श्रेणी से बाहर करना, जो प्रक्रियात्मक चूक के लिए आपराधिक दंडों को मौद्रिक जुर्माने से बदलने के सरकार के पूर्व दृष्टिकोण को जारी रखता है। इसका उद्देश्य मुकदमेबाजी के जोखिम को कम करना और व्यवसायों के लिए परिचालन तनाव को कम करना है।

कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने कॉर्पोरेट कानून संशोधन विधेयक 2026 को पेश किए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कंपनियों का वर्गीकरण, छूट, अनुपालन आवश्यकताओं का निर्धारण, कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी की सीमा, लेखापरीक्षा दायित्व और दंड ढांचे जैसे प्रमुख नीतिगत मामलों को पर्याप्त विधायी मार्गदर्शन के बिना बार-बार निर्धारित प्रावधानों के उपयोग के माध्यम से अधीनस्थ कानूनों पर छोड़ दिया गया है। विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसी महीने की शुरुआत में मंजूरी दी है। इस विधेयक को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसी महीने की शुरुआत में मंजूरी दे दी है और यह कंपनी विधि समिति (2022) की सिफारिशों के साथ-साथ कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय से प्राप्त सुझावों पर आधारित है। इसमें दो प्रमुख कानूनों – कंपनी अधिनियम, 2013 और सीमित देयता भागीदारी अधिनियम, 2008 – में संशोधन का प्रस्ताव है, जो मिलकर पूरे भारत में कॉर्पोरेट संस्थाओं और एलएलपी को नियंत्रित करते हैं। मूल रूप से, इस विधेयक का उद्देश्य अनुपालन के बोझ को कम करना, छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और समय के साथ उभरे नियामकीय अंतरालों को दूर करना है।
उन्नाव के जिला पंचायती राज विभाग में बड़ा खेल!
एक ही फर्म को 1.90 करोड़ का भुगतान
छह ब्लॉकों में एक ही फर्म का दबदबा भुगतान पर उठे सवाल
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
उन्नाव। उन्नाव जिला पंचायती राज विभाग में अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है जहां एक ही फर्म को करीब 1 करोड़ 90 लाख रुपये की सामग्री आपूर्ति के नाम पर भुगतान किए जाने से घोटाले की आशंका गहरा गई है। मामला सामने आते ही विभागीय कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के मुताबिक नवाबगंज, बिछिया, पुरवा, सुमेरपुर, हसनगंज और सिकंदपुर कर्ण जैसे कई ब्लॉकों में जय बुढ़वा बाबा इंटरप्राइजेज नाम की एक ही फर्म को करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी राशि का कार्य एक ही फर्म को देने के पीछे क्या प्रक्रिया अपनाई गई इसका स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आया है।
असोहा ब्लॉक की फर्म को मिली विशेष तवज्जो, बढ़ी संदेह की सुई
सूत्रों के अनुसार संबंधित फर्म असोहा ब्लॉक में रजिस्टर्ड है लेकिन इसके बावजूद उसे जिले के कई अन्य ब्लॉकों में भी लगातार काम और भुगतान दिया गया। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या टेंडर प्रक्रिया का पालन किया गया या फिर नियमों को दरकिनार कर एक ही फर्म को लाभ पहुंचाया गया। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जोरों पर है कि विभागीय अधिकारियों और फर्म के बीच सांठगांठ के चलते यह पूरा खेल रचा गया। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह मामला बड़े वित्तीय घोटाले में तब्दील हो सकता है।
शासन ने दिए जांच के आदेश, विभाग में मचा हडक़ंप
मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर से जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। जांच टीम अब यह पता लगाएगी कि आखिर किन परिस्थितियों में एक ही फर्म को इतने बड़े स्तर पर भुगतान किया गया और क्या इसमें वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ है।जांच के आदेश मिलते ही विभाग में हडक़ंप मच गया है। संबंधित अधिकारी अब अपनी-अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश में जुटे हैं जबकि दस्तावेजों की जांच शुरू हो चुकी है।
पारदर्शिता पर सवाल, कार्रवाई की मांग तेज
इस पूरे मामले ने जिला पंचायती राज विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। आमतौर पर सरकारी कार्यों में प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के तहत कई फर्मों को मौका दिया जाता है, लेकिन यहां एक ही फर्म को लगातार प्राथमिकता मिलना संदेह को और मजबूत करता है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सच सामने आता है और क्या वाकई यह मामला करोड़ों के घोटाले में बदलता है या नहीं।
अमेरिका में एयरपोर्ट पर हुए हादसे में 2 पायलटों की मौत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित ला गार्डिया एयरपोर्ट पर बड़ा विमान हादसा हो गया, जहां रनवे पर एयर कनाडा एक्सप्रेस का विमान ट्रक से टकरा गया। इस हादसे में विमान में सवार 100 से अधिक यात्रियों के घायल होने की भी खबर है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस विमान हादसे में पायलट और सह-पायलट की मौत हो गई।
घटना की शुरुआती जांच में सामने टक्कर से कुछ पल पहले ही पायलट और वाहन चालक दोनों को रुकने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद हादसा नहीं टल सका। फ्लाइट-ट्रैकिंग वेबसाइट ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि हवाई अड्डे पर लोगों को निकालने के लिए राहत बचाव का कार्य जारी है। घटना के तुरंत बाद अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन ने सुरक्षा कारणों से हवाई अड्डे पर सभी उड़ानों के लिए ग्राउंड स्टॉप जारी कर दिया है। यानी सभी उड़ानों पर रोक लगा दी गई है।
