अमेरिका का टूटता घमंड, खत्म होती धौंस
बगदाद में अमेरिकन कमांड सेंटर का खात्मा, जंग से पीछे हटते कदम

बोला ईरान ट्रंप की बातचीत का दावा झूठा जवाबी कार्रवाई के डर से पीछे हटा अमेरिका
रूस की चेतावनी ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे पर अमेरिकी इजरायली हमले अस्वीकार्य
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए जी हां ईरान के ताजा बयान कि ट्रंप की बातचीत का दावा झूठा है और अमेरिका जवाबी कार्रवाई के डर से पीछे हटा है ने पूरी दुनिया की राजनीति को मथ देने का काम किया है। ईरान का यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं है बल्कि सीधा मनोवैज्ञानिक वार है। यह उस धारणा पर हमला है जो दशकों से दुनिया के दिमाग में बैठाई गयी कि अमेरिका कभी पीछे नहीं हटता। लेकिन अगर आज यह कहा जा रहा है कि वह डर के कारण पीछे हटा है तो यह सिर्फ एक देश पर नहीं बल्कि उसकी पूरी वैश्विक छवि पर सवाल है।
वहीं बगदाद का वह कमांड सेंटर जो कभी फैसलों का केंद्र था आज उसकी खामोशी बहुत कुछ कह रही है। यह खामोशी चीखती है कि ताकत सिर्फ हथियारों से नहीं बल्कि आत्मविश्वास और नियंत्रण से बनती है। और जब नियंत्रण डगमगाता है तो सबसे मजबूत दीवारें भी दरकने लगती हैं। दो दशकों से ज्यादा समय से मध्य पूर्व में पहरेदार की भूमिका निभा रहा अमेरिकन कमांड सेंटर की जगह पर अब मलबा है और अमेरिकन सैनिक वहां से कूच कर चुके हैं और यहीं से खेल और भी खतरनाक हो जाता है। क्योंकि जब जंग अहंकार और प्रतिष्ठा की बन जाती है तब फैसले समझदारी से नहीं बल्कि दबाव और प्रतिक्रिया से लिए जाते हैं। और ऐसे फैसले अक्सर दुनिया को उस मोड़ पर ले जाते हैं जहां से वापसी आसान नहीं होती। तो सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि कौन सही है और कौन गलत।

महंगाई अब आंकड़ा नहीं हर घर की बेचैनी बनेगी
ईराक से अमेरिका के सैन्य ठिकानों का सिमटना कोई साधारण घटना नहीं है। यह उस पहरेदार का हटना है जो वर्षों से एक अस्थिर इलाके को किसी तरह थामे हुए था। और जैसे ही यह पहरा ढीला पड़ा है वैसे ही कई अदृश्य ताकतें अपने अपने दांव चलने को तैयार खड़ी हैं। सवाल यह नहीं है कि वहां क्या होगा सवाल यह है कि जब वहां सब कुछ बदलेगा तो उसका असर भारत तक कैसे और कितनी तेजी से पहुंचेगा।
भारत को भी आगे करना पड़ेगा मुश्किलों का सामना
भारत जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए उसी क्षेत्र पर निर्भर है अब एक नए जोखिम के मुहाने पर खड़ा है। अगर खाड़ी में हलचल बढ़ती है तो तेल सिर्फ महंगा नहीं होगा बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था की सांसों पर बोझ बन जाएगा। पेट्रोल पंप से लेकर रसोई तक हर जगह इसकी तपिश महसूस होगी। महंगाई सिर्फ आंकड़ा नहीं रहेगी यह हर घर की बेचैनी बन जाएगी। खतरा सिर्फ आर्थिक नहीं है हजारों किलोमीटर दूर बैठा भारतीय कामगार जो खाड़ी देशों में अपनी मेहनत से परिवार चला रहा है वह अचानक इस उथल पुथल का सबसे कमजोर किरदार बन सकता है। अगर हालात बिगड़ते हैं तो सबसे पहले वही फंसेगा न घर लौटने का रास्ता आसान होगा न वहां टिके रहने की गारंटी। और जब वह हिलेगा तो उसके साथ पूरे भारत के लाखों घरों की नींव भी हिल जाएगी।
अमेरिका लगाए इजरायल पर लगाम पूर्व शीर्ष अधिकारी केंट का बयान
अमेरिका के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी केंट ने इजरायल की आक्रामक सैन्य नीति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि वाशिंगटन को तुरंत हस्तक्षेप कर तेल अवीव पर लगाम लगानी चाहिए। केंट के अनुसार इजरायल की लगातार सैन्य कार्रवाई पूरे क्षेत्र को व्यापक युद्ध की ओर धकेल रही है जिसका असर वैश्विक स्तर पर पड़ सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने समय रहते संतुलित भूमिका नहीं निभाई तो यह संघर्ष नियंत्रण से बाहर हो सकता है। केंट ने यह भी कहा है कि अमेरिका की जिम्मेदारी केवल अपने सहयोगी का समर्थन करना नहीं बल्कि क्षेत्रीय शांति बनाए रखना भी है। उन्होंने कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने और सभी पक्षों को वार्ता की मेज पर लाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान अमेरिका के भीतर भी नीति को लेकर बढ़ती असहमति को दर्शाते हैं जहां कुछ पूर्व अधिकारी युद्ध के विस्तार को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा संभावित सैन्य हमलों को रोकने की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों ने राहत की सांस ली है। इस बयान का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर देखा गया जहां अचानक गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद से निवेशकों का भरोसा बढ़ा और बाजारों में स्थिरता लौटने लगी। ऊर्जा बाजार विशेष रूप से संवेदनशील रहते हैं और किसी भी सैन्य टकराव की आशंका से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ जाती हैं। लेकिन ट्रंप की घोषणा ने यह संकेत दिया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में रह सकती है जिससे आपूर्ति बाधित होने का डर कम हुआ। हालांकि विश्लेषक यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यह राहत अस्थायी हो सकती है क्योंकि क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। निवेशक अब भी सतर्क नजर बनाए हुए हैं और किसी भी नए घटनाक्रम पर बाजार की दिशा तेजी से बदल भी सकती है।
