एक गलती से बुरी तरह से फंस गए ज्ञानेश कुमार, बीजेपी की बी-टीम होने का लगा ‘ठप्पा’

चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक पार्टियों, जिला चुनाव अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को भेजा था। यह पत्र 20 मार्च को भेजा गया था

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या चुनाव आयोग का नकाब अब पूरी तरह से उतर चुका है? क्या चुनावों से पहले ज्ञानेश कुमार अब कोई लिहाज़ नहीं कर रहे हैं? क्या ज्ञानेश कुमार के अधिकारी अब कमल छाप मुहर का इस्तेमाल तक करने लगे हैं?

ये सवाल इसलिए आज पूछने पड़ रहे हैं क्योंकि चुनाव आयोग का एक लेटर इस समय सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रहा है जिससे चुनाव आयोग की बीजेपी से साठगांठ सामने आ गई है। इस लेटर के वायरल होते ही चुनाव आयोग अब मुंह छुपाता फिर रहा है। वो इसे ब्लंडर मिस्टेक बता कर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है। लेकिन विपक्ष इस लेटर को लेकर चुनाव आयोग को पूरी तरह से घेर रहा है। तो आखिर इस लेटर में ऐसा क्या है जिसको लेकर चुनाव आयोग की जमकर फजीहत हो रही है .

आज से कुछ महीने पहले जब नेता विपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की वोट चोरी का खुलासा किया था तब ज्ञानेश कुमार के ऊपर बीजेपी के लिए काम करने का ठप्पा लग गया था। लेकिन अब तो हालत ये हो गई है कि चुनाव आयोग के लेटर पर भी भारतीय जनता पार्टी का ठप्पा लगा गया है।

चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक पार्टियों, जिला चुनाव अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को भेजा था। यह पत्र 20 मार्च को भेजा गया था इसमें 19 मार्च 2019 का एक पुराना दस्तावेज संलग्न था। यह दस्तावेज उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के बारे में सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फ़ैसले पर आधारित FAQ यानी अक्सर पूछे जाने वाले सवाल था। लेकिन इस लेटर के नीचे चुनाव आयोग की सील नहीं बल्कि बीजेपी केरल यूनिट की सील लगी हुई थी। सोचिये चुनाव आयोग के लेटर पर कमल छाप सील।

आरोप है कि ईमेल भी किसी प्राइवेट एड्रेस से भेजा गया था, न कि आधिकारिक चुनाव आयोग के एड्रेस से। अब देखिए जैसे ही मामला सामने आया विपक्ष ने दोनों हाथों से इसे लपक लिया और चुनाव आयोग पर हमले शुरू कर दिए।सीपीआई(एम) ने इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं और कहा कि कई पार्टियों को यह मिला है। उन्होंने इसे ‘क्लेरिकल एरर’ नहीं, बल्कि बड़ी साजिश बताया।  सीपीआई(एम) ने एक्स पर पोस्ट किया, “यह कोई राज नहीं कि एक ही पावर सेंटर चुनाव आयोग और बीजेपी दोनों को कंट्रोल करता लगता है। फिर भी कम से कम दो अलग डेस्क तो रखते। अब तो वह भी ज़रूरी नहीं लगता। सील आसानी से बदल दी जाती हैं।

चुनाव आयोग के पत्र पर बीजेपी की सील! जैसे पुराना आरोप था कि कोई भी बटन दबाओ, कमल ही निकलता है, वैसे ही एक और ‘संयोग’।” वहीं केरल कांग्रेस ने भी सवाल उठाए लिखा, “प्रिय चुनाव आयोग, आपने सभी राज्यों को जो पत्र भेजा, उसमें केरल बीजेपी की सील है। क्या आप बीजेपी के ऑफिस से काम कर रहे हैं? उनकी सील कैसे मिल गई? या यह बीजेपी का पत्र है आपके लेटरहेड पर? कृपया सफ़ाई दें।”

इतनी बड़ा मामला हो गया लेकिन चुनाव आयोग पहले तो शातंत बैठा रहा लेकिन सोशल मीडिया पर फजीहत होती देख चुनाव आयोग को सामने आकर इसका जवाब देना पड़ गया। केरल के मुख्य चुनाव अधिकारी यानी सीईओ रथन यू. खेलकर ने आधिकारिक बयान जारी कर इस पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह ‘क्लेरिकल एरर’ यानी दफ्तर के काम वाली गलती था, जिसे तुरंत पकड़ लिया गया और ठीक कर दिया गया।

केरल सीईओ ने कहा, ‘बीजेपी की केरल इकाई ने हाल ही में सीईओ कार्यालय से संपर्क कर उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड के प्रकाशन से जुड़े 2019 के दिशानिर्देशों पर सफ़ाई मांगी थी। अपने अनुरोध के साथ पार्टी ने 2019 के मूल निर्देश की एक फोटोकॉपी जमा की थी। उनके द्वारा दी गई उस प्रति पर पार्टी की मुहर लगी हुई थी। एक चूक के कारण कार्यालय में जमा किए गए दस्तावेज़ पर पार्टी की सील को देख नहीं पाया और अनजाने में उसे अन्य राजनीतिक दलों को भी भेज दिया। विचाराधीन दिशानिर्देशों में 2019 के बाद से संशोधन किए गए हैं, जिनकी सूचना पहले ही सभी राजनीतिक संस्थाओं को दी जा चुकी है।’

