Iran ने उतारे अपने सबसे खतरनाक हथियार, America-Israel के उड़े होश
जिस तरह से ईरान ने एक साथ कई मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाया...उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया...अगर इस पूरे संघर्ष को दो हिस्सों में समझें....तो शुरुआती 48 घंटे अमेरिका और इजराइल के पक्ष में नजर आए...

4पीएम न्यूज नेटवर्क: अमेरिका और इजराइल के लिए ईरान अब एक मुश्किल पहेली बनता जा रहा है…हालात इस मुकाम पर पहुंच गए हैं कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी पहले ईरान की बढ़ती ताकत को लेकर चिंता जता चुके हैं…
जिस तरह से ईरान ने एक साथ कई मोर्चों पर आक्रामक रुख अपनाया…उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया…अगर इस पूरे संघर्ष को दो हिस्सों में समझें….तो शुरुआती 48 घंटे अमेरिका और इजराइल के पक्ष में नजर आए…
इस दौरान ईरान को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा…उसके शीर्ष सैन्य नेतृत्व और कई अहम अधिकारी मारे गए….लेकिन इसके बाद तस्वीर तेजी से बदली…करीब तीन हफ्तों तक चले ईरान के जवाबी हमलों ने हालात पलट दिए और जंग का संतुलन बदल गया और सबसे बड़ा असर तब दिखा जब ईरान ने Strait of Hormuz पर अपनी पकड़ मजबूत करते हुए उसे बंद करने जैसा कदम उठाया…इससे न सिर्फ वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ…बल्कि अमेरिका की सुपरपावर छवि पर भी सवाल खड़े होने लगे…इसी बीच ईरान लगातार नए-नए हथियारों का प्रदर्शन कर रहा है…जो खासतौर पर इजराइल के लिए चिंता का कारण बन गए हैं..
फरवरी में जब अमेरिका और इजराल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की…तब माहौल बिल्कुल अलग था….उस समय डोनाल्ड ट्रंप ने साफ तौर पर दावा किया था कि…ये कोई लंबी जंग नहीं होगी…उनका कहना था कि ये ऑपरेशन कुछ घंटों या ज्यादा से ज्यादा दो-तीन दिनों में खत्म हो जाएगा…इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद ने भी अपनी सरकार को भरोसा दिलाया था कि…अगर ईरान की टॉप लीडरशिप को खत्म कर दिया जाए और हवाई हमलों के जरिए उसकी सैन्य ताकत को कमजोर कर दिया जाए…तो वहां सत्ता परिवर्तन आसान हो जाएगा…
शुरुआती हमलों में अमेरिका और इजराइल को कुछ हद तक सफलता भी मिली…ईरान के कई बड़े सैन्य अधिकारी और अहम चेहरे मारे गए….इससे ऐसा लगने लगा कि रणनीति काम कर रही है और जल्द ही ईरान कमजोर पड़ जाएगा…लेकिन जैसे-जैसे समय बीता, हालात पूरी तरह बदलने लगे…जो जंग कुछ दिनों की बताई जा रही थी…वो तीन हफ्तों से ज्यादा लंबी खिंच गई और अब भी इसके खत्म होने के कोई साफ संकेत नहीं दिख रहे……
यहां तक कि तीन हफ्तों की लड़ाई के बाद जमीनी सच्चाई ये है कि ईरान अब अपने हिसाब से जवाब दे रहा है…वो सिर्फ बचाव की स्थिति में नहीं है…बल्कि खुलकर पलटवार कर रहा है…इजराइल के एयर डिफेंस सिस्टम…जिन्हें दुनिया के सबसे मजबूत सिस्टम में गिना जाता है…अब पहले जैसे प्रभावी नहीं दिख रहे…पहले जहां एक साथ दागी गई 10 मिसाइलों में से 8 या 9 को हवा में ही रोक लिया जाता था…अब वही सिस्टम आधी मिसाइलों को भी रोकने में संघर्ष करता नजर आ रहा है….
इसी वजह से अब अमेरिका और इजराइल दोनों सीजफायर की बात करने लगे हैं…लेकिन ईरान का रुख बिल्कुल अलग है…वो इस प्रस्ताव को सीधे तौर पर ठुकरा रहा है…ईरान का कहना है कि जब जंग की शुरुआत अमेरिका और इजराइल ने की थी…और उनका मकसद सत्ता परिवर्तन था….तो अब पीछे हटने की बात क्यों हो रही है….ईरान इसे अपनी मजबूती के तौर पर पेश कर रहा है और साफ कह रहा है कि जंग अभी खत्म नहीं होगी…
इस बीच एक और बड़ा सवाल उठ रहा है…दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप लगातार ये दावा करते रहे हैं कि ईरान की सैन्य ताकत को लगभग पूरी तरह खत्म कर दिया गया है…कभी कहा गया कि 90% मिसाइलें नष्ट कर दी गईं…तो कभी 100% सैन्य क्षमता खत्म करने की बात कही गई…लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है….
