ईरान ने ट्रंप का प्रस्ताव ठुकराया, कहा—कोई बातचीत नहीं, ट्रंप झूठ बोल रहे

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ बहुत अच्छी बातचीत हो रही है, लेकिन तेहरान से आए एक बयान ने ट्रंप की साख की धज्जियां उड़ा दी हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका का सुपर पावर वाला ढोल फट चुका है? यह सवाल हम नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट के हालात चिल्ला-चिल्लाकर कह रहे हैं।

कल तक जो डोनाल्ड ट्रंप मीडिया के सामने आकर सीना ठोक रहे थे कि ईरान खत्म हो गया है, उसकी एयरफोर्स और नेवी मिट्टी में मिल गई है, आज वही ट्रंप ईरान के सामने सफेद झंडा लहराते दिख रहे हैं।

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ बहुत अच्छी बातचीत हो रही है, लेकिन तेहरान से आए एक बयान ने ट्रंप की साख की धज्जियां उड़ा दी हैं। ईरान ने साफ कह दिया हैकृ ष्बातचीत कैसी? ट्रंप झूठ बोल रहे हैं, हमारा जवाब सिर्फ मिसाइलों से मिलेगा! और इसी के साथ आज इज़राइल पर फिर से ईरानी मिसाइलों की बारिश हुई है।

ट्रंप साहब की आदत है कि वे हार को भी जीत बताकर पेश करते हैं। उन्होंने दावा किया कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 15 पॉइंट्स पर प्रोडक्टिव बातचीत चल रही है। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि ईरान के किसी बड़े लीडर ने उन्हें फोन किया था। लेकिन जैसे ही यह खबर तेहरान पहुँची, वहां के पार्लियामेंट स्पीकर मोहम्मद बाक़िर कलीबाफ़ ने इसे फेक न्यूज़ करार दे दिया।

ईरान ने साफ कहा कि ट्रंप ये सब सिर्फ इसलिए कर रहे हैं ताकि दुनिया के बाज़ारों में तेल की कीमतें गिर सकें और वे अपनी गिरती लोकप्रियता को बचा सकें। ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रजेई का बयान सुनिए।उन्होंने कहा है कि ईरान को पता ही नहीं कि ट्रंप किस टॉप लीडर से बात कर रहे हैं। क्या ट्रंप अब हवा में बातें कर रहे हैं? या फिर उनके सलाहकार उन्हें अंधेरे में रख रहे हैं?

ये वही ट्रंप हैं जो कहते थे कि वे ईरान को नक्शे से मिटा देंगे। लेकिन आज क्या हुआ? मजबूर होकर ट्रंप ने खुद ऐलान किया है कि अगले 5 दिनों तक अमेरिका ईरान के किसी पावर प्लांट या एनर्जी हब पर हमला नहीं करेगा। इसे ट्रंप श्शांति की कोशिशश् बता रहे हैं, लेकिन हकीकत में ये उनके घुटने टेकने की निशानी है।

ईरान की मिसाइलों और ड्रोन्स ने अमेरिकी डिफेंस सिस्टम की पोल खोल दी है। तीन हफ्ते बीत चुके हैं, अरबों डॉलर पानी की तरह बह गए, लेकिन ईरान आज भी पूरी मुस्तैदी से जंग लड़ रहा है। ट्रंप की वॉर मशीनरी ईरान के जज़्बे के सामने नाकाम साबित हुई है। इसी नाकामी को छिपाने के लिए अब ट्रंप सीजफायर की भीख मांग रहे हैं, जिसे ईरान ने लात मार दी है।

खुद ट्रंप जहां एक ओर 15 शर्तों पर अच्छी बातचीत होने के संकेत दे रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर वो इस बात को भी मानना शुरु कर चुके हैं कि उनके फैसले सिर्फ ईरान नहीं बल्कि अमेरिका में उभरे मतभेद के चलते भी लिए गए हैं।  आज ट्रंप ने मीडिया के सामने यह बात कबूल की है कि ट्रम्प ने कहा कि उनके रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सबसे पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के समर्थन में सबसे पहले सामने आए थे।

ट्रम्प के मुताबिक, हेगसेथ का कहना था कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना जरूरी है, इसलिए कार्रवाई करनी चाहिए। इस युद्ध में रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ सबसे ज्यादा सामने नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका का टारगेट ईरान की मिसाइल, ड्रोन और नौसेना ताकत को खत्म करना है। लेकिन यह युद्ध कब खत्म होगा, इस बारे में उन्होंने कुछ साफ नहीं कहा।

ट्रम्प ने माना कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस फैसले से पूरी तरह खुश नहीं थे, लेकिन उन्होंने खुलकर विरोध भी नहीं किया। वहीं कुछ अधिकारियों ने युद्ध का समर्थन किया, तो कुछ इसके खिलाफ थे। इसी बीच एक बड़े अधिकारी ने इस्तीफा भी दे दिया।

वैसे भी ट्रंप के अचानक युद्ध रोकने के पीछे सिर्फ अमेरिका में लोगों के बीच उभरे मतभेद नहीं बल्कि ट्रंप की कहीं न कहीं बड़ी मजबूरी है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने करीब 19 लाख करोड़ रुपए का बजट मांगा है। हर दिन लगभग 13 हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।