  जब तक चुनाव आयोग की सफाई सामने आती उससे पहले विपक्षी पार्टियों ने और सोशलमीडिया पर आम लोगों ने इसे बड़ा मुद्दा बनान शुरू कर दिया था। चुनाव आयोग के लेटर पर बीजेपी की सील लगी इन तस्वीरों सोशल मीडिया पर शेयर किया जाने लगा और चुनाव आयोग पर हनला बोला जाने लगा। जिसके बाद इसको लेकर केरल पुलिस एक्टिव हुई और लोगों से इन पोस्ट को डिलीट करने का दबाव बनाने लगी।

केरल पुलिस ने X को लेटर भेजकर 10 अकाउंट से पोस्ट Delete करने के लिए कहा। केरल पुलिस के अनुसार ये सामग्री सामाजिक सौहार्द को कमजोर करती है। ये पोस्ट राष्ट्रीय संस्था का सीधा अपमान भी है। और अगर पोस्ट नहीं हटाते हैं तो IT एक्ट में एक्शन होगा। मतलब चुनाव आयोग हमारे वोट चोरी करके हमारे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करे फिर अगर कोई उसको बेनकाब करता है उसकी बोल लिखने की आजादी भी छीन ली जाए।

इस समय पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं और पांचों राज्यों में चुनाव आयोग बीजेपी की बी टीम बनकर काम कर रहा है। वहीं विपक्ष बीजेपी के साथ साथ चुनाव आयोग को भी एक बड़ी चुनौती ये रूप में देखा जा रहा है। इस बीच चुनाव आयोग का एक लेटर सामने आता है जिसपर भारतीय जनता पार्टी की मुहर लगी पाई जाती है।

क्या ये मुमकिन नहीं था कि बीजेपी की जगह किसी और पार्टी की मुहर हो सकती थी, लेकिन बीजेपी की मुहर क्यों लगी मिली। और इसे क्लेरिकल एरर कैसे कह सते हैं। क्या चुनाव आयोग के अधिकारी बीजेपी के दफ्तर में बैठकर काम करते हैं जो इनकी मुहर एापस में बदल गई। अब देखिए चुनाव आयोग कुछ भी सफाई दे लेकिन उसकी बातों पर तो कोई भरोसा करने को तैयार ही नहीं है। और होगा भी क्यों, कांग्रेस, टीएमसी, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, आप जैसे विपक्षी दलों ने हाल में चुनाव आयोग और बीजेपी के बीच साठगांठ के कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ये आरोप मुख्य रूप से मतदाता सूची में धांधली, वोट चोरी, और चुनाव प्रक्रिया में पक्षपात पर आधारित हैं।

विपक्ष का दावा है कि चुनाव आयोग बीजेपी के फायदे के लिए विपक्षी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से मनमाने ढंग से हटा रहा है, जबकि बीजेपी समर्थक फर्जी वोटरों को जोड़ रहा है। राहुल गांधी ने 2025 में कई बार कहा कि चुनाव आयोग और बीजेपी की सांठगांठ से वोट चोरी हुई। उन्होंने कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1 लाख से ज्यादा फर्जी वोट का आरोप लगाया। वहीं ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाने को बीजेपी की मदद के लिए साजिश बताया।कांग्रेस और अन्य दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग बीजेपी की सुविधा के अनुसार ही चुनाव की तारीखें घोषित करता है।

5 राज्यों के चुनाव ऐलान पर कांग्रेस सांसदों ने कहा कि बीजेपी जब चाहती है तभी आयोग ऐलान करता है। विपक्ष ने दावा किया है कि ईवीएम में गड़बड़ी, वोटर लिस्ट में डुप्लिकेट, फेक एड्रेस, एक ही पते पर कई वोटर और फॉर्म 6 का दुरुपयोग करके बीजेपी को फायदा पहुंचाया जा रहा है। हालाँकि, चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को बार-बार बेबुनियाद, गलत और राजनीतिक हताशा करार दिया है। बीजेपी ने भी विपक्ष पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। बहरहाल, केरल में अभी चुनावी माहौल गरम है।

सीपीआई(एम) का एलडीएफ़ सत्ता में है। विपक्ष में कांग्रेस का यूडीएफ़ और बीजेपी का एनडीए है। हाल में वोटर लिस्ट की एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी कई विवाद हुए हैं, जहां पार्टियां एक-दूसरे पर धांधली के आरोप लगा रही हैं। यह ताज़ा घटना चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, खासकर जब चुनाव नजदीक हैं। यह पूरा मामला सिर्फ एक “क्लेरिकल एरर” कहकर टाला नहीं जा सकता। जिस संस्था पर लोकतंत्र की नींव टिकी हो, उसकी निष्पक्षता पर उठते सवाल बेहद गंभीर हैं। चुनाव आयोग को अब पारदर्शिता के साथ जवाब देना होगा, वरना जनता का भरोसा लगातार कमजोर होता जाएगा।

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