दिल्ली के बजट सत्र का आगाज
विधायकों के निलंबन पर आप का बहिष्कार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है। रेखा सरकार दूसरी बार बजट पेश करने जा रही है। बजट सत्र की शुरुआत खीर सेरेमनी के साथ की गई। दिल्ली बजट सेशन 2026 से पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंत्रियों परवेश वर्मा, मनजिंदर सिंह सिरसा, आशीष सूद, कपिल मिश्रा और अन्य लोगों के साथ खीर सेरेमनी की, जहां स्कूली छात्राओं को खीर खिलाई गई।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, बजट 2026-27 यह हमारी सरकार का दूसरा बजट है। यह दिल्ली के विकास की गति बढ़ाने वाला बजट है। यह दिल्ली के लोगों के जीवनस्तर को ऊपर उठाने वाला बजट है। यह दिल्ली के विकास को अधिक गति देगा।विधानसभाआ अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री ने अपने काम से देश और दुनियाभर में भारत का मान बढ़ाया है, उन्होंने आशीष सूद की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन प्रस्ताव के लिए सदस्यों की सहमति मांगी, जिसका ध्वनिमत से सभी सदस्यों ने समर्थन किया। वहीं, आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा बजट सत्र के पहले दिन सदन से बायकॉट किया है, विपक्ष के चार विधायकों को पिछले शीतकालीन सत्र से निष्कासन बरकरार रखने पर आम आदमी पार्टी के सभी विधायकों ने विरोध किया है। सदन में अनुपस्थित हैं। पिछले विधानसभा सत्र में भी पहले दिन के बाद विपक्षी पार्टी आम आदमी पार्टी सदन से गायब रही थी।
विपक्ष की आवाज दबाने के अलावा कोई काम नहीं : आतिशी
वहीं, बजट सत्र के दौरान विधानसभा के बाहर आम आदमी का प्रदर्शन जारी है। दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की नेता और आप विधायक आतिशी ने कहा, विधानसभा के सत्र में पक्ष और विपक्ष दोनों की भूमिका होती है। विपक्ष की भूमिका होती है सरकार को जनहित के मुद्दों के बारे में बताना लेकिन भाजपा ने पिछले 1 साल में विपक्ष की आवाज दबाने के अलावा कोई काम नहीं किया। यह कैसा लोकतंत्र है। वे विधानसभा का सत्र क्यों बुला रहे हैं, जब विपक्ष को बोलने का मौका ही नहीं दिया जाता है।
यूएपीए कानून के दुरुपयोग के बढ़ते मामलों पर भडक़े न्यायाधीश भुइयां
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश पूछा- ऐसे बनेगा विकसित भारत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
बेंगलुरु। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश उज्जल भुइयां ने विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो इसके लिए समाज और शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार आवश्यक हैं। खासतौर पर विचारों की स्वतंत्रता, असहमति का सम्मान और सामाजिक समानता इस दिशा में मूल आधार बनने चाहिए।
हम आपको बता दें कि बेंगलुरु में आयोजित उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए न्यायाधीश भुइयां ने स्पष्ट कहा कि किसी भी विकसित राष्ट, का निर्माण केवल आर्थिक प्रगति से नहीं होता, बल्कि सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती से होता है। उन्होंने कहा कि बहस और असहमति को अपराध की श्रेणी में डालना एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए उचित नहीं है।
समाज में विभिन्न विचारों को सम्मान मिलना चाहिए और आलोचना को सहन करने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने गैर कानूनी गतिविधियां निवारण कानून यानि यूएपीए के तहत हो रही गिरफ्तारियों पर भी चिंता व्यक्त की। आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 से 2023 के बीच हजारों लोगों को इस कानून के तहत गिरफ्तार किया गया, लेकिन दोष सिद्ध होने की दर लगभग पांच प्रतिशत ही रही। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ यह है कि अधिकांश मामलों में या तो पर्याप्त साक्ष्य नहीं थे या फिर गिरफ्तारी जल्दबाजी में की गई। उन्होंने कहा कि यदि 95 प्रतिशत मामलों में आरोपी बरी हो रहे हैं, तो यह कानून के अधिक उपयोग या दुरुपयोग की ओर संकेत करता है।
लंबे समय तक किसी व्यक्ति को जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांत के विपरीत
न्यायाधीश भुइयां ने यह भी कहा कि बिना आरोप पत्र दाखिल किए लंबे समय तक किसी व्यक्ति को जेल में रखना न्याय के मूल सिद्धांत के विपरीत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद का सिद्धांत कमजोर पड़ता जा रहा है, जिससे न्याय व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे अदालतों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ती है और न्याय मिलने में देरी होती है।
संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए
विकसित भारत की अवधारणा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि देश में संसाधनों का समान वितरण होना चाहिए और आर्थिक असमानता समाप्त होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य हमारे संविधान के नीति निदेशक तत्वों में भी निर्धारित किया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को अपनी स्वतंत्र भूमिका बनाए रखनी चाहिए। वह न तो स्थायी आलोचक बन सकती है और न ही किसी सरकारी अभियान की समर्थक।