संसद में ट्रम्प की पार्टी ही इस बजट के विरोध में है। ऐसे में साफ है कि ये बजट पास नहीं होने वाला है। साथ ही ईरान ने जिस तरह से इजराइल के दो परमाणु केंद्रों डिमोना और अरद पर शनिवार रात को मिसाइल हमले किए। इससे इजराइल और अमेरिका दोनों बैकफुट पर आ गए और इजराइल हो या फिर अमेरिका दोनों को अब इस बात का खतरा सताने लगा है कि ईरान न सिर्फ तबाही का बदला तबाही में बदल सकता है बल्कि उसकी नजर इजराइल की हर एक गतिविधियों पर है।

इसके अलावा जिस तरह से ट्रंप पूरी जंग में अकेले पड़े हैं वो भी अचानक युद्ध रोकने की एक बड़ी वजह है। 32 देशों के सैन्य संगठन नाटो ने अमेरिका के कई बार के अनुरोध के बावजूद अपनी सेनाओं को नहीं भेजा। ब्रिटेन ने होर्मुज को खुलवाने के लिए युद्धपोत भेजने का ऐलान जरूर किया, पर वॉर जोन में तैनात नहीं किया। अन्य प्रमुख देश जैसे जर्मनी, इटली और तुर्किये ने भी अपने को बयानों तक सीमित रखा। ऐसे में ट्रम्प अकेले पड़ रहे थे। आपको बता दें कि ट्रंप के अचानक सरेंडर के पीछे बड़ी वजह यह भी है कि अमेरिका ताइवान से सेमीकंडक्टर चिप का सबसे बड़ा आयातक है। ताइवान अपनी 97 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी पर निर्भर है।

टीएसएमसी के पास 11 दिन की हीलियम सप्लाई है। चिप प्रोडक्शन ठप होने के कगार है। कतर से सप्लाई बंद है। एपल और एनवीडिया पर असर पड़ रहा था। इसके अलावा ट्रंप जान गए है कि अब अगर नहीं रुके तो पूरी दुनिया गंभीर संकट में फंसने वाली है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा, खाड़ी के 9 प्रमुख देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई और कतर के 40 प्रतिशत एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर तबाह हो गए हैं। ग्लोबल ऑयल सप्लाई 11 मिलियन बैरल प्रतिदिन घट चुकी है। 2022 के बाद से ये सबसे बड़ा संकट उभर रहा है।

फर्टिलाइजर की कमी से जूझ रही है। इस सबके साथ नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होंगे। ये ट्रम्प के लिए बड़ा लिटमस टेस्ट होगा। पहले ट्रम्प टैरिफ और अब ईरान जंग के कारण महंगाई बढ़ रही है। ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग में भी युद्ध के बाद 12 प्रतिश्त की कमी आई है। ट्रम्प को महाभियोग से बचने के लिए मिडटर्म में सीनेट में बहुमत को बचाए रखना होगा।

हालांकि अब कहानी में सबसे बड़ा ट्विस्ट आया है पाकिस्तान। रिपोर्ट आ रही है कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर और पीएम शहबाज़ शरीफ इस जंग में बिचौलिए की भूमिका निभा रहे हैं। फाइनेंशियल टाइम्स का दावा है कि आसिम मुनीर ने ट्रंप से फोन पर बात की है और पाकिस्तान ने इस्लामाबाद को बातचीत के लिए वेन्यू के तौर पर ऑफर किया है।

सवाल ये है कि जो अमेरिका खुद को दुनिया का ठेकेदार समझता था, उसे आज पाकिस्तान की ज़रूरत क्यों पड़ गई? क्या ट्रंप इतने कमज़ोर हो गए हैं कि उन्हें ईरान से बात करने के लिए पाकिस्तान के पिछले दरवाज़े का इस्तेमाल करना पड़ रहा है? पाकिस्तान इस संकट को अपने आर्थिक फायदे के लिए इस्तेमाल करना चाहता है, लेकिन ईरान का रुख साफ है कि जब तक इज़राइल और अमेरिका पीछे नहीं हटते, कोई बातचीत नहीं होगी।

इस पूरी बर्बादी के पीछे एक और चेहरा हैकृ बेंजामिन नेतन्याहू। ट्रंप और नेतन्याहू की ये जोड़ी पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रही है। आज इज़राइल का हर शहर खौफ में है। ईरान ने साफ कर दिया है कि ट्रंप के 5 दिन के ब्रेक का मतलब ये नहीं कि ईरान हमला नहीं करेगा। आज फिर इज़राइल की ज़मीन पर धमाके हुए हैं।

तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, सप्लाई चेन टूट गई है और आम आदमी की रसोई तक इस जंग की आंच पहुँच गई है। ट्रंप साहब, आपका सुपर पावर होने का भ्रम अब टूट चुका है। आपने वियतनाम और अफगानिस्तान में जो गलतियाँ की थीं, वही आप ईरान में दोहरा रहे हैं।

हकीकत आईने की तरह साफ है। ट्रंप का 15 पॉइंट फॉर्मूला फ्लॉप हो गया है, ईरान झुकने को तैयार नहीं है और पाकिस्तान अब इस आग में अपनी रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप के पास अब भागने का भी रास्ता नहीं बचा है।

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