ईरान लगातार नई-नई मिसाइलों के साथ हमले कर रहा है…जिससे साफ है कि उसकी सैन्य क्षमता अभी भी बरकरार है…सबसे ज्यादा चिंता उस समय बढ़ी जब ईरान ने इजराइल के बेहद सुरक्षित माने जाने वाले शहर डिमोना को निशाना बनाया…. ये वही जगह है…जहां इजराइल का परमाणु संयंत्र मौजूद है…इसे देश के सबसे सुरक्षित इलाकों में गिना जाता है…यहां पर इजराइल ने अपने सबसे एडवांस डिफेंस सिस्टम तैनात किए हुए हैं…इसके बावजूद ईरानी मिसाइल वहां तक पहुंचने में सफल रही…
ईरान का ये हमला सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं था…बल्कि एक बड़ा संदेश भी था…इससे ये साफ हो गया कि ईरान अब जैसे को तैसा की नीति पर काम कर रहा है…अगर इजराइल ईरान के परमाणु ठिकानों को निशाना बनाता है…तो ईरान भी उसके संवेदनशील ठिकानों को टारगेट करेगा…अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर ईरान ने ऐसा कौन सा हथियार इस्तेमाल किया…जिसे रोक पाना इतना मुश्किल हो गया…तो चर्चा दो मिसाइलों को लेकर सबसे ज्यादा हो रही है…पहली इमाद और दूसरी सेज्जिल सीरीज की….
इमाद मिसाइल को एक बेहद एडवांस और खतरनाक हथियार माना जाता है…इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका गाइडेंस सिस्टम है…ये मिसाइल हवा में ही अपना रास्ता बदल सकती है…जिससे इसे इंटरसेप्ट करना बेहद कठिन हो जाता है…जब इजराइल के मशहूर Iron Dome ने इसे रोकने की कोशिश की…तो ये मिसाइल दिशा बदलकर सुरक्षा घेरे को पार कर गई…इसकी स्पीड और स्टेल्थ टेक्नोलॉजी इतनी उन्नत बताई जाती है कि आधुनिक रडार सिस्टम भी इसे समय रहते ट्रैक नहीं कर पाते…
लेकिन सिर्फ एक मिसाइल ही नहीं…ईरान की रणनीति भी काफी जटिल और सोची-समझी नजर आती है…उसने सीधे हमला करने के बजाय पहले एक जाल बिछाया….सैकड़ों ड्रोन भेजे गए, ताकि इजराइल का डिफेंस सिस्टम उन पर व्यस्त हो जाए….इसके साथ ही काद्र मिसाइल दागी गई…जो हवा में कई हिस्सों में बंट जाती है…
इससे डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो जाता है और असली खतरे को पहचानना मुश्किल हो जाता है…….जब इजराइल का डिफेंस सिस्टम इन सब में उलझा हुआ था…तभी इमाद मिसाइल को लॉन्च किया गया…ये सीधे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ी और डिमोना के बाहरी हिस्से को निशाना बनाया…इजराइल ने इसे रोकने की कोशिश जरूर की…लेकिन इंटरसेप्टर मिसाइलें भी इसे नहीं रोक पाईं…ये घटना इजराइल के डिफेंस सिस्टम की बड़ी कमजोरी को उजागर करती है…
दूसरी तरफ सेजल सीरीज की मिसाइलें भी चर्चा में हैं…खासकर सेजल-2 और सेजल-3। सेजल-2 को डांसिंग मिसाइल कहा जाता है…क्योंकि ये भी अपने रास्ते में बदलाव कर सकती है…वहीं सेजल-3 को इससे भी ज्यादा खतरनाक माना जाता है…ये ठोस ईंधन पर आधारित दो चरणों वाली मिसाइल है…
जिसे बहुत कम समय में लॉन्च किया जा सकता है…इसकी रेंज करीब 2000 किलोमीटर बताई जाती है, यानी ईरान से पूरा इजराइल इसकी जद में आता है…सबसे चौंकाने वाली बात इसकी स्पीड है…ये महज कुछ ही मिनटों में अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है…इसके साथ ही ये भारी मात्रा में विस्फोटक ले जाने में सक्षम है, जिससे इसका प्रभाव और भी ज्यादा विनाशकारी हो जाता है…
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि डिमोना पर हुए हमले में सेजल-3 का इस्तेमाल भी हो सकता है…हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है…पश्चिमी देशों के दावे तो यहां तक हैं कि…ये मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम हो सकती है…इसके अलावा ईरान के पास और भी लंबी दूरी की मिसाइलें मौजूद बताई जाती हैं…जैसे खुर्रमशहर सीरीज…हालांकि इनका इस्तेमाल इस खास हमले में नहीं किया गया होगा…क्योंकि उनकी रेंज ज्यादा लंबी है और उनका लक्ष्य आमतौर पर दूर के इलाके होते हैं…
इन सब घटनाओं के बीच एक बात साफ नजर आ रही है कि ईरान के पास अभी भी ऐसे कई हथियार मौजूद हैं…जो इस जंग का रुख बदल सकते हैं…यही वजह है कि अब अमेरिका के सामने मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं…ट्रंप एक ऐसे मोड़ पर खड़े दिखाई दे रहे हैं….जहां उनके पास विकल्प सीमित होते जा रहे हैं…
एक ऑपशन ये है कि अमेरिका एकतरफा सीजफायर की घोषणा कर दे…लेकिन ऐसा करने का मतलब ये माना जाएगा कि उसने जंग में पीछे हटने का फैसला लिया है…दूसरा ऑपशन ये है कि वो अपनी पूरी सैन्य ताकत के साथ ईरान पर हमला तेज कर दे…लेकिन इसमें बड़ा जोखिम है…क्योंकि ईरान के जवाबी हमले और भी खतरनाक हो सकते हैं….
कुल मिलाकर, जो जंग कुछ दिनों में खत्म होने का दावा किया गया था…वो अब एक लंबी और जटिल लड़ाई में बदल चुकी है…ईरान जिस तरह से लगातार जवाब दे रहा है…उससे ये साफ है कि वो दबाव में झुकने वाला नहीं है…आने वाले दिनों में ये संघर्ष किस दिशा में जाएगा…ये तो वक्त ही बताएगा..