कोलंबिया विमान हादसे में 66 जवानों की मौत
कई अभी भी लापता, राहत और बचाव कार्य जारी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
बोगोटा। दक्षिण अमेरिकी देश कोलंबिया में हुए भीषण विमान हादसे में 60 से ज्यादा लोगों की मौत की खबर है। कई लोग अभी भी लापता हैं। हादसे का शिकार हुए विमान में 125 लोग सवार थे और टेक ऑफ के तुरंत बाद ही यह विमान क्रैश हो गया था। कोलंबिया की सेना ने करीब 66 जवानों की मौत की पुष्टि की है। इससे पहले कोलंबिया के प्यूर्तो लेगीजामो शहर के मेयर ने विमान हादसे में 34 जवानों की मौत की बात कही थी।
मीडिया रिपोर्ट्स में 20 से ज्यादा जवानों के लापता होने की बात कही गई है। वायुसेना ने बताया कि हरक्यूलिस ष्ट-130 विमान में 121 लोग सवार थे, जिनमें 110 सैनिक और 11 क्रू सदस्य शामिल थे। यह विमान सोमवार को टेक-ऑफ के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान ने कोलंबिया के पुटुमायो स्थित प्यूर्टो लेगुइजामो से उड़ान भरी थी लेकिन कुछ ही देर बाद वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
महिला सैन्य अधिकारियों के परमानेंट कमीशन पर मुहर पेंशन और समानता का अधिकार सुरक्षित
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर स्थापित करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन दिए जाने के अपने पिछले निर्णयों को सही ठहराया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेना में महिलाओं के स्थायी सेवा के अधिकार में अब कोई दखल नहीं दिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि महिला अधिकारियों को पहले से दिया गया परमानेंट कमीशन बरकरार रहेगा, और यह साफ कर दिया कि मौजूदा व्यवस्था में कोई दखल नहीं दिया जाएगा। एक बड़ी राहत देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि महिला अधिकारी—खास तौर पर शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी और वे लोग जिन्होंने इस मामले में दखल दिया था—जिन्हें कानूनी कार्रवाई के दौरान किसी भी चरण में सेवा से मुक्त कर दिया गया था, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी कर चुका माना जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, वे पेंशन से जुड़े फायदों की हकदार होंगी।हालांकि, कोर्ट ने यह साफ किया कि पेंशन के फायदे तो दिए जाएंगे, लेकिन ये अधिकारी वेतन के किसी भी बकाया के हकदार नहीं होंगे। इस फैसले को सशस्त्र बलों में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जो भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के अधिकारों और सेवा शर्तों को और मज़बूत करता है।
धर्मांतरण करने पर अनुसूचित जाति का दर्जा समाप्त होगा
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसले में कहा कि धर्म परिवर्तन करने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का दर्जा पूरी तरह से खो देता है। सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अगर कोई व्यक्ति उदाहरण के लिए ईसाई धर्म अपना लेता है और ईसाई धर्म के अनुसार जीवन जी रहा है तो उसे अनुसूचित जाति का व्यक्ति नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि हिंदू धर्म, सिख धर्म और बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को मानने वाला व्यक्ति अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा सांविधानिक आदेश, 1950 में साफ कहा गया है कि खंड-3 में बताए गए धर्मों के अलावा किसी भी धर्म में धर्मांतरण करने पर जन्म के बावजूद, अनुसूचित जाति का दर्जा तुरंत समाप्त हो जाता है। यह आदेश एक ऐसे व्यक्ति के मामले में दिया गया, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और अब पेस्टर के तौर पर काम कर रहा है, लेकिन उसने कुछ लोगों के खिलाफ एससी-एसटी (अत्याचार रोकथाम) कानून के तहत मामला दर्ज कराया था। मामला दर्ज कराने वाले व्यक्ति ने एससी-एसटी कानून के तहत संरक्षण की मांग की थी। हालांकि जिन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, उन्होंने इसे चुनौती दी और दावा किया कि पीड़ित ईसाई धर्म अपना चुका है